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Sushil Sarna
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन।  सुन्दर दोहावली हुई है । हार्दिक बधाई।"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी .....
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सुंदर दोहा त्रयी हुई है, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।  "कभी जीत के कहकहे,"  इस विषम चरण का रचना संगठन देखें... कदाचित यह "कभी क़हक़हे जीत के," अथवा "कभी ठहाके जीत के" उचित होगा।"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी .....

दोहा त्रयी...दुख के जंगल हैं घने , सुख की छिटकी धूप ।करम पड़ेंगे भोगने , निर्धन हो या भूप ।।धन वैभव संसार का, आभासी शृंगार ।कभी जीत के कहकहे, कभी मौन की हार ।।विदित वेदना शूल की, विदित पुष्प की गंध ।सुख-दुख दोनों जीव की, साँसों के अनुबंध ।।सुशील सरना / 20-1-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Thursday
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शिशिर के दोहे -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी मौसम के अनुकूल बहुत सुंदर दोहावली का सृजन हुआ है सर ।हार्दिक बधाई सर"
Thursday
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (जिसको हुआ गुमाँ कि 'ख़ुदा' हो गया है वो)
"वाह आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब बहुत खूबसूरत गज़ल बनी है सर ।हार्दिक बधाई सर"
Thursday
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इस जग में दाता बता. . . . दोहे

इस जग में दाता बता .....दोहेइस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।बहता हो जिस तीर पर, बिना दर्द का नीर ।।इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर । मिल जाए जिस घाट पर, सुख का थोड़ा नीर ।।इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।मिट जाए जिस तीर पर, जग की सारी पीर ।।इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर । राँझे से आकर मिले, उसकी बिछुड़ी हीर ।।इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।जहाँ बने बिगड़ी हुई, बन्दों की तकदीर ।।सुशील सरना / 13-1-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jan 13
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ममता पर दोहे .....
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सादर नमन"
Jan 7
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक ......
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ सर ।"
Jan 7
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक ......
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है सर ।विलम्ब के लिए क्षमा । आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ सर ।"
Jan 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक ......
"आ. भाई सुशील जी, सुन्दर मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
Jan 5
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब , अच्छे दोहा मुक्तक हुए हैं , बधाई स्वीकार करें I "
Dec 30, 2021
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक ......

दिल से दिल की हो गई, दिल ही दिल में बात । दिल तड़पा दिल के लिए, मचल गए जज़्बात । दिल में दिल की जीत है, दिल में दिल की हार - दिल को दिल ही दिल मिली, धड़कन की सौगात ।2.काल गर्भ में है निहित, कर्म फलों का राज़। अंतस में गूँजे सदा,  कर्मों की आवाज़ । कर्म प्राण है जीव का, कर्म जीव की आस - अच्छे कर्मो से करो, जीने का आगाज़ । सुशील सरना / 27-12-21मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Dec 27, 2021
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ममता पर दोहे .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, ममता पर अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2021
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"आदरणीय बृजेश जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Dec 20, 2021
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . . . .
"सुंदर दोहे आदरणीय...बधाई"
Dec 17, 2021
Sushil Sarna posted a blog post

ममता पर दोहे .....

ममता पर दोहे .....जाते हैं जो चूमकर, मात-पिता के पाँव । राहों में उनके नहीं, आते दुख के गाँव ।1।जीवन में आते नहीं, उनके दुख के गाँव ।जिनके सिर रहती सदा, आशीषों की छाँव ।2।धन वैभव संसार में, मिल जाते सौ बार । मिलें नहीं जाकर कभी, मात-पिता साकार  ।3।दृष्टि धुंधली हो गई, काया हुई निढाल । आई बेला साँझ की,  ढूँढे नैना लाल ।4।ममता ढूँढे पालने, में अपना वो लाल । जिसको देखे हो गए, जाने कितने साल ।5।बूढ़ी काया को लगे, अगला हर पल काल । देखो बनकर आ गया, लाठी मेरा लाल ।6।किसने देखा स्वर्ग का , कैसा है…See More
Dec 16, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

दोहा त्रयी .....

दोहा त्रयी...

दुख के जंगल हैं घने , सुख की छिटकी धूप ।
करम पड़ेंगे भोगने , निर्धन हो या भूप ।।

धन वैभव संसार का, आभासी शृंगार ।
कभी जीत के कहकहे, कभी मौन की हार ।।

विदित वेदना शूल की, विदित पुष्प की गंध ।
सुख-दुख दोनों जीव की, साँसों के अनुबंध ।।


सुशील सरना / 20-1-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on January 20, 2022 at 1:17pm — 2 Comments

इस जग में दाता बता. . . . दोहे

इस जग में दाता बता .....दोहे

इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।

बहता हो जिस तीर पर, बिना दर्द का नीर ।।

इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।

मिल जाए जिस घाट पर, सुख का थोड़ा नीर ।।

इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।

मिट जाए जिस तीर पर, जग की सारी पीर ।।

इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।

राँझे से आकर मिले, उसकी बिछुड़ी हीर ।।

इस जग में दाता बता, कोई ऐसा तीर ।

जहाँ बने बिगड़ी हुई, बन्दों की तकदीर…

Continue

Posted on January 13, 2022 at 1:12pm

दोहा मुक्तक ......

दिल से दिल की हो गई, दिल ही दिल में बात ।
दिल तड़पा दिल के लिए, मचल गए जज़्बात ।
दिल में दिल की जीत है, दिल में दिल की हार -
दिल को दिल ही दिल मिली, धड़कन की सौगात ।

2.

काल गर्भ में है निहित, कर्म फलों का राज़।
अंतस में गूँजे सदा,  कर्मों की आवाज़ ।
कर्म प्राण है जीव का, कर्म जीव की आस -
अच्छे कर्मो से करो, जीने का आगाज़ ।


सुशील सरना / 27-12-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on December 27, 2021 at 7:30pm — 4 Comments

ममता पर दोहे .....

ममता पर दोहे .....

जाते हैं जो चूमकर, मात-पिता के पाँव ।

राहों में उनके नहीं, आते दुख के गाँव ।1।

जीवन में आते नहीं, उनके दुख के गाँव ।

जिनके सिर रहती सदा, आशीषों की छाँव ।2।

धन वैभव संसार में, मिल जाते सौ बार ।

मिलें नहीं जाकर कभी, मात-पिता साकार  ।3।

दृष्टि धुंधली हो गई, काया हुई निढाल ।

आई बेला साँझ की,  ढूँढे नैना लाल ।4।

ममता ढूँढे पालने, में अपना वो लाल ।

जिसको देखे हो गए,…

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Posted on December 13, 2021 at 1:00pm — 8 Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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