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दूर तम में बैठकर वो रोशनी अच्छी लगी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२


मन था सुन्दर तो वदन की हर कमी अच्छी लगी
उस के अधरों  ने  कही  जो  शायरी  अच्छी लगी/१
*
सात जन्मों  के  लिए  वो  बन्धनों  में बँध गये
जिन्दगी के बाद जिनको जिन्दगी अच्छी लगी/२
*
आँख चुँधियाती रही जो पास में अपनी सनम
दूर  तम  में  बैठकर  वो  रोशनी  अच्छी  लगी/३
*
एक  हम  ही  भागते  रंगीनियों  से  दूर  नित
और किसको बोलिए तो सादगी अच्छी लगी/४
*
हाथ में था हाथ उनका दूर तक कोई न था
फिर से बारिश यूँ हमें बेमौसमी अच्छी लगी/५
*
एक सच आँखों में था जो वो नहीं उनको रुचा
आवरण में झूठ  के  हर  बतकही अच्छी लगी/६
*
मन उबा अपना भी साथी जब नगर के शोर से
झील के तट फिर  अकेले  चाँदनी अच्छी लगी/७
*
लोग चर्चा रोज करते दोस्ती की उन से पर
हमको फूलों से हुई जो दुश्मनी अच्छी लगी/८


*
मौलिक/ अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 17, 2021 at 8:44pm

आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 17, 2021 at 8:15pm

बढ़िया कहा आदरणीय धामी जी...बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 10, 2021 at 10:47pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार। 

त्रुटिपूर्ण मिसरे को इस प्रकार देखिएगा सादर-

आँख चुँधियाती रही जो पास था जब तक सनम

Comment by Samar kabeer on December 10, 2021 at 2:29pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'उस के अधरों  ने  कही  जो  शायरी  अच्छी लगी'

इस मिसरे में 'शायरी' को "शाइरी" लिखना उचित होगा ।

'आँख चुँधियाती रही जो पास में अपनी सनम'

इस मिसरे में 'पास' शब्द के साथ 'में' का प्रयोग उचित नहीं होता,देखियेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 5, 2021 at 10:54pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद.

Comment by TEJ VEER SINGH on December 5, 2021 at 12:14pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मुसाफ़िर जी।बेहतरीन ग़ज़ल।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 4, 2021 at 7:07pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on December 4, 2021 at 6:31pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

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