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Usha Awasthi
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Sep 24
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Sep 12
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी
"आदरणीय समर कबीर साहेब, आदाब।आपको रचना अच्छी लगी , जानकर खुशी हुई।हार्दिक आभार आपका।"
Sep 12
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी
"मुह्तारमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I "
Sep 12
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Sep 12
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Sep 12
Usha Awasthi posted a blog post

हिन्दी

हिन्दीउषा अवस्थीएकता का सूत्र हिन्दीराष्ट्र का यह मानहै हमारा आभरणसौन्दर्य का प्रतिमानहिन्दी, हमारे हिन्द का हैसमन्वित उदघोषविश्व में फैला रही जोज्योति, गौरव बोधभारती बागेश्वरी काहै दिया वरदानहम सदा इसको समर्पितदेश का अभिमानज्ञान, भक्ति, कर्म सेअद्भुत सुसज्जित वेशसंत की वाणी सुभाषितमुक्ति का संदेशमातृभाषा में समाहितऊर्जा का स्रोतसमृद्धशाली, व्यवस्थित,अतुलित, अपरिमित कोषदेववाणी संस्कृत कीआत्मजा गुणवानसरल ,सुन्दर,पथप्रदर्शकसर्व गुण की खानरची मानस विलक्षणतुलसी हुए निष्कामभक्ति रस स्नात, मीरासूर और…See More
Sep 12
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"आदरणीय सुशील सरन जी, रचना पसंद आई जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक धन्यवाद आपका"
Aug 22
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"वाह आदरणीया जी बहुत सुंदर और सार्थक प्रस्तुति है"
Aug 22
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आशा
"लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, रचना अच्छी लगी , जानकर खुशी हुर्ई। हार्दिक आभार आपका , सादर"
Aug 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post आशा
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Aug 19
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"अवनीश धर द्विवेदी जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक आभार आपका, सादर।"
Aug 17
Awanish Dhar Dvivedi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"बहुत सुन्दर रचना।"
Aug 16
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Aug 16
Usha Awasthi posted a blog post

क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!लोक तन्त्र का सुख भोगेंगेचुने गए हम राजा हैंदेश हमारा, मार्ग हमारा हम ही इसके आका हैं चाहे जितनी गाड़ी रक्खेंफुटपाथों पर, बीच सड़कहमको भला कौन रोकेगा?जन प्रतिनिधि ,बेधड़क, कड़क आस-पास हैं गार्ड हमारेले बन्दूकें साथ चलेंडर से जन सहमे रहते हैं क्या मजाल जो घात करें? पिए शक्ति-मद हम मतवालेकरते नित्य बवाला हैंसंग चापलूसों का दल-बलक्या दबदबा हमारा है! मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 16
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , रचना सुन्दर लगी , जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
Aug 14

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

हिन्दी

हिन्दी



उषा अवस्थी



एकता का सूत्र हिन्दी

राष्ट्र का यह मान

है हमारा आभरण

सौन्दर्य का प्रतिमान



हिन्दी, हमारे हिन्द का है

समन्वित उदघोष

विश्व में फैला रही जो

ज्योति, गौरव बोध



भारती बागेश्वरी का

है दिया वरदान

हम सदा इसको समर्पित

देश का अभिमान



ज्ञान, भक्ति, कर्म से

अद्भुत सुसज्जित वेश

संत की वाणी सुभाषित

मुक्ति का संदेश



मातृभाषा में समाहित

ऊर्जा का स्रोत

समृद्धशाली,… Continue

Posted on September 12, 2022 at 12:31pm — 2 Comments

क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!

लोक तन्त्र का सुख भोगेंगे

चुने गए हम राजा हैं

देश हमारा, मार्ग हमारा

हम ही इसके आका हैं



चाहे जितनी गाड़ी रक्खें

फुटपाथों पर, बीच सड़क



हमको भला कौन रोकेगा?

जन प्रतिनिधि ,बेधड़क, कड़क



आस-पास हैं गार्ड हमारे

ले बन्दूकें साथ चलें



डर से जन सहमे रहते हैं

क्या मजाल जो घात करें?



पिए शक्ति-मद हम मतवाले

करते नित्य बवाला हैं

संग चापलूसों का…

Continue

Posted on August 16, 2022 at 8:57pm — 4 Comments

आशा

झरता रहा सावन, तपता रहा मन
आषाढ़ सूखा, कहीं बाढ़, कहीं रूखा
कृषक का धैर्य छूटा

सावन की घड़ियाँ, कुछ बूँदे, कुछ लड़ियाँ
गिर भी गईं तो क्या?

मौसम की मार, जीना दुश्वार
कैसी हरियाली, कचरे की क्यारी

पर आशा ही तो थाती है, ढर्रे पर लौटेगा जीवन
सोच व्यापी है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 13, 2022 at 12:20pm — 2 Comments

विचारणीय

  • विचारणीय



    सत्य है, लोग

    व्यवहारिक हो गए हैं

    कल के रिश्ते

    आज खो गए हैं



    किसी के बाप

    किसी की माँ का पता ही नहीं

    झेलें अवसाद…

Continue

Posted on July 11, 2022 at 11:11pm

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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