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सालिक गणवीर's Blog (49)

( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे

कल घाट मौत के यूँ उतारा गया मुझे (1)

मैं जा रहा था रूठ के लेकिन सदा न दी

था सामने खड़ा तो पुकारा गया मुझे (2)

मैं एक साँस में कभी बाहर न आ सकूँ

दरिया में और गहरे उतारा गया मुझे (3)

अक्सर यही हुआ है मैं जब भी दुरुस्त था

बिगड़ा नहीं था फिर भी सुधारा गया मुझे (4)

देता रहूँ सबूत मैं कब तक वज़ूद का

हर बार हर क़दम पे नक़ारा गया मुझे…

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Added by सालिक गणवीर on April 7, 2021 at 1:51pm — 9 Comments

बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती

लाठी एक तनकर थी अब खड़ी नहीं होती (1)

छोटे छोटे ख़्वाबों का रोज़ क़त्ल करती है

बेटी क्यों ये आसानी से बड़ी नहीं होती (2)

आपसे मिलूँ गर मैं तो उदास होता हूँ

और जब नहीं मिलते तो ख़ुशी नहीं होती (3)

बढ़ नहीं सकी आगे कार ही उमीदों की

लाल ही रही बत्ती वो हरी नहीं होती (4)

ज़िंदगी में दोनों तो साथ साथ रहते हैं

पर गुलाब काँटों में दोस्ती नहीं होती…

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Added by सालिक गणवीर on March 19, 2021 at 11:01pm — 4 Comments

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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शम्स हरदम छुपा नहीं रहता

बादलों से ढका नही रहता (1)

लोग मुझको न ढूँढ पाएँगे

मैं कहाँ हूँ पता नहीं रहता  (2)

इश्क़ में काम इतने होते हैं

फिर कोई काम का नहीं रहता  (3)

लोग आपस में बाँट लेते हैं

मेरा हिस्सा बचा नहीं रहता (4)

हम सभी मिल के एक होते तो

मुल्क इतना बँटा नहीं रहता (5)

लौट आया है सुख मिरे घर में

देख रहता है या नहीं रहता (6)

इक न इक…

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Added by सालिक गणवीर on March 5, 2021 at 4:42am — 5 Comments

यार कब तक डरा करे कोई.........( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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यार कब तक डरा करे कोई

मौत का सामना करे कोई (1)

मैं तो उनके क़रीब रहता हूँ

दूर मुझसे रहा करे कोई (2)

मुफ़्त में गर किसी को देना हो

मशविर: दे दिया करे कोई (3)

मयकदे से बताओ ऐ यारो

दूर कब तक रहा करे कोई (4)

क्या ज़मींदोज़ करके मानेगा

और कितना दबा करे कोई (5)

वक्त के साथ भर ही जाएँगे

ज़ख़्म जितने दिया करे कोई (6)

यार "सालिक" की अब ये ख़्वाहिश…

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Added by सालिक गणवीर on February 14, 2021 at 10:30pm — 8 Comments

तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा 

जो बुरा है वो भला हो जाएगा (1)

जो पुराना जख़्म माज़ी ने दिया

दो ही दिन में क्या नया हो जाएगा (2)

खाद पानी मिलने से ही क्या शजर

वक़्त से पहले बड़ा हो जाएगा (3)

है अलग सबसे ख़ज़ाना प्यार का

ख़र्च कीजै दोगुना हो जाएगा (4)

दोस्ती में दर्द-ओ-ग़म हो या ख़ुशी

जो भी तेरा है मेरा हो जाएगा (5)

क़द अगर छोटा है उसका दोस्तो

मैं झुका तो वो बड़ा…

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Added by सालिक गणवीर on January 29, 2021 at 10:30pm — 11 Comments

एक पत्थर सा बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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एक पत्थर सा बस पड़ा हूँ मैं

हूँ मुसाफ़िर या रास्ता हूँ मैं (1)

अब कोई ढूँढता नहीं मुझको

एक मुद्दत से लापता हूँ मैं (2)

ज़िंदगी आजकल जहन्नम है

ख़्वाब जन्नत के देखता हूँ मैं (3)

छोड़ कर सब चले गए हैं या

भीड़ में फिर से खो गया हूँ मैं (4)

अब नहीं इंतिज़ार तेरा पर

रास्ता रोज़ देखता हूँ मैं (5)

हर तरफ है अजीब वीरानी 

खुद में शायद उजड़ रहा हूँ मैं…

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Added by सालिक गणवीर on January 15, 2021 at 8:00pm — 8 Comments

होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी

कैसे करे ये दिल बता आराम भी कभी  (1)

अब हो न जाँऊ यार मैं बदनाम भी कभी

हो जाए मुफ्त में न मेरा नाम भी कभी  (2)

क्या क्या चुरा लिया है ये मुझसे न पूछिये

लूटा गया है मुझको सर-ए-आम भी कभी  (3)

कुछ इस तरह से छोड़ गए हैं मुझे यहाँ

आते नहीं हैं मुद्दतों पैगाम भी कभी  (4)

