For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

करने को नित्य पाप जो-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२


करने को नित्य  पाप  जो  गंगा नहायेंगे
हम से अधिक न यार कभी पुण्य पायेंगे।१।
**
तन के धुलेंगे पाप न पावन जो मन हुआ
अंतस में ग्लानि होगी तो गंगा को आयेंगे।२।
**
कोसेेंगे एक दिन तो स्वयं अपने आप को
अपनी नजर से बोलिए क्या क्या छिपायेंगे।३।
**
हम को भले ही भाव न तुम दो अभी मगर
घन्टी बजा कलम  से  तो  हम ही जगायेंगे।४।
**
जिनको शऊर आया न दीपक जलाने का
कहते  हैं  रोशनी  को  वो  सूरज  उगायेंगे।५।
**
अब जिन के पाप ढोते यूँ बेबस धरा हुई
कहते हैं वो  ही  चाँद  पे  बस्ती बसायेंगे।६।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Views: 277

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 16, 2021 at 6:53pm

आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद।
इस मिसरे को यूँ देखिएगा-

/करने को लौट  पाप  जो  गंगा नहायेंगे
कैसे भला वो लोग अधिक पुण्य पायेंगे
// (यहाँ आशय यह है कि लोग मन से प्रायश्चित करने नहीं जाते । केवल तन धोकर आ जाते हैं)
.
//घन्टी बजा कलम  से  तो  हम ही जगायेंगे.....
(क्या यहाँ नया रूपक गढ़ना अनुचित है ?) सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 9, 2021 at 10:30am

आ. लक्ष्मण जी,
ग़ज़ल का कहन थोडा उलझा हुआ है ..
.
करने को नित्य  पाप  जो  गंगा नहायेंगे.... पाप करने के लिए कौन गंगा नहाता है??
हम से अधिक न यार कभी पुण्य पायेंगे.... इसमें ऐसा लग रहा है कि आप अपने यारों को आपसे कम पुण्यात्मा बता रहे हैं.
.
घन्टी बजा कलम  से  तो  हम ही जगायेंगे.....कलम से घण्टी बजाने का कोई रूपक मुझे ध्यान नहीं आता...
.
बाकी ग़ज़ल के लिए बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 4, 2021 at 1:26pm

प्रिय बहन सुचि जी, स्नेहाशीष ।गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 4, 2021 at 1:24pm

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" on May 31, 2021 at 7:43pm
  • वाहः उत्कृष्ट सृजन लक्ष्मण जी। 
Comment by Aazi Tamaam on May 31, 2021 at 7:42pm

सादर प्रणाम आ धामी सर

खूबसूरत ग़ज़ल हुई है

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 31, 2021 at 4:35pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति से गजल मुकम्मल हुई...आभार।गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिए पुनः आभार..

Comment by Samar kabeer on May 31, 2021 at 2:57pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'कोसोगे एक दिन तो स्वयं अपने आप को
अपनी नजर से बोलिए क्या क्या छिपायेंगे'

इस शैर में शुतर गुरबा दोष है,ऊला में 'कोसोगे' को "कोसेंगे" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

AMAN SINHA posted blog posts
30 minutes ago
Rahul Dangi Panchal posted a blog post

ग़ज़ल खुशी तेरे पैरों की चप्पल रही है

मेरी ज़िंदगी ग़म का जंगल रही है खुशी तेरे पैरों की चप्पल रही है कहीं कोई तो बात है साथ उसके कमी…See More
46 minutes ago
AVINASH KUMAR RAO is now a member of Open Books Online
48 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"इस आयोजन की समाप्ति के भावमय अवसर पर मैं सभी प्रतिभागियों तथा पाठकों के प्रति आभार अभिव्यक्त करता…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका सादर आभार आदरणीय अमीरुद्दीन साहब."
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब, भुजंगप्रयात छंद पर आधारित आपकी तृतीय रचना शानदार प्रदर्शन है, आपका…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जय-जय "
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"कहेंगे, सभी एक-सी ही कहेंगे इसे पाठशाला बड़ी-सी कहेंगे कहा ओबिओ ने सदस्यो, लगे हो !विधा पद्य के सीख…"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ रात्रि जनाब ।"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मेरी भी बधाई स्वीकार करे, जनाब सौरभ साहिब की बात से सहमत हूँ ।"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नज़ारे सभी से जुदा दीखते हैं यहाँ जो सिखाते वही सीखते हैं ।। मियाँ ओबिओ की करामात है ये मुझे तो लगा…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। छंदों की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
11 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service