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बलि नित्य चढ़ाई जाती है

आशाओं , आकांक्षाओं की

जीवन की और प्रतिभाओं की

इस लोकतन्त्र के मन्दिर में

बलि नित्य चढ़ाई जाती है

कोरोना की महमारी में

त्रासद स्थिति, लाचारी में

लाशों पर राजनीति करके

जनता भरमाई जाती है

जिस समय मुसीबत ने घेरा

चँहु ओर काल का है डेरा

वीभत्स घड़ी में आन्दोलन

रैली करवाई जाती है

नज़रें गड़ाए सब वोटों पर

टिकती निगाह बस नोटों पर

शासन में भागीदारी की

कामना जगाई जाती है

इस लोकतन्त्र के मन्दिर में

बलि नित्य चढ़ाई जाती है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Usha Awasthi on April 27, 2021 at 12:50pm

आ0 लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , हार्दिक धन्यवाद आपको

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 27, 2021 at 12:06pm

आ. ऊषा जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Usha Awasthi on April 25, 2021 at 5:53pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर ' साहेब,

रचना पसंद आने हेतु हार्दिक शुक्रिया आपका

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on April 25, 2021 at 4:55pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, सम-सामयिक अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर। 

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