करते रहे हवाई सफ़र मुफ़्त में सदा

कुछ लोग तो चुकाते नहीं दाम भी कभी …

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Added by सालिक गणवीर on January 10, 2021 at 11:00pm — 6 Comments

उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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उसे पहले कभी देखा नहीं था

वो दिल के पास जो रहता नहीं था  (1)

लगी है शह्र की इसको हवा अब

हमारा गाँव तो ऐसा नहीं था  (2)

बहुत कुछ बोलती थीं आँखें उसकी

ज़ुबाँ से वो कभी कहता नहीं था  (3)

अँधेरों ने रखा था क़ैद जब तक

उजाला दूर तक फैला नहीं था  (4)

न जाने क्या हुआ भरता नहीं है

पुराना घाव तो गहरा नहीं था  (5)

वही तन कर खड़ा रहता है आगे

कभी जो सामने बैठा नहीं…

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Added by सालिक गणवीर on January 1, 2021 at 2:30pm — 6 Comments

यहाँ तो बहुत हैं अभी यार मेरे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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यहाँ तो बहुत हैं अभी यार मेरे

मगर याँ अदू भी हैं दो-चार मेरे (1)

कभी भूलकर भी न उनको सज़ा दी

रहे उम्र-भर जो गुनहगार मेरे (2)

हिकारत से अब देखते हैं मुझे भी

यही लोग थे कल तलबगार मेरे (3)

मुझे टुकड़ों में बाट कर ही रहेंगे

हैं दुनिया में जो लोग हक़दार मेरे (4)

जो रिश्ते सभी तोड़ कर जा चुका है 

उसी से जुड़े हैं अभी तार मेरे (5)

वही मिल…

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Added by सालिक गणवीर on December 24, 2020 at 11:00pm — 11 Comments

उसने आज़ाद कब किया है मुझे (ग़ज़ल)

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क़ैद नज़रों में ही रखा है मुझे

उसने आज़ाद कब किया है मुझे  (1)

इससे बहतर तो था अदू मेरा

यार दीमक सा खा रहा है मुझे  (2)

 रात की नींद उड़ गई मेरी

ख़्वाब में जब से वो दिखा है मुझे  (3)

सुब्ह तक होश में नहीं आया

रात इतनी पिला चुका है मुझे  (4)

मंज़िलों तक पँहुच नहीं पाया

पर वो रस्ता बता गया है मुझे  (5)

वो शिकायत कभी नहीं करता

उससे इतना ही अब गिला है मुझे …

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Added by सालिक गणवीर on December 14, 2020 at 11:00pm — 6 Comments

सामने आ तू कभी ख़्वाब में आने वाले....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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सामने आ तू कभी ख़्वाब में आने वाले

क्या मिला तुझको मेरी नींद उड़ाने वाले (1)

ऐसा लगता है कि आने का इरादा ही नहीं

वर्ना महशर में भी आ जाते हैं आने वाले (2)

चंद लम्हे भी अगर बंद हुई हैं पलकें

आ ही जाते हैं नये ख़्वाब दिखाने वाले (3)

क्या ग़जब है कि नये लोग चले आए हैं

घर में पहले से ही थे आग लगाने वाले (4)

मैं इस उम्मीद में बस आज तलक ज़िंदा हूँ

लौट आएँगे कभी छोड़ के जाने वाले…

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Added by सालिक गणवीर on December 8, 2020 at 9:20am — 11 Comments

मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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जाँ से प्यारे हैं सारे लोग मुझे

मार देंगे मगर ये लोग मुझे(1)

मुझको पानी से प्यार है लेकिन

एक दिन फूँक देंगे लोग मुझे (2)

मैं उन्हें अपना मानता हूँ मगर 

ग़ैर समझे हैं मेरे लोग मुझे (3)

उम्र भर शह्र में रहा फिर भी

जानते ही नहीं ये लोग मुझे (4)

बाद मुद्दत के अपने गाँव गया

सारे पहचानतेे थे लोग मुझे (5)

उनकी बातों का क्यों बुरा मानूँ

लग रहे हैं भले से लोग…

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Added by सालिक गणवीर on November 26, 2020 at 4:00pm — 6 Comments

फिर से मुझको न वो हरा जाए....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

फिर से मुझको न वो हरा जाए

इससे पहले ही कुछ किया जाए (1)

जब वो आँखों से कुछ नहीं कहता

कान में कुछ तो बुदबुदा जाए (2)

बन गया है वो मील का पत्थर

अब उसे ठीक से पढ़ा जाए (3)

यार अब बन गया अदू मेरा

अब भले को बुरा कहा जाए (4)

सीधे रस्ते पे क्या चलेगा वो

जिसका ईमान डगमगा जाए (5)

है जबाँ यार ये महब्बत की

उससे उर्दू में कुछ कहा जाए…

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Added by सालिक गणवीर on November 13, 2020 at 9:30am — 7 Comments

जो किसी का नहीं अब वही है मेरा ....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212 212 212 212

आज दिल उसके दुख से दुखी है मेरा

जो किसी का नहीं अब वही है मेरा (1)

