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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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अतिथि की कलम से

"अतिथि की कलम से" समूह में ऐसे साहित्यकारों की रचनाओं को प्रकाशित किया जायेगा जो ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सदस्य नहीं है किन्तु अपनी रचनाओं को ओ बी ओ पर प्रकाशित कराना चाहते है |See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । चित्रानुरूप छंदों का अच्छा प्रयास हुआ है। किन्तु ये कुछ और समय चाहते हैं । भाई अशोक जी की बात का संज्ञान लें। फिलहाल सहभागिता के लिए हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन , उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई आजी तमाम जी, हार्दिक धन्यवाद।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। छंदों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।  प्रारम्भिक दो छन्दों को आपने लावणी छन्द बताया है । करण सहित स्पष्ट कर देते तो सुधार करने में सहजता होती । सादर..."
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई दण्डपाणि जी, यह रचना कुकुभ छंद पर खरी नहीं उतर रही , देखिएगा। फिलहाल सहभागिता के लिए हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, चित्रानुरूप बेहतरीन छन्द रचे हैं । हार्दिक बधाई। "
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, प्रदत्त चित्रानुरूप छंद आधारित  सुंदर गीत हुआ है। हार्दिक बधाई."
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई हीरेन जी, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप बेहतरीन छंदों से मंच का शुभारम्भ करने के लिए । हार्दिक बधाई।"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। छन्दों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।  इंगित चरणों को इस प्रकार देखिए - इस दिन के उत्तम कहते। अर्ध्य चढ़ रहा सूरज को।"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, प्रदत्त चित्रानुरूप अति उत्तम छन्द रचे हैं । इसके लिए कोटि कोटि हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"चढ़े ताप नित  धीरे - धीरे, घटे  रात्रि, दिन  बढ़ते हैं।सूर्य उत्तरायण होकर अब, मकर राशि पर चलते हैं।।देव लोक में दिन निकला  है, द्वार  खुले देवालय के।देह त्यागकर देवायन से, जीव पहुँचता बिन भय के।।***मकर संक्रांति का पुण्य…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन..."
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन।  सुन्दर दोहावली हुई है । हार्दिक बधाई।"
Friday
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी मौसम के अनुकूल बहुत सुंदर दोहावली का सृजन हुआ है सर ।हार्दिक बधाई सर"
Thursday
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह वाह वाह आ धामी सर बेहद खूबसूरत दोहे हुए बधाई स्वीकार करें"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सिर्फ सुख में रहें सब नये वर्ष में - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई बृजेश जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।  मपनी गलत लिख गयी है इसे यूँ देखें २१२/२ १२/२१२/२१२"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

ठण्ड कड़ाके की पड़े, सरसर चले समीर।नित्य शिशिर में सूर्य का, चाहे ताप शरीर।१।*दिखे शिशिर में जो नहीं, गजभर दूरी पार।लगता  धरती  से  हुआ, अम्बर  एकाकार।२।*धुन्ध लपेटे भोर तो, विरहन जैसी साँझ।विधवा लगते वृक्ष हैं, धरती लगती बाँझ।३।*घना कुहासा ढब घिरे, झरे हवा से नीर।बदली जैसी भीत भी, धूप न पाये चीर।४।*देती है हिम खण्ड सा, शीतलहर अहसास।चन्दा जैसा दीखता, सूर्य  क्षितिज के पास।५।*हुए वृक्ष सब काँच से, हिम की ओढ़ दुशाल।लेकर साथ अलाव  को, सजे नित्य चौपाल।६।*खड़खड़ कर देखो झरे, तरु से हर इक पात।फैला उन  से  भर  रही, गुमसुम  धरती गात।७।*ओढ़े लगते सब जरा, किन्तु सत्य विकराल।अमृत तत्व वनस्पतियाँ, गहती हैं इस काल।८।*धूप सेंकती तितलियाँ, कहती पंख पसार।धरती नीरस  मत  रहो, ले  लो  रंग उधार।९।*हुई   गुनगुनी  दो  पहर,  जब   अलसाई  धूप।रुचिकर है अद्भुत भले, हुआ शिशिर का रूप।१०।*हिम की चादर  घाटियाँ, दसों  दिशाओं तान।कहती आओ सब करें, खूब शिशिर सम्मान।११।*जेष्ठ अगर ऋतुराज है, सबसे शिशिर कनिष्ठ।इसी लिए  ऋतुचक्र  में, इन की  प्रीत धनिष्ठ।१२।*मौलिक/अप्रकाशितलक्ष्मण धामी "मुसाफिर"See More
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहा सप्तक -६( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' )
"वाह वाह आदरणीय धामी जी...उत्तम दोहे..."
Jan 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सिर्फ सुख में रहें सब नये वर्ष में - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बहुत बढ़िया कहा आदरणीय धामी जी...इस मापनी में पहली ग़ज़ल पढ़ी है...."
Jan 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

