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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"एक और उम्दा ग़ज़ल और उसपे हुई चर्चा...वाह"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"पूछने का लाभ भरपूर मिला...शुक्रिया आदरणीय समर कबीर जी,सौरभ पांडेय जी..और अमीरुद्दीन जी...नीलेश जी की टिप्पड़ी और मिल जाती तो अच्छा रहता...उन्होंने क्या प्रकाश डाला है।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"एक अलग ही अंदाज की ग़ज़ल पढ़ने को मिली आदरणीय नीलेश जी..और उसपे हुई चर्चा बड़ी महत्वपूर्ण है।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"वाह आदरणीय क्या ही शानदार भावपूर्ण रचना है...बधाई"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल -सूनी सूनी चश्म की फिर सीपियाँ रह जाएँगी
"वाह क्या कहने...बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है...हार्दिक बधाई..."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - मिश्कात अपने दिल को बनाने चली हूँ मैं
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया बधाई..."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"भाई आजी तमाम जी जिस तरह से आप मेहनत कर रहे हैं...निश्चय ही एक दिन दोषरहित ग़ज़ल कहेंगे...ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222     1222      122   मिलेगा और  मिल  कर रो पड़ेगामुझे  देखेगा  तो  घर  रो  पड़ेगा न जाने क्यों कहाँ खोया रहा हूँमेरी  आहट पे ही दर   रो पड़ेगा मुझे  वो  भूल  जाने  के  लिये ही करेगा  याद  अक़्सर  रो  पड़ेगा हँसी मुस्कान होंठों  पे  सजाकर कोई  इंसान  अंदर  रो  पड़ेगा भले  ही  मौत  दे  देगा  मुझे पर वो क़ातिल और खंज़र रो पड़ेगा तुम्हारी आँख  से आँसू बहे गर यहाँ  'ब्रज' में समंदर रो पड़ेगा(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी ग़ज़ल पे शिरकत और हौसलाफजाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया..."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय नीलेश जी...ग़ज़ल को बारीक नजर से परखने के लिए आपका हार्दिक आभार...मतले को लेकर आपका सुझाव बहुत ही खूब है...और आपके कहे अनुसार बाकी मिसरे मांजने की कोशिश करूँगा...स्नेह बनाये रखें..."
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल की अच्छी कोशिश हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें। सादर। "
Thursday
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. ब्रज जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है.मतले के मिसरे आपस में बदल कर देखें मिलेगा और  मिल  कर रो पड़ेगामुझे  देखेगा  तो  घर  रो  पड़ेगा... इससे बात थोड़ी लेट खुलती है और शेर चौंकाने वाला हो जाता है..इस ग़ज़ल के…"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय समर कबीर जी...रचना पटल पे आपका स्वागत संग आभार व्यक्त करता हूँ...दूसरे शे'र में कुछ सुधार की कोशिश करता हूँ और विराम चिन्ह वाली आपकी सलाह का आगे ध्यान रखूँगा... सादर"
Oct 11
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जनाब बृजेश कुमार `ब्रज` जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  `न जाने क्यों?कहाँ खोया रहा हूँ?मेरी  आहट सुनी, दर   रो पड़ेगा` इस शे`र के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है, देखिएगा I  एक बात ये ध्यान में रखें कि ग़ज़ल…"
Oct 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय धामी जी...धन्यवाद स्नेह बनाये रखें..."
Oct 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"ग़ज़ल पे आपकी हौसलाफजाई का शुक्रिया आदरणीय वर्मा जी...सदर"
Oct 10

Profile Information

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Male
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noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222     1222      122   

मिलेगा और  मिल  कर रो पड़ेगा

मुझे  देखेगा  तो  घर  रो  पड़ेगा



न जाने क्यों कहाँ खोया रहा हूँ

मेरी  आहट पे ही दर   रो पड़ेगा



मुझे  वो  भूल  जाने  के  लिये ही

करेगा  याद  अक़्सर  रो  पड़ेगा



हँसी मुस्कान होंठों  पे  सजाकर

कोई  इंसान  अंदर  रो  पड़ेगा



भले  ही  मौत  दे  देगा  मुझे पर

वो क़ातिल और खंज़र रो पड़ेगा



तुम्हारी आँख  से आँसू बहे गर

यहाँ  'ब्रज' में समंदर रो…
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Posted on October 5, 2021 at 3:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल-गलियों में सन्नाटा पसरा शमशानों में शोर

बह्र-ए-मीर

मुद्दत से वीरान पड़े इस उजड़े खंडर की

अब कौन करे परवाह जहाँ में दीदा-ए-तर की

गलियों में सन्नाटा पसरा शमशानों में शोर

आँखों को उम्मीद नहीं थी ऐसे मंज़र की

पास तुम्हारे बढ़ने लगता है जब कोलाहल

याद बड़ी तब आती है अपने सूने घर की

मिलकर मंज़िल पा लेंगे कब ऐसा बोला था

लेकिन तैयारी करते दोनों एक सफ़र की

अक्सर दरवाजे पे आ 'ब्रज' ने राह निहारी

इक दिन तो चिट्ठी आयेगी मेरे दिलबर की

अन्दर के खालीपन से डर डर के घबरा के

'ब्रज' आया…

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Posted on August 26, 2021 at 8:06pm — 6 Comments

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222

छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िर

परेशां  हूँ कमी  क्या है  मेरे ज़ज़्बात  में आख़िर

उसे कुछ कह नहीं सकता मगर चुप भी रहूँ कैसे

करूँ तो क्या करूँ उलझे हुए हालात में आख़िर

भुलाना  चाहता तो  हूँ मगर  मजबूरियाँ  भी  हैं

उसी की बात आ जाती मेरी हर बात में आख़िर

सुनो अय आँसुओं बेवक़्त का ढलना नहीं अच्छा

जलूँगा कब तलक मैं इस क़दर बरसात में आख़िर

मुख़ातिब हैं सभी मुझसे कि आगे…

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Posted on May 17, 2021 at 2:20pm — 6 Comments

ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

121   22   121   22   121   22

अगर कभी जो क़रार आये झिझोड़ देना

मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना

बिना तुम्हारे  ये ज़िन्दगी अब  कटेगी कैसे

जो तू नहीं तो नफ़स की डोरी भी तोड़ देना

जरा  सी कोई  रहे  हरारत  न जान  बाकी

कि  जाते जाते  बदन  हमारा निचोड़ देना

कभी हमारे ग़मों पे तुझको दुलार आये

वहीं उसी पल कतार भावों की मोड़ देना

तेरे ग़मो का उसे न होगा पता, है मुमकिन

मगर सिरा 'ब्रज' उदासियों का न जोड़…

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Posted on April 7, 2021 at 10:30am — 11 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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