For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को

२२१ २१२१ १२२१ २१२

चंदा मेरी तलाश में निकला है रात को!

शायद वो मेरी चाह में भटका है रात को !!

 

होती है उम्र उतनी ही जितनी कि है लिखी!

जलता दिया भी देखिये बुझता है रात को!!

 

आँखों के डोरे कर रहे सब कुछ बयां यहाँ!

लगता है तेरा ख्वाब भी उलझा है रात को!!

 

दुनिया की भीड़ में मेरा दिन तो गुज़र गया!

हर शख्स ही लगा हमें तनहा है रात को!!

 

बदनामियों के डर से ही हम तो सिहर गए!

हर ख्वाब जैसे अपना  ही रोया है रात को!!

 

मेरी हसीन मह्ज़बीं शरमा के रह गयी!

आगोश में लगा कोई सिमटा है रात को!!

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

 

आभा सक्सेना दूनवी

 

 

 

Views: 261

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 19, 2019 at 11:50am

मुहतरमा आभा सक्सेना जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'जलता दिया भी देखिये बुझता है रात को'

दिया तो रात को जलता है,अंतिम रात में बुझता है,इस बिन्दु पर ग़ौर करें ।

'आँखों के डोरे कर रहे सब कुछ बयां यहाँ'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें,इसे यूँ कर सकती हैं:-

'आँखों के डोरे करते हैं सब कुछ बयाँ, यहाँ'

'दुनिया की भीड़ में मेरा दिन तो गुज़र गया!

हर शख्स ही लगा हमें तनहा है रात को'

इस शैर में शुतरगुरबा दोष है,सानी मिसरे में 'हमें' की जगह "मुझे" कर लें,दोष निकल जायेगा ।

'बदनामियों के डर से ही हम तो सिहर गए!

हर ख्वाब जैसे अपना  ही रोया है रात को'

इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है,दोनों मिसरों में रब्त पैदा करने का प्रयास करें ।

'मेरी हसीन मह्ज़बीं शरमा के रह गयी!

आगोश में लगा कोई सिमटा है रात को'

इस शैर का भाव भी स्पष्ट नहीं है,'मेरी हसीन,महजबीं' कौन?

Comment by Abha saxena Doonwi on July 16, 2019 at 5:30pm
आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट जी पसंदगी के लिए आभार आपका
Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on July 16, 2019 at 4:33pm

बहुत खूब बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 123 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक स्वागत है, सुधीजनो !"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"वाह .. आपकी छांदसिक यात्रा के प्रति साधुवाद  शुभातिशुभ"
1 hour ago
Md. Anis arman posted a blog post

ग़ज़ल

12122, 121221)वो मिलने आता मगर बिज़ी थामैं मिलने जाता मगर बिज़ी था2)था इश्क़ तुझसे मुझे भी यारा तुझे…See More
4 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
4 hours ago
सालिक गणवीर posted blog posts
4 hours ago
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब लक्ष्मण धामी साहब ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
5 hours ago
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कबीर साहब ग़ज़ल तक आने और अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादन एक उम्दः ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

आत्म घाती लोग - लघुकथा -

आत्म घाती लोग - लघुकथा - मेरे मोबाइल की  घंटी बजी। स्क्रीन पर दीन दयाल का नाम था। मगर दीन दयाल का…See More
12 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी हौसला बढ़ाने के लिए आभार। आदरणीय बहुत ध्यान रखती हूँ फिर भी नुक़्ते कहीं न…"
13 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब।सर् हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रिय:।सर् फेयर में आपके कहे अनुसार सुधार…"
13 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

221     2121     1221     212रस्मो- रिवाज बन गयी पहचान हो गयी वो दिलरुबा थी मेरी जो भगवान हो…See More
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service