मौत मुझको बुलाती है हर पल मगर

ज़िंदगी रास्ता रोकती है मेरा  (2)

लिख न पाऊँगा मैं आज क्या हो गया

मौत से सामना आज भी है मेरा  (3)

डगमगाते हैं जब भी क़दम ये मिरे

यार मंज़िल पता पूछती है मेरा   (4)

रख दिया है मुझे आग के सामने

जानता है बदन काग़ज़ी है मेरा  (5)

रोक सकता नहीं रथ के पहिए कोई

अब…

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Added by सालिक गणवीर on November 2, 2020 at 5:00pm — 9 Comments

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212  212  212  212

ज़िंदगी रास्ता देखती हो मेरा

सामना मौत से भी तभी हो मेरा  (1)

मैं चलूँ अपने बच्चों की उंँगली पकड़

फिर भले ये सफ़र आख़िरी हो मेरा  (2)

वाक़िआ होगा पहला यक़ीं मानिए

सामना मौत से जब कभी हो मेरा  (3)

अब ये मुमकिन नहीं आज के दौर में

शह्र में भी रहूँ गांँव भी हो मेरा  (4)

ख़ाक ऐसे करें नफ़रतों का जहाँ

आग तेरी रहे और घी हो मेरा  (5)

ज़िंदगी को भी आना पड़े सामने…

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Added by सालिक गणवीर on October 26, 2020 at 4:00pm — 8 Comments

नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 1222 1222

नहीं दो-चार लगता है बहुत सारे बनाएगा

जहाँ मिलता नहीं पानी वो फ़व्वारे बनाएगा  (1)

ज़रूरत से ज़ियादा है शुगर मेरे बदन में पर

मुझे वो देखते ही फिर शकर-पारे बनाएगा  (2)

फ़लक के इन सितारों की तरह ही देखना इक दिन

ज़मीं पर भी ख़ुुदा अपने लिए तारे बनाएगा  (3)

ज़मीं पर पैर रखने की जगह दिखती नहीं उसको

फ़लक पर वो नये दो-तीन सय्यारे बनाएगा  (4)

जहाँ में ख़ुशनसीबों की नहीं दिखती…

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Added by सालिक गणवीर on October 19, 2020 at 7:30am — 8 Comments

रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122. 1122. 1122. 22.

रूठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे

अब नहीं जाते अँधेरे ये सँभाले मुझसे (1)

सूख जाता है गला प्यास के मारे जब भी

दूर हो जाते हैं पानी के पियाले मुझसे    (2)

क़ैद रक्खा है मुझे उसने कई सालों से

चाबियों का भी पता पूछ न ताले मुझसे (3)

सामने मेरे बहुत लोग यहाँ भूखे हैं

आज निगले नहीं जाएँगे निवाले मुझसे (4)

हाथ जब मेरे सलीबें ही उठाना चाहें

ख़ार अब माँग रहे पैरों के छाले…

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Added by सालिक गणवीर on October 11, 2020 at 3:30pm — 11 Comments

उधर जब तपन है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

 

122 122

उधर जब तपन है
इधर भी अगन है

अदू साथ तेरे
मुझे क्यों जलन है

ये क्यों मीठी मीठी
सी दिल में चुभन है

वही दुश्मन-ए-जाँ
वही जान-ए-मन है

सुखी वो नहीं पर
दुखी आज मन है

जहाँ फूल थे कल
वहाँ आज गन है

यहाँ झूठ सच है
यही तो चलन है

कहो कुछ भी'सालिक'
तुम्हारा दहन है

*मौलिक एवं अप्रकाशित.

Added by सालिक गणवीर on October 5, 2020 at 9:30pm — 10 Comments

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू

मैं जानता हूँ रेत के नीचे दबी है तू

मरना है एक दिन ये नई बात भी नहीं

जी लूँ ऐ ज़िंदगी तुझे जितनी बची है तू

आँखों को चुभ रही है अभी तेरी रौशनी

काँटा समझ रहा था मगर फुलझड़ी है तू

ऐ मौत कोई दूसरा दरवाजा खटखटा

आवाज़ मेरे दर पे ही क्यों दे रही है तू

हर बार ये लगा है तुझे जानता हूँ मैं

महसूस भी हुआ है कभी अजनबी है तू

आज़ाद हो रही…

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Added by सालिक गणवीर on September 28, 2020 at 10:00pm — 18 Comments

धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 122

धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है

मुझे वो आग बन कर छल रहा है

पिछड़ जाउंँगा मैं ठहरा कहीं गर

ज़माना मुझसे आगे चल रहा है

बहुत ख़ुश था मैं तन्हाई में पर अब

ये सूनापन मुुझे क्यों खल रहा है

अंधेरे में उसे दिखता मैं कैसे

मगर फिर भी वो आँखें मल रहा है

बड़ा होकर दुखों में छाँव देगा

जो ये पौधा ख़ुशी का पल रहा है

निगल जाएगा मुझको भी अँधेरा

ये…

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Added by सालिक गणवीर on September 20, 2020 at 1:30pm — 7 Comments

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