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सालिक गणवीर
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई नादिर ख़ान जी आदाब बढ़िया तरही ग़ज़ल हुई है, बधाइयाँ स्वीकार करें."
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी सादर अभिवादन बढ़िया तरही ग़ज़ल कही है आपने ,बधाइयाँ. भाई नादिर ख़ान की बातोँ का संज्ञान लें।"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई आज़ी तमाम जी आदाब तरही मिसरे पर बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. बधाईयां।गुणीजनों की इस्लाह पर अमल करें. निखार ख़ुद ब ख़ुद आता जाएगा."
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई निलेश बरई जी सादर अभिवादन तरही ग़ज़ल का प्रयास बहुत उम्दः है, गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें."
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन हर बार की तरह शानदार तरही ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें."
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीया रिचा यादव जी सादर अभिवादन अच्छी तरही ग़ज़ल कही है आपने, बधाइयाँ स्वीकार करें. धामी जी ने गेयता को लेकर टिप्पणीकी है मैं भी उससे सहमत हूँ. बाक़ी शुभ शुभ."
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय भाई Aazi Tamaam  जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ।"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीया  Richa Yadav  जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ।"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई निलेश बरई (नवाज़िश  जीग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ।"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ।"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदरणीय  Chetan Prakash जी ग़ज़ल पर आपकी आमद और तवज़्ज़ो के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ। साम क़ाफ़िया के लिए कुछ उदाहरण पेश कर रहा हूँ। //तहमतन यानी 'रुस्तम' था गिरामी 'साम' का वारिसगिरामी 'साम' था…"
Apr 24
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"22 22 22 22 22 22 22 2 कोशिश तो हमनें भी की थी लेकिन हम नाकाम हुएजीत गए तो नाम न पूछा हारे तो बद-नाम हुए (1) शब के अँधियारे में यारब जाने क्या होता होगादिन में ही जब इस दुनिया में कैसे कैसे काम हुए (2) रखता हूँ दिन भर दरवाज़े बंद सदा घर के…"
Apr 23
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई ब्रजेश कुमार जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
Apr 21
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
Apr 21
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई आजी तमाम जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार"
Apr 21
बसंत कुमार शर्मा commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन ।अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई "
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे

कल घाट मौत के यूँ उतारा गया मुझे (1)

मैं जा रहा था रूठ के लेकिन सदा न दी

था सामने खड़ा तो पुकारा गया मुझे (2)

मैं एक साँस में कभी बाहर न आ सकूँ

दरिया में और गहरे उतारा गया मुझे (3)

अक्सर यही हुआ है मैं जब भी दुरुस्त था

बिगड़ा नहीं था फिर भी सुधारा गया मुझे (4)

देता रहूँ सबूत मैं कब तक वज़ूद का

हर बार हर क़दम पे नक़ारा गया मुझे…

Continue

Posted on April 7, 2021 at 1:51pm — 9 Comments

बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

212 1222 212 1222

बात मुख्तसर सी थी गर कही नहीं होती

लाठी एक तनकर थी अब खड़ी नहीं होती (1)

छोटे छोटे ख़्वाबों का रोज़ क़त्ल करती है

बेटी क्यों ये आसानी से बड़ी नहीं होती (2)

आपसे मिलूँ गर मैं तो उदास होता हूँ

और जब नहीं मिलते तो ख़ुशी नहीं होती (3)

बढ़ नहीं सकी आगे कार ही उमीदों की

लाल ही रही बत्ती वो हरी नहीं होती (4)

ज़िंदगी में दोनों तो साथ साथ रहते हैं

पर गुलाब काँटों में दोस्ती नहीं होती…

Continue

Posted on March 19, 2021 at 11:01pm — 4 Comments

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता

बादलों से ढका नही रहता (1)

लोग मुझको न ढूँढ पाएँगे

मैं कहाँ हूँ पता नहीं रहता  (2)

इश्क़ में काम इतने होते हैं

फिर कोई काम का नहीं रहता  (3)

लोग आपस में बाँट लेते हैं

मेरा हिस्सा बचा नहीं रहता (4)

हम सभी मिल के एक होते तो

मुल्क इतना बँटा नहीं रहता (5)

लौट आया है सुख मिरे घर में

देख रहता है या नहीं रहता (6)

इक न इक…

Continue

Posted on March 5, 2021 at 4:42am — 5 Comments

यार कब तक डरा करे कोई.........( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

यार कब तक डरा करे कोई

मौत का सामना करे कोई (1)

मैं तो उनके क़रीब रहता हूँ

दूर मुझसे रहा करे कोई (2)

मुफ़्त में गर किसी को देना हो

मशविर: दे दिया करे कोई (3)

मयकदे से बताओ ऐ यारो

दूर कब तक रहा करे कोई (4)

क्या ज़मींदोज़ करके मानेगा

और कितना दबा करे कोई (5)

वक्त के साथ भर ही जाएँगे

ज़ख़्म जितने दिया करे कोई (6)

यार "सालिक" की अब ये ख़्वाहिश…

Continue

Posted on February 14, 2021 at 10:30pm — 8 Comments

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