For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे किरदार पर धब्बा नही था

ग़ज़ल : 1222,1222,122

मेरे किरदार पर धब्बा नहीं था
तुम्हीं ने ग़ौर से देखा नही था

मेरे ग़म को समझता कोई कैसे
कोई मेरी तरह तनहा नहीं  था

मैं इक ठहरा हुआ तालाब था बस
वो दरिया था कभी ठहरा नहीं  था

तेरी हर बात सच्ची थी हमेशा 
फ़क़त लहजा ही बस अच्छा नहीं था

न आया जो नदी के पास यारो
वो प्यासा था मगर इतना नहीं था

नज़र मेरी थी मंज़िल पर हमेशा
थकन का पाओं से रिश्ता नहीं  था

तुम इसको जीत समझो "जोहना" पर 
हक़ीक़त ये है वो हारा नहीं था

साध्वी ‘जोहना’

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 412

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Chetan Prakash on April 6, 2021 at 10:05am

आदाब, 'अमीर' साहब, मकते के सानी का तक्तीअ , 'अमीर +' अब , अमीरब ( 1212) इश्क़ ( 21 ) +में खुद (  22 ) को ज (11 ) ला के (22 ) देख ते हैं ( 2122 ) होता है, आभार  ! 

Comment by Sadhvi Saini on September 13, 2020 at 10:41am

लक्ष्मण धामी जी, अदाब, मैंने एडिट करने की कोशिश की थी मगर हुई नहीं! आपका तहे -दिल से शुक्रियाI प्रणाम!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 13, 2020 at 8:30am

आ. साध्वी सैनी जी, गजल का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई । सुधीजनों के मार्गदर्शन से रचना बेहतर निखार पा सकती है।

Comment by Sadhvi Saini on September 13, 2020 at 12:04am

आदरणीय Samar kabeer जी,मेरी ग़ज़ल को ओ बी ओ  में शामिल करने के लिए शुक्रिया और सभी सुझावों के लिए भी आपका   तहे- दिल से शुक्रगुज़ार हूँ! सादर प्रणाम!

Comment by Sadhvi Saini on September 12, 2020 at 11:57pm

आदरणीय Harsh Mahajan ji अदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और सुख़न नवाज़ी का तहे-दिल से शुक्रियाI सादर!

Comment by Sadhvi Saini on September 12, 2020 at 11:52pm

आदरणीय DR ARUN KUMAR SHASTRI जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और सुख़न नवाज़ी का तहे -दिल शुक्रिया I सादर!

Comment by Sadhvi Saini on September 12, 2020 at 11:46pm

आदरणीय अमरूदीन अमीर जी स्वागत के लिए तहे दिल से शुक्रिया! सभी सुझावों  के लिय आपकी शुक्रगुज़ार हूँI सादर प्रणामI 

Comment by Harash Mahajan on September 12, 2020 at 8:25pm

बहुत ही खूबसूरत ख्यालों भरी रचना आदरणीय सैनी जी। 

सादर

Comment by Samar kabeer on September 12, 2020 at 4:23pm

मुहतरमा साध्वी सैनी जी आदाब, ओबीओ पर आपका स्वागत है ।

ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,और इस ग़ज़ल की फ़ीचर ब्लॉग में शामिल होने पर बधाई स्वीकार करें ।

बहुत कुछ समझाइश जनाब अमीर जी दे ही चुके हैं ।

'तिरी हर बात सच्ची थी हमेशा 
फकत लहज़ा ही बस अच्छा नहीं था'

उचित लगे तो इस शैर को यूँ कर लें:-

'तेरी हर बात सौ फ़ीसद थी सच्ची

मगर लहजा तेरा अच्छा नहीं था'

'नदी के पास आया ही नहीं वो
वो प्यासा था मगर इतना नहीं था'

इस शैर के दोनों मिसरों में 'वो' शब्द खटकता है,इस शैर को यूँ कह सकती हैं:-

'न आया जो नदी के पास यारो

वो प्यासा था मगर इतना नहीं था'

'वो बाज़ी ‘जोहना’ जीती थी तुमने
मगर सच ये है वो हारा नहीं था'

मक़्ते के दोनों मिसरों में 'वो' शब्द खटकता है,कथ्य भी साफ़ नहीं है,यूँ कर सकती हैं :-

'तुम इसको जीत समझो 'जोहना' पर

हक़ीक़त ये है वो हारा नहीं था'

Comment by DR ARUN KUMAR SHASTRI on September 12, 2020 at 3:06pm

मोहतरमा साध्बी सैनी जी को एक अबोध बालक का  आदाब पहुंचे 

आपकी ग़ज़ल बेहतरीन / मुझे इस गजल की ये लाइन्स बहुत मार्मिक लगी 

ये हम सभी के किर् दार का अनछुआ हिस्सा  हैं 
**
मेरे ग़म को समझता कोई कैसे
कोई मेरी तरह तनहा नही था

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िरपरेशां  हूँ कमी  क्या है…See More
55 minutes ago
Ram Ashery posted a blog post

हम होगें कामयाब

आज अपने मकसद को पाने में हम होगें कामयाब मन में रख विश्वास, महामारी से जंग जीत जायेगें कुदरत के…See More
55 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
" जी, प्रतिभा जी, आपने सही  कहा ! विषय को दृष्टिगत रखते हुए अच्छा  प्रयास  है…"
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"इस सकारात्मक गीत सृजन पर हार्दिक बधाई आदरणीय चेतन प्रकाश जी"
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी   ये एक छंदमुक्त/ अतुकान्त रचना है। सादर"
21 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी"
21 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आदरणीया, प्रतिभा  पांडे  जी, नमस्कार ! रचना  किस विधा  में है, आपने, विदुषी,…"
21 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
" आ. भाई लक्ष्मण जी सप्रेम  व॔दे ! आप का अतिशय  आभार  कि आप …"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई शून्य आकाशी जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-127
"आ. प्रतिभा बहन सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service