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सालिक गणवीर
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vijay nikore commented on सालिक गणवीर's blog post हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"गज़ल अच्छी लगी। पंक्तियों में लय अच्छी बनी है।  बधाई"
Sep 30
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"भाई  नादिर ख़ान जी आदाब हँसते हुये ही जायेंगे अब इस जहाँ से हम .... क्या मिसरा कहा है आपने.. वाह. बहुत ख़ूब  "
Sep 25
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया  Richa Yadav  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए ह्रदय से आभार।"
Sep 25
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया Rachna Bhatia जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए ह्रदय से आभार।"
Sep 25
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जी,उस्ताद जी.आपकी इस्लाह के बाद ग़ज़ल प्रस्तुत है. सुनाता है,की बजाय मैंने सुना रहा इस्तेमाल किया है. 221-2121-1221-212 हैं साथ हर घड़ी थे चले जिस मकाँ से हमवो सबसे पूछते हैं कि आए कहाँ से हम (1) बस एक आदमी से है नाराज़गी हमें लेकिन ख़फ़ा ख़फ़ा से…"
Sep 25
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"मुहतरमा  Rachna Bhatia जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. आस्ताँ पुल्लिंग है तो 'तेरी' की बजाय 'तेरे' होना चाहिए."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय  dandpani nahak  जीसादर अभिवादनबढ़िया तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय  Anil Kumar Singh जीसादर अभिवादनबढ़िया तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया  Richa Yadav  जीसादर अभिवादन  गजल का अच्छा प्रयास हुआ बहुत-बहुत बधाइयां,चौथे शैर का ऊला बेबह्र है मुहतरमा। बाक़ी गुणीजन बताएंगें  "
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया  Deepanjali Dubey जी सादर अभिवादन  गजल का अच्छा प्रयास हुआ बहुत-बहुत बधाइयां। उस्ताद मुहतरम की इस्लाह क़ाबिल -ए -ग़ौर है मुहतरमा "
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय भाईSanjay Shukla  जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. उस्ताद मुहतरम की इस्लाह क़ाबिल -ए -ग़ौर है साहिब"
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय भाई Naveen Mani Tripathi जी सादर अभिवादन तरही मुशाइरः की बढ़िया प्रथम प्रस्तुति के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय  Anil Kumar Singh  जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए ह्रदय से आभार।आपकी शंका का समाधान उस्ताद जी ने कर ही दिया है"
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"प्रिय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए ह्रदय से आभार। आपने सही कहा है। .चौथे शैर का ऊला यूँ पढ़ा जाए। . पैरों में धूल और हैं काँटे चुभे हुए."
Sep 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221-2121-1221-212 हैं साथ हर घड़ी वो चले थे जहाँ से हमअब सबसे पूछते हैं कि आए कहाँ से हम (1) बस एक आदमी से है नाराज़गी हमें लेकिन ख़फ़ा ख़फ़ा से हैं सारे जहाँ से हम (2) क्यों बर्क़ ढूँढती है हमारा ही आशियाँ पूछेंगे एक रोज़ कभी आसमाँ से हम (3) पैरों में…"
Sep 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी

कोने में पड़ा घर के परेशान हूँ मैं भी (1)

गर आप सरल होंगे तो आसान हूँ मैं भी

ज़ालिम हैं अगर आप तो हैवान हूँ मैं भी (2)

ये सूनी दिवारें ही मुझे घूर रहीं हैं

खाली है मकाँ भी मिरा सुनसान हूँ मैं भी (3)

गर मिल भी गए हम भी तो आबाद न होंगे

उजड़ा है अगर तू भी तो वीरान हूँ मैं भी (4)

आएगा किसी दिन वो लगाएगा ठिकाने

कमरे में पड़ा फालतू सामान हूँ मैं भी…

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Posted on September 16, 2021 at 8:30am — 5 Comments

बेवज़्ह मुझे रोने की आदत भी बहुत थी...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

बेवज़्ह मुझे रोने की आदत भी बहुत थी

पर मुझको रुलाने में सियासत भी बहुत थी (1)

माज़ी को भुला कर मियाँ अच्छा किया मैंने

रखने में उसे याद अज़ीयत भी बहुत थी (2)

मैंने भी बुझा दी थीं वो जलती हुई शम'एँ

कमरे में हवाओं की शरारत भी बहुत थी (3)

है मुझसे अदावत उन्हें अब हद से ज़ियादा

था और ज़माना वो महब्बत भी बहुत थी (4)

ज़ालिम की शिकायत भी करें तो करें किससे

हाकिम की उसी पर ही इनायत भी…

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Posted on August 16, 2021 at 8:37pm — 15 Comments

ये लोग मुझे कुछ भी तो करने नहीं देते....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

ये लोग मुझे कुछ भी तो करने नहीं देते

मुश्किल है बहुत जीना ये मरने नहीं देते (1)

खोदा था कुआँ सहरा में हमने कभी मिल कर

कुछ लोग घड़े हमको वाँ भरने नहीं देते (2)

इक उम्र गुज़ारी है यहाँ मैंने सफ़र में

अब पाँव भी मंज़िल पे ठहरने नहीं देते (3)

उसने जो कहा है तो वो कर के ही रहेगा

वादे से उसूल उसको मुकरने नहीं देते (4)

छाता है कभी ज़ीस्त में जब ग़म का अँधेरा

डरता हूँ मगर दोस्त सिहरने…

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Posted on August 6, 2021 at 11:01pm — 8 Comments

मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-2121-1221-212

मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े

काँटों भरी थी राह प बेख़ौफ़ चल पड़े (1)

भौहें तनीं थीं देख के मुझको ऐ दिल मेरे

कुछ ऐसा कर कि अब उसी माथे प बल पड़े (2)

हर रात जागता हूँ मैं बेवज्ह दोस्तो

उसकी भी नींद में किसी शब तो ख़लल पड़े (3)

सारे बुजुर्ग देख के ख़ामोश थे मगर

बच्चे तो देखते ही खिलौने मचल पड़े (4)

सोचा नहीं था ज़ीस्त ये दिन भी दिखाएगी

देखी जो शक्ल मौत की हम भी उछल पड़े…

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Posted on July 23, 2021 at 12:30pm — 9 Comments

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