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कहानी ..........

पढ़ सको तो पढ़कर देखो
जिन्दगी की हर परत
कोई न कोई कहानी है

कल्पना की बैसाखियों पर
यथार्थ की हवेलियों में
शब्दों की खोलियों में
दिल के गलियारों में
टहलती हुई
कोई न कोई कहानी है

पत्थरों के बिछौनों पर
लाल बत्ती के चौराहों पर
बसों पर लटकी हुई
रोटी के लिए भटकी हुई
आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज
कोई न कोई कहानी है

सच

पढ़ सको तो पढ़कर देखो
हर बीता पल 

हर छूटा मोड़
आदि से अन्त तक इन्सान
सिर्फ़
कहानी ही कहानी है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on April 27, 2021 at 3:45pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 25, 2021 at 4:13pm

आ. भाई सुशील जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

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