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लघुकथा-- नहले पर दहला

" कूड़े मल इस दुकान को मैंने खरीद लिया है, अब से एक हफ़्ते में खाली कर देना"

" क्या.... क्या बकवास कर ती हो, मैं कई वर्ष पुराना किरायेदार हूँ, मेरी रोज़ी - रोटी चलती है, यहाँ से! बिल्कुल खाली नहीं करूँगा" ! कूड़े मल कस्बे का बड़ा किराना व्यापारी था! बूढ़े, कमज़ोर राम आसरे का मूल किरायेदार था जिसको उसने किराया देना बंद कर दिया था! हारकर राम आसरे ने दबंग, झगड़ालू औरत सुनहरी देवी को आधी कीमत अग्रिम लेकर पावर आफ अटार्नी कर दी थी! 

कूड़े मल अब परेशान था! भागा-भागा अपने वकील साहब के पास पहुँचा, सारा दर्द कह सुनाया! लम्बी सांस खींचकर वकील साहब बोले, " कानून इसमें आपकी कोई मदद नहीं कर सकता! और, सुनहरी देवी..... भगवान बचाए, उससे तो! आप होशियारी करेंगे तो जेल करा देगी! बहुत ड्रामेबाज़ औरत है! कपड़े फाड़कर आप पर बलात्कार का इल्जाम भी लगा सकती है! और, देखिए लालाजी जब कई लाख दाव पर, सुनहरी देवी, लगा सकती है तो पुलिस को भी दस- बारह हजार दे सकती है, सोच लो"! हफ्ता बीतते ना बीत़ते कूड़े मल सुनहरी देवी के सामने हाथ जोड़े खड़े थे! 

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 18, 2021 at 9:19am

आ. भाई चेतन जी, अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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