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शिज्जु "शकूर"'s Blog – November 2015 Archive (2)

हो शुरू जंगे- मुस्तहब कोई- शिज्जु शकूर

2122 1212 112/22

हो शुरू जंगे-मुस्तहब कोई

लाये इक इन्किलाब अब कोई



यूँ अदब के बदल गये मा’ने

होता है रोज़ बे-अदब कोई



आज ग़ारतगरों के कहने पर

शह्र फूँके है बे-सबब कोई



लफ़्ज़ तेरे, तेरा तवाफ़ करें

सीख-ले बोलने का ढब कोई



आग फिरका-परस्ती की ऐ दोस्त

और भड़के बुझाये जब कोई



जब उलझ जाये बात बातों में

इक सिरा ढूँढ लेना तब कोई



सूरते-हाल पूछिये न ‘शकूर’

रोज़ नाज़िल हो इक ग़ज़ब कोई



-मौलिक व… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on November 23, 2015 at 12:57pm — 13 Comments

सर झुकाये हयात आई इसरार पर- शिज्जु शकूर

212 212 212 212

आये उश्शाक़ खुद को लिये दार पर

सर झुकाये हयात आई इसरार पर



ओस की बूंद सा चाँद ढलता हुआ

खूब है सुब्ह के सुर्ख़ रुखसार पर



माह अफ़्लाक़ पर जल उठे हैं कई

नूर उछला है उनका शबे तार पर



मारने हक़ हज़ारों खड़े हैं यहाँ

और मक़्तूल तलवार की धार पर



अपनी नाकामियों का ख़मोशी के साथ

रख दिया उसने इल्ज़ाम अगयार पर



कौन अपना नुमाइंदा है मुल्क में

फूल है तो कहीं हाथ दस्तार पर



ढूँढ ही लेते हैं राह… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on November 3, 2015 at 9:26am — 20 Comments

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