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शिज्जु "शकूर"'s Blog – March 2016 Archive (2)

उड़नेवाले इक परिंदे का मुकद्दर देखिये- ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

नातवाँ जिस्म और ये बिखरे हुये पर देखिये

उड़ने वाले इक परिन्दे का मुकद्दर देखिये



बीज मैंने बो दिया है हसरतों के खेत में

मुझको कब होती है फ़स्ले गुल मयस्सर देखिये



किस तरफ़ ले जा रहा है आपको ये रास्ता

रुकिये थोड़ा, और नज़रों को घुमाकर देखिये



दिल हुआ जाता है मेरा आइने सा पुरख़ुलूस

फूल मिलते हैं मुझे या कोई पत्थर देखिये



दूसरों में ऐब कोई ढूँढते हैं आप गर

मशविरा है मेरा पहले अपने अंदर देखिये



ये… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on March 27, 2016 at 7:00am — 11 Comments

ग़ज़ल-वक्त का अब हिसाब कौन रखे

2122 1212 112/22



वक्त का अब हिसाब कौन रखे

अपनी आँखों में आब कौन रखे



वक्त आखिर गुज़र ही जायेगा

सो तबीअत ख़राब कौन रखे



जब मुअय्यन नहीं कि कल क्या हो

तो भला इज़्तिराब कौन रखे



जब हर इक नक़्श तेरा किस्सा है

साथ अपने क़िताब कौन रखे



मुस्कुराने के हैं सबब लाखों

रुख पे अपने नक़ाब कौन रखे



सच से क्यों हो गुरेज़-पा कोई

थाली में आफ़ताब कौन रखे



फूट ही जाना है रवाँ होकर

सत्ह-ए-दिल पर हुबाब कौन… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2016 at 3:30pm — 6 Comments

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