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जय गणतंत्र, जय संविधान

देश पर मुझको है अभिमान

जय गणतंत्र जय संविधान

धर्म निरपेक्ष है देश हमारा

सुंदर प्यारा देश महान || 

हर संस्कृति को करता स्वीकार

अमन चैन में है विश्वास 

धर्म-जाति का भेद नहीं

अधिकार दिलाता सबको समान ||

शत्रु को भी मित्र समझता

सबका करता है कल्याण

शरणार्थियों को शरण दिलाता

सबसे बड़ा हिन्द संविधान ||

नर-नारी सब एक समान

हर क्षेत्र में उनका योगदान

सारी दुनियाँ में भारतवासी

रोशन करते देश का नाम || 

महाशक्ति बनने को तैयार खड़ा

रोज बनाता नए मुकाम

एक धर्म और एक ही नारा

सबसे अच्छा हिंदुस्तान ||

अप्रकाशित व मौलिक 

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 1, 2020 at 10:40am

आ. भाई फूलसिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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