For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

22 22 22 22 

कैसा अक्कड़ बक्कड़ है दिल..

पा के तुझको अक्खड़ है दिल..

सपने देखे, ऐसे वैसे..

रब्बा जाने कैसे कैसे..

उड़ता फिरे ये बैठे बैठे..

चाहे मिलना जैसे तैसे..

फिरते फ़क़ीर सा फक्कड़ है दिल।

उठते ही जालिम ये सबेरे..

हाथ पैर ये जोड़े मेरे..

चल कर आयें, घर के फेरे..

चिपका गली से, जैसे तेरे..

मोहल्ले का, नुक्कड़ है दिल।

चाहे, तुझसे बातें ये करे..

हाँ रोज़ मुलाकातें ये करे..

कुछ ऐसी करामातें ये करे..

साथ में दिन अर रातें ये करे..

तेरी तलब का, भुख्खड़ है दिल.।

प्यार से पहले की नफरतों का..

ढीढ सी तेरी फितरतों का..

बाहों में कसती कसरतों का..

आँखों में हँसती हसरतों का..

हाय! अजीब पियक्कड़ है दिल।

कातिलाना ऐसे ख्यालों पे..

शर्म से लाल हुए गालों पे..

तेरे मासूम सवालों पे..

उजली आवाज के प्यालों पे..

दो होठों का थप्पड़ है दिल।

(2×8)

*********************

मौलिक व अप्रकाशित

*********************

Views: 178

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on January 31, 2021 at 10:10pm

आ. समर सर नहीं यह ग़ज़ल नहीं है, लेकिन एक निश्चित मीटर पर गीत के रूप हृदय के भावों को व्यक्त करने का मेरा प्रयास था।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on January 31, 2021 at 10:07pm

आ. अमीरुद्दीन अमीर सर इस गीत पर आपकी दाद पाकर हृदय प्रसन्न हुआ।हौसलाफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on January 30, 2021 at 3:27pm

जनाब 'जान' गोरखपुरी जी आदाब, आपने ऊपर अरकान ग़ज़ल के लिखे हैं,लेकिन ये ग़ज़ल तो नहीं है?

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on January 30, 2021 at 11:46am

जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, दिल की विभिन्न भावनाओं का सुन्दर चित्रण करती उत्तम कविता हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
" भाई   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत…"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"आ. ममताजी, गजल केप्रयास व ओबीओ परिवार में सम्मिलित होने होने के लिए हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )
"आ. भाई गिरधारी सिह जी, खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
14 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है

122 122 122 122उठाकर शहंशह क़लम बोलता हैचढ़ा दो जो सूली पे ग़म बोलता हैये फरियाद लेकर चला आया है…See More
16 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैंन है बर्ग-ए-गुल…See More
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मौत का भय है न जिनको जुल्म वो सहते नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122/2122/2122/212है नहीं क्या स्थान जीवन भर ठहरने के लिएजो शिखर चढ़ते हैं सब ही यूँ उतरने के…See More
16 hours ago
Samar kabeer commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"मुहतरमा ममता गुप्ता 'नाज़' जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा…"
20 hours ago
Deependra Kumar Singh updated their profile
20 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आख़िर
"आदरणीय उपाध्याय जी हार्दिक आभार आपका..."
21 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल ( हो के पशेमाँ याद करोगे)
"जनाब आज़ी 'तमाम' साहिब आदाब, जी हाँ ख़ुदा का शुक्र है सब ठीक है आज़ी साहिब। ग़ज़ल पर आपकी…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. ममता जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -ख़ुद को ऐसे सँवार कर जागा
"धन्यवाद आ. समर सर "
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service