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नाथ सोनांचली
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"वाह आदरणीय क्या ही शानदार भावपूर्ण रचना है...बधाई"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आदरणीय सोनांचली जी इस आकर्षक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई, शेष परमादरणीय गुरुदेव समर साहब की बातों पर अमल करें।"
Sunday
नाथ सोनांचली commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। पढ़कर हम जैसे सीखने वालों को बहुत कुछ मिला। आपको बहुत बहुत बधाई"
Sunday
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आद0 समर कबीर साहब आपको सादर प्रणाम करता हूँ।आपकी रचना पर उपस्थिति ही मेरे लिए आशीर्वाद से कम नहीं है। आपकी बातों को गम्भीरता से लेते हुए रचना को पुनः देखता हूँ। सादर"
Sunday
Samar kabeer commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"जनाब नाथ सोनांच्ली जी आदाब , बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I  `कल तक  तेरी  ही गोदी  में, पापा मैं तो सोती थीतुम्हे न पाती थी जब घर में, मार  दहाड़े  रोती थी` इसके पहले मिसरे में…"
Friday
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। रचना पर उपस्थिति और प्रशंसा हेतु बहुत बहुत आभार आपका"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आ. सुरेन्द्र भाई,भावपूर्ण रचना के लिए बधाई "
Thursday
नाथ सोनांचली commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - मिश्कात अपने दिल को बनाने चली हूँ मैं
"आद0 Anjuman Mansury 'Arzoo' जी सादर अभिवादन बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। शेर दर शेर दाद कुबूल करें। सादर"
Thursday
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"आद0 अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब सादर अभिवादन। मेरी रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया से गदगद हूँ। बहुत बहुत आभार आपका"
Thursday
नाथ सोनांचली commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - जिस दिन से इकतरफ़ा रिश्ता टूट गया
"आद0 भाई नीलेश नूर जी सादर अभिवादन। मुझे तो हर शेर सवा शेर लगा। गज़ब का कथ्य लिया है आपने। क्या कहने। बाकमाल। बहुत बहुत बधाई भाई जी"
Thursday
नाथ सोनांचली commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे कैसे लोग यहाँ -(गजल)-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आद0 लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादन। बढ़िया मात्रिक ग़ज़ल कही आपीने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Thursday
नाथ सोनांचली commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-घर बसाना था
"आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। आद0 समर साहब की इस्लाह से और निखर गयी। बधाई निवेदित करता हूँ।"
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"जनाब नाथ सोनांचली जी आदाब, मार्मिक रचना के माध्यम से विदाई के समय बेटी के उद्गार बख़ूबी पेश किए हैं आपने, बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post दर्द से यारी
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन और भावभियक्ति पर आपको बहुत बहुत बधाई"
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post तो रो दिया .......
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। हर बार की तरह एक बेहतरीन सृजन पढ़ने को मिला। कोटि कोटि बधाई आपको"
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आद0 अमीरुद्दीन "अमीर" जी सादर अभिवादन। भुजंगप्रयात छ्न्द पर बेहतरीन प्रयास किया है आपने। आपके इस प्रयास से मेरा भी उत्साह बढ़ा है। बहुत बहुत बधाई आपको"
Wednesday

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Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

नाथ सोनांचली's Blog

विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार

छोड़ बसेरा  बचपन का  अब, दूजे  घर को जाना है

रीत बनी है इस जग की जो, उसको मुझे निभाना है

लेकिन मन  में प्रश्न  बहुत हैं, उनमें  पापा  खोने दो

पल  भर में मैं  हुई पराई, मुझको  खुल कर रोने दो

घर आँगन  की मधुर सुवासित, पापा मैं कस्तूरी थी

जन्मी थी तो बोले थे तुम, बिटिया बहुत जरूरी थी

कल तक  तेरी  ही गोदी  में, पापा मैं तो सोती थी

तुम्हे न पाती थी जब घर में, मार  दहाड़े  रोती थी

भूल गए क्यों सारी बातें, मुझसे क्यों मुँह…

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Posted on October 13, 2021 at 10:52am — 8 Comments

ग़ज़ल (था नाम दिल पे नक़्श मिटाया नहीं गया)

221 2121 1221 212

था  नाम  दिल  पे   नक़्श  मिटाया  नहीं  गया

मुझसे   तुम्हारा    प्यार    भुलाया   नहीं  गया

कल  को   सँवारने   में    गई   बीत   ज़िन्दगी

जो  सामने  था   लुत्फ़    उठाया    नहीं  गया

कोशिश बहुत की, राज़-ए- मुहब्बत अयाँ न हो

अल्फ़ाज़    से   मगर   ये   छिपाया  नहीं  गया

बीवी  बहन  बहू   न     मिलेगी     कोई    तुम्हें

बेटी   को  कोख़   में   जो  बचाया   नहीं   गया

मंदिर  में  जाके  भोज …

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Posted on March 30, 2021 at 5:30pm — 3 Comments

कुछ कुण्डलियाँँ "गप या गप्प" पर

रहते  यारों   संग   थे,  मस्ती   में   हम  डूब

बचपन  में  होता  रहा,  गप्प   सड़ाका  खूब

गप्प सड़ाका  खूब, नहीं चिंता  थी  कल की

आह! मगर वह नाथ' ज़िन्दगी थी दो पल की

आया अब यह दौर, जवानी  जिसको  कहते

अपने में  ही  मस्त,  जहाँ  हम  सब  हैं  रहते



ऑफिस में गप  मारना, बहुत  बुरी  है  बात

देख लिया  यदि  बॉस  ने,  बिगड़ेंगे  हालात

बिगड़ेंगे   हालात,   मिले   टेंशन  पर  टेंशन

घट  जाए  सम्मान,  कटे  वेतन  औ'  पेंशन

भभके उल्टी  आग, बन्द थी जो माचिस  में

हर…

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Posted on March 15, 2021 at 5:16am — 4 Comments

डायन प्रथा पर एक पद्यात्मक कहानी

किसे सुनाऊँ अपनी पीड़ा, किसको मैं समझाऊँ

सब पत्थर के देव यहाँ हैं, किस  से सर टकराऊँ

युग  कोई  भी  यहाँ  रहा  हो, सबने  हमें ठगा है

माँ  ममता  की  मूरत  कहकर, देता  रहा दगा है

कल जैसी ही आज हमारी, वैसी भाग्य  निशानी

जुड़ी उसी से सुन लो यारा, अपनी एक  कहानी

शादी के दस साल हुए थे, पर ना  गोद  भरी  थी

बाँझ न रह जाऊँ जीवन भर, इससे बहुत डरी थी

देख किसी बच्चे को सोचूँ, झट  से  गले  लगा लूँ

छाती का मैं दूध पिलाकर, अपनी …

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Posted on March 7, 2021 at 8:14pm — 6 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

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शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
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