For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

dandpani nahak Online Now
Share

Dandpani nahak's Friends

  • Mohammed Arif
  • Samar kabeer
  • Harash Mahajan
 

dandpani nahak's Page

Latest Activity

dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया दीपांजलि दुबे जी नमस्कार ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
10 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया राजेश कुमारी दी साहिबा प्रणाम उम्द: ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला खूब हुआ है सभी शैर बहुत खूब हुए हैं बहुत बहुत बधाई "
10 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आदाब उम्द:ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें मतला बहुत खूब हुआ है और मक़्ता भी वाह! सभी शैर बहुत अच्छे हुए हैं बहुत बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय संजय शुक्ला जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें तीसरा शैर क्या खूब हुआ है सातवां शैर भी लाजवाब बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया रोज़ीना दिघे जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें चौथा शैर खासतौर पर बहुत पसंद आया बहुत बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें दूसरा शैर ख़ास पसंद आया बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया ऋचा यादव जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें सातवां शैर ख़ास पसंद आया बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन! बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूँ स्वीकार करें मतला वाह! क्या खूब हुआ है दूसरा शैर भी गज़ब का हुआ है पाँचवा शैर ख़ास पसंद आया बहुत बहुत बधाई "
11 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अजेय जी सादर अभिवादन बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' जी सादर अभिवादन उम्द: ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीया राजेश कुमारी दी प्रणाम! बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आयीं और हौसला बढ़ाया बहुत धन्यवाद आपका "
Jun 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय मो. अनीस अरमान जी सादर अभिवादन बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
Jun 26

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 27, 2020 at 6:02pm — 13 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार आ.लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत बहुत शुक्रिया!"
27 minutes ago
Manan Kumar singh posted a blog post

जाति गणना

'हम जातीय आधार पर विकास की योजनाएं बनाएंगे।''क्या अमीर -गरीब जाति के आधार पर होते हैं?' बाबा ने…See More
51 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, इतने मुश्किल क़वाफ़ी अगर चन्द अशआर में भी बहतर तरीक़े से…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
2 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
" अच्छी ग़ज़ल आदरणीय मुसाफिर जी ।बाकी उस्ताद जी की सलाह से बहुत कुछ सीखने मिला।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। उत्साहवर्धन के लिए आभार.."
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रोजीना जी, अभिवादन । प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रिचा जी, अभिवादन । उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई समर जी, दो और शेर जोड़े हैं। इन्हें भी देखिएगा। सादर.. हो गयी है ऊँची कीमत नून लकड़ी तेल…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. दीपांजलि जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service