ठण्ड कड़ाके की पड़े, सरसर चले समीर।

नित्य शिशिर में सूर्य का, चाहे ताप शरीर।१।

*

दिखे शिशिर में जो नहीं, गजभर दूरी पार।

लगता  धरती  से  हुआ, अम्बर  एकाकार।२।

*

धुन्ध लपेटे भोर तो, विरहन जैसी साँझ।

विधवा लगते वृक्ष हैं, धरती लगती बाँझ।३।

*

घना कुहासा ढब घिरे, झरे हवा से नीर।

बदली जैसी भीत भी, धूप न पाये चीर।४।

*

देती है हिम खण्ड सा, शीतलहर अहसास।

चन्दा जैसा दीखता, सूर्य  क्षितिज के पास।५।

*

हुए वृक्ष सब काँच से, हिम की ओढ़…

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Posted on January 19, 2022 at 7:16am — 2 Comments

मकर संक्रांति के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

आया है जन पर्व जो, मकर संक्रांति आज।

गंगा तट पर सब  जुटे, छोड़  सकारे काज।१।

*

आज उत्तरायण हो चले, मकर राशि पर सूर्य।

हर घाट शंखनाद  अब, बजता  चहुँदिश तूर्य।२।

*

निशा घटे बढ़ते दिवस, बढ़ता सूर्य प्रकाश।

भर देते हैं इस  दिवस, कनकौवे  आकाश।३।

*

विविध प्रांत, भाषा यहाँ, भारत देश विशाल।

विविध पर्व भी हैं  मगर, मनें  सनातन चाल।४।

*

गंगा में डुबकी  लगा, करते हैं सब स्नान।

करते पाने पुण्य फिर, अन्न धन्न का दान।५।

*

कहो मकर संक्रांत…

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Posted on January 14, 2022 at 10:39am — 1 Comment

दोहा सप्तक -६( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' )

रह कर अपनी मौज में, बहना  नित चुपचाप

सीख सिन्धु से सीख ये, जीवन पथ को नाप।।

*

जन सम्मुख जो दे रहे, आपस में अभिशाप

सत्ता को करते  मगर, वो  ही  भरत मिलाप।।

*

शासन  भर  देते रहे, जनता  को सन्ताप

सत्ता बाहर बैठ अब, करते बहुत विलाप।।

*

बचपन से ही बन रहे, जो गुण्डों की खाप

राजनीति की छाँव में, रहे नोट नित छाप।।

*

दुख वाले घर द्वार पर, सुख देता जब थाप

उड़ जाते  हैं  सत्य  है, बनकर  आँसू भाप।।

*

कह लो  चाहे  तो  बुरा, चाहे अच्छा…

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Posted on January 4, 2022 at 8:47pm — 7 Comments

सिर्फ सुख में रहें सब नये वर्ष में - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२ /१२२१/२२१२



खूब आशीष  दो  रब नये वर्ष में

सिर्फ सुख में रहें सब नये वर्ष में/१

*

सुन जिसे पीर मन की स्वयं ही हरे

गीत  ऐसा  लिखें  अब  नये वर्ष में/२

*

छोड़कर द्वेष बाँटें सभी में सहज

प्रेम की सीख मजहब नये वर्ष में/३

*

नीति ऐसी बने जिससे आगे न हो

बन्द कोई भी मकतब नये वर्ष में/४

*

काम आये यहाँ और के आदमी

सिर्फ साधे न मतलब नये वर्ष में/५

*

मौलिक/अप्रकाशित

लक्ष्मण धामी…

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Posted on December 31, 2021 at 10:39am — 2 Comments

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At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
 
 
 

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