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Veena Gupta
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Welcome, Veena Gupta!

Latest Activity

Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post मुस्कुराहटें
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 6
Veena Gupta posted a blog post

मुस्कुराहटें

कहते हैं सब यही ,बस मुस्कुराते रहिए लेकिन जनाब बड़ी शातिर होती है ये मुस्कुराहट दिल का सुकून होती है,किसी की मुस्कुराहट तो चैन छीन लेती दिलों का ,कोई मुस्कुराहट प्यार का दरिया बहाती बच्चे की मासूम मुस्कुराहट और विचलित कर जाती मन को,व्यंग भरी मुस्कुराहट ना जाने क्यों लोग बेवजह भी मुस्कुराते हैं ना जाने कौन सा ग़म उस हंसी में छुपाते हैं कभी ख़ुशी से खिलखिलाते चेहरेनमी आँखों की बन आंसू ले आते हैं तो दोस्तों ये मुस्कुराहट बड़ी फ़ितरती है जो सिर्फ़ ख़ुशी नहीं,ग़म का भी इज़हार करती है कभी छू जाती है…See More
Sep 5
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"स्नेही धामी जी ,आभार आपका"
Jul 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"आ. वीणा जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 10
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"आदरणीया वीणा गुप्ता जी आदाब, अद्भुत। आँखों की विभिन्न भाव-भंगिमाओं का सुन्दर और सजीव चित्रण किया है आपने, ढेरों बधाईयाँ स्वीकार करें। सादर।"
Jun 30
Veena Gupta posted a blog post

आंखें

आंखें आंखें अद्भुत आंखें,नित नए रूप बदलती आंखेंसबकुछ कहतीं पर चुप रहतीं,नित नए रूप दिखाती आंखें कहीं तो ज्वालामुखी हैं आँखें,कहीं झील सी गहरी आंखें मंद मंद मुस्काती आँखें,कहीं उपहास उडा़ती आंखें हिरनी सी चंचल ये आँखें,डरी डरी सहमी सी आंखें लज्जा से भरी अवगुंठित आँखें,फिर टेढी चितवन वाली आंखें कहीं प्यार बरसाती आंखें,कहीं पर सबक सिखाती आंखें ममता भरी वो भीगी आँखें,सजदे में झुक जाती आंखें क्रोध से लाल धधकती आँखें,मेघों सी वो बरसती आंखें दैन्य भाव दर्शाती आंखें,हठ और गर्व भरी वो आंखें एक दृष्टि…See More
Jun 29
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"स्नेही चेतन जी,धामी जी,एवं समीर जी आप सभी का बहुत बहुत आभार.चेतन जी आपके सुझाव का स्वागत है आगे भी अपना योगदान देते रहें "
Jun 28
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"चेतन जी ्"
Jun 28
Chetan Prakash commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"आदरेया, सार्थक  भावपूर्ण  रचना और वो भी काफिया  बन्दी में  , पंक्तियाँ चाहे दो दो की इकाई  में हो, कविता हो नहीं गीत  भी हो' सकती हैं ! सो, किसी अंश को चौपाया  बनाने के  लिए  आप अनावश्यक  वर्तनी…"
Jun 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"आ. वीणा जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 27
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 27
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मेरा भारत

भारत की जब बात है होती,ज्योति मेरे दिल की है जलतीकितना सुंदर देश है मेरा,कितनी पावन रीति यहाँ कीघर घर मंदिर गुरुद्वारा है,सबके बीच परस्पर प्रीतीसंतोष बड़ा धन है जीवन में,सिखलाती ये अपनीसंस्कृतीनहीं थोपते धर्म किसी पर,ना ज़िद कोई विश्व विजय कीखुश हैं हम अपनी धरती पर,नहीं चाहिए ज़मीं दुजे कीस्वयं जियो और जीने दो,भारत का सिद्धांत यहीविश्व संस्कृती को अपनाते,वसुधैव कुटुंबकम है येहीमौलिक/अप्रकाशित      वीणाSee More
Jun 26
Veena Gupta commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
" ख़ूबसूरत नग़मा,मुबारकबाद क़ुबूल करें"
Mar 2
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सरस्वती वंदना

मात शारदे सुन ले विनती,ज्ञान चक्षु तू मेरे खोल मिट जाए सब कलुष हृदय का,वाणी में अमृत तू घोल बासंती मौसम आया है,नव-नव पल्लव रहे हैं डोल विश्व प्रेम का अंकुर फूटे,मंत्र कोई ऐसा तू बोल  ज्ञान की मन में जगे पिपासा,दे ऐसा आशीष अमोल विद्या धन ही सच्चा धन है,ऐसा न कोइ खजाना अनमोल आज खड़ी झोली फैलाए,मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल दो बूंदें दे ज्ञान सागर की,मॉं दे दे ये वर अनमोल मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल,मात शारदे कुछ तो बोल तेरी माँ अब तू ही जाने,हृदय दिया है मैंने खोल मात शारदे सुन ले विनती, ज्ञान चक्षु तू…See More
Feb 13
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post ज़िन्दगी
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 9
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ज़िन्दगी

