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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

सावन के दोहे : ..........

सावन के दोहे :.........गुन -गुन गाएँ धड़कनें, सावन में मल्हार । पलक झरोखों में दिखे, प्यारी सी मनुहार ।।सावन में अक्सर करे , दिल मिलने की आस। हर गर्जन पर मेघ की, यादें करती रास ।।अन्तस में झंकृत हुए, सुप्त सभी स्वीकार। तन पर सावन की करे, मधुर  फुहार  शृंगार ।।सावन में अच्छे लगें, मौन मधुर स्वीकार । मुदित नयन में हो गई, प्रतिबन्धों की हार।।अन्तर्मन को छू गये, अनुरोधों के ज्वार । इन्कारों की अन्ततः,टूटी हर दीवार ।।सुशील सरना / 28-7-21मौलिक एवं अप्रकाशित See More
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : कामकाजी बेटियों का खिलखिलाना भा गया // -- सौरभ
"वाह आदरणीय जी यथार्थ भावों की सहज अभिव्यक्ति । एक शानदार गजल । हार्दिक बधाई सर"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post प्रश्न .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी कविता हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post प्रश्न .....
" नमन,  सुशील  सरना  साहब,  अंतस की विवरणिका  है, आदरणीय आप की  कविता ! अच्छी लगी, सनातन प्रश्न का जवाब  खोजती  यह प्रस्तुति  !"
Monday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post फ़र्ज़ ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

प्रश्न .....

प्रश्न ......प्रश्न प्रश्न प्रश्न स्वयं को तलाशते सैंकड़ों प्रश्नक्या मैं सदियों से वीरान किसी पूजा गृह की काल धूल के आवरण से लिपटी कोई खंडित प्रतिमा हूँया फिर किसी हवन कुंड में किसी मनोरथ की सिद्धि के लिए झोंकी जाने वाली सामग्री हूँया फिरविषधरों के दंश झेलता कोई चंदन का विटप हूँया फिर काल की आँधी में अपने अस्तित्व से जूझताधीरे-धीरे विघटित होताशिला खंड हूँया फिरयथार्थ और आभास के मध्य अपने अस्तित्व के क्षितिज को तलाशता एक असहाय शून्य हूँप्रश्न सैंकड़ों और उत्तर प्रश्नों की बलिवेदी पर सिर्फ़ शून्य…See More
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम ।सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"वाह .. आपकी छांदसिक यात्रा के प्रति साधुवाद  शुभातिशुभ"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार । सर तीसरा दोहा एडिट से रह गया । अभी संशोधित करता हूँ सर । हार्दिक आभार सर ।"
Jul 22
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा एवं सुझाव का दिल से आभारी है ।"
Jul 22
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Jul 22
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आदाब, सुशील सरना जी, प्रथम दोनों दोहे अच्छे  लगे ! किन्तु आदरणीय  त्रयी  का अन्तिम  दोहे का तीसरा  चरण, " अच्छी लगी  संघर्ष  में" दोष पूर्ण है, चौदह  मात्राएं  हैं, सादर !"
Jul 21
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे कहे आपने, बधाई स्वीकार करें । 'नैनों से नैना करे'--'करे' को "करें" कर लें ।"
Jul 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . .
"आ. भाई सुशील जी, अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Jul 21
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . .

अन्तस में नर्तन करें, विगत रैन के द्वन्द । मुदित नैन रचने लगे, प्रीत गंध के छन्द । ।नैनों से नैना करें , गुपचुप- गुपचुप बात । रैन तिमिर में हो गए, अलबेले उत्पात ।।थोड़े से इंकार थे, थोड़े से इकरार ।भली  लगी संघर्ष में, भोली भाली हार ।।सुशील सरना / 20-7-21मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jul 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

प्रश्न .....

प्रश्न ......

प्रश्न प्रश्न प्रश्न

स्वयं को तलाशते

सैंकड़ों प्रश्न

क्या मैं

सदियों से वीरान किसी पूजा गृह की

काल धूल के आवरण से लिपटी

कोई खंडित प्रतिमा हूँ

या फिर

किसी हवन कुंड में

किसी मनोरथ की सिद्धि के लिए

झोंकी जाने वाली सामग्री हूँ

या फिर

विषधरों के दंश झेलता

कोई चंदन का विटप हूँ

या फिर

काल की आँधी में अपने अस्तित्व से जूझता

धीरे-धीरे विघटित होता

शिला खंड…

Continue

Posted on July 26, 2021 at 12:54pm — 2 Comments

फ़र्ज़ ......

फ़र्ज़ ......

निभा दिया फ़र्ज़
संतान ने
भेजकर माँ - बाप को
वृद्धाश्रम

........................

आजकल फ़र्ज़ भी
निभाए जाते हैं
कर्ज़ की तरह

.........................

गुजर गए
गुजरना था उनको
जिन्दगी की आखिरी पायदान से
बदल कर
पुरानी नेम प्लेट अपने नाम से
निभा दिया फ़र्ज़
अपने वारिस होने का

सुशील सरना / 23-7-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on July 23, 2021 at 5:37pm — 1 Comment

दोहा त्रयी. . . .

अन्तस में नर्तन करें, विगत रैन के द्वन्द ।
मुदित नैन रचने लगे, प्रीत गंध के छन्द । ।

नैनों से नैना करें , गुपचुप- गुपचुप बात ।
रैन तिमिर में हो गए, अलबेले उत्पात ।।

थोड़े से इंकार थे, थोड़े से इकरार ।
भली  लगी संघर्ष में, भोली भाली हार ।।

सुशील सरना / 20-7-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on July 20, 2021 at 12:00pm — 8 Comments

अभिव्यक्ति .......

अभिव्यक्ति ......

कैसे व्यक्त करूँ

अपने प्रेम की गहराई को

अभिव्यक्ति के अवगुंठन में

एक खीज है

तुम्हें छूने की

अबोले स्पर्शों से

कब तक लड़ूँ मैं

तुम ही कहो न

अपने प्रेम की गहराई को

कैसे व्यक्त करूँ मैं

हां! मैं तुम्हें प्यार करूँगी

भोर की उजास में

साँझ की प्यास में

तृप्ति की आस में

हर हलाहल पी जाऊँगी

मर के भी जी जाऊँगी

बस मेरी तन्हाई में

कुछ देर और जी जाओ

तुम ही कहो

तुम्हारे प्यार में आखिर…

Continue

Posted on July 15, 2021 at 3:32pm — 10 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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