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22, 22, 22, 22,
1)कितनी बातें करते हो तुम
ख़ाली बातें करते हो तुम

2)तुमको कोई मरज़ है क्या बस
अपनी बातें करते हो तुम

3) सीधा बंदा हूँ क्यों मुझसे
उल्टी बातें करते हो तुम

4)छुप कर मिलने क्यों आऊँ मैं
ख़ाली बातें करते हो तुम

5)होने लगता है कुछ दिल में
जब भी बातें करते हो तुम

6) चाँद सितारों से क्या अब भी
मेरी बातें करते हो तुम

7)काम नहीं करते हो उतना
जितनी बातें करते हो तुम

8)चैन मिलेगा कैसे तुमको
गुज़री बातें करते हो तुम

मौलिक अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 27, 2021 at 7:05am

आ. भाई अनीस जी, सादर अभिवादन । बहुत खूब गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on October 19, 2021 at 9:11pm

7)काम नहीं करते हो उतना
जितनी बातें करते हो तुम

8)चैन मिलेगा कैसे तुमको
गुज़री बातें करते हो तुम

आदरणीय अनीस अरमान जी, मुझे उपर्युक्त  पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी .. बधाई स्वीकारें!

Comment by Samar kabeer on October 11, 2021 at 7:00am

जनाब अनीस `अरमान` जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है , बधाई स्वीकार करें I 

व्छु`प कर मिलने क्यों आऊँ मैं
ख़ाली बातें करते हो तुम`

इस शे`र के सानी मिसरे में उचित लगे तो `ख़ाली` की जगह `कैसी` कर सकते हैं I 

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