जैसी भी हो बडी़ ख़ूबसूरत होती है ज़िन्दगी जिन्दगी में नित नए मोती पिरोती है ज़िन्दगी कहीं चंदा सी चमचम कहीं तारों सी झिलमिल और कहीं सूरज सी रौशन होती है ज़िन्दगी फूलों सी महकती कहीं, कहीं काँटों सी उलझ जाती ज़िन्दगी कहीं नदिया की चंचल धारा,कहीं सागर सी ठहरी ज़िन्दगी सुख दुख में अपने पराए की पहचान कराती है ज़िन्दगी  वक्त बदले तो राजा को भी रंक बनाती है ज़िन्दगी ना जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है ज़िन्दगी कभी सुख कभी दुख के समंदर में डुबाती है ज़िन्दगी जाने क्यों इतनी दुश्वारियों से भरी होती है…See More
Feb 7

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
India
Profession
House wife
About me
I live in Lucknow but last year my husband passed away so I am here with my son

Mera desh

हिंदुस्तानी नाम है मेरा,हिंदी है मेरी पहचान

भरतमाता माँ है मेरी,बसते जिसमें मेरे प्राण

प्राण बिना ज्यों व्यर्थ है जीवन,तन हो जाता है निष्प्राण

भारतीय कहलाने में ही,दुनिया में है मेरी शान

मानो या ना मानो पर,भारत है दुनिया का दिल

देख सको तो देखो,आकार भी दिल जैसा बिल्कुल

मौलिक ऐवम अप्रकाशित

           वीणा

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मुस्कुराहटें

कहते हैं सब यही ,बस मुस्कुराते रहिए 

लेकिन जनाब बड़ी शातिर होती है ये मुस्कुराहट 

दिल का सुकून होती है,किसी की मुस्कुराहट 

तो चैन छीन लेती दिलों का ,कोई मुस्कुराहट 

प्यार का दरिया बहाती बच्चे की मासूम मुस्कुराहट 

और विचलित कर जाती मन को,व्यंग भरी मुस्कुराहट 

ना जाने क्यों लोग बेवजह भी मुस्कुराते हैं 

ना जाने कौन सा ग़म उस हंसी में छुपाते हैं 

कभी ख़ुशी से खिलखिलाते चेहरे

नमी आँखों की बन आंसू ले आते हैं 

तो दोस्तों ये…

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Posted on September 5, 2021 at 12:41am — 2 Comments

आंखें

आंखें आंखें अद्भुत आंखें,नित नए रूप बदलती आंखें

सबकुछ कहतीं पर चुप रहतीं,नित नए रूप दिखाती आंखें 

कहीं तो ज्वालामुखी हैं आँखें,कहीं झील सी गहरी आंखें 

मंद मंद मुस्काती आँखें,कहीं उपहास उडा़ती आंखें 

हिरनी सी चंचल ये आँखें,डरी डरी सहमी सी आंखें 

लज्जा से भरी अवगुंठित आँखें,फिर टेढी चितवन वाली आंखें 

कहीं प्यार बरसाती आंखें,कहीं पर सबक सिखाती आंखें 

ममता भरी वो भीगी आँखें,सजदे में झुक जाती आंखें 

क्रोध से लाल धधकती आँखें,मेघों सी वो बरसती…

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Posted on June 29, 2021 at 6:54pm — 4 Comments

मेरा भारत

भारत की जब बात है होती,ज्योति मेरे दिल की है जलती

कितना सुंदर देश है मेरा,कितनी पावन रीति यहाँ की

घर घर मंदिर गुरुद्वारा है,सबके बीच परस्पर प्रीती

संतोष बड़ा धन है जीवन में,सिखलाती ये अपनीसंस्कृती

नहीं थोपते धर्म किसी पर,ना ज़िद कोई विश्व विजय की

खुश हैं हम अपनी धरती पर,नहीं चाहिए ज़मीं दुजे की

स्वयं जियो और जीने दो,भारत का सिद्धांत यही

विश्व संस्कृती को अपनाते,वसुधैव कुटुंबकम है येही


मौलिक/अप्रकाशित

      वीणा

Posted on June 24, 2021 at 9:48pm — 5 Comments

सरस्वती वंदना

मात शारदे सुन ले विनती,ज्ञान चक्षु तू मेरे खोल 

मिट जाए सब कलुष हृदय का,वाणी में अमृत तू घोल 

बासंती मौसम आया है,नव-नव पल्लव रहे हैं डोल 

विश्व प्रेम का अंकुर फूटे,मंत्र कोई ऐसा तू बोल  

ज्ञान की मन में जगे पिपासा,दे ऐसा आशीष अमोल 

विद्या धन ही सच्चा धन है,ऐसा न कोइ खजाना अनमोल 

आज खड़ी झोली फैलाए,मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल 

दो बूंदें दे ज्ञान सागर की,मॉं दे दे ये वर अनमोल 

मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल,मात शारदे कुछ तो बोल 

तेरी माँ अब…

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Posted on February 13, 2021 at 1:21am

 
 
 

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