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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार। तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें ।सर् के द्वारा बताए गए सुधारों से ग़ज़ल बेहतरीन हो जाएगी।"
14 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय दीपांजलि दुबे जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
12 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर्, शे'र ठीक करने की कोशिश की है।     2122 2122 2122 212 छोड़ना मुमकिन नहीं था हाथ रौशन शम्अ का इसलिए बस बन गए जलता हुआ परवाना हम  मक़्ता भी लिखा है सर् इश्क आँखों से उतर कर रूह तक…"
13 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, मुझे अलग अंदाज़ लिए ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी। सर् की इस्लाह के अनुसार ग़ज़ल सुधार के बाद  बेहतरीन हो जाएगी। सादर"
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सर् संज्ञान हेतु आभ। सर् लाजवाब शे'र है। "
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। जी, जरूर ।"
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया ऋचा जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। जी, जरूर "
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार। आदरणीय, सुधार करके दिखाती हूँ। "
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, आपसे सहमत हूँ। ठीक करके दिखाती हूँ। "
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रियः।  सर् मतला इस तरह से कर दूँ क्या  काश महफ़िल में तुम्हारी भूलकर शर्माना हम  जाम आँखों के पिलाते खोलकर मयख़ाना हम  या  रात महफ़िल में तुम्हारी भूलकर…"
16 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।स्वीकार करें।"
22 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें।"
22 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"2122  2122   2122  212 1 कल तुम्हारी बज़्म में भूलकर शर्माना हम पी रहे थे जाम आँखों का बने रिंदाना हम 2 देखते हैं दर्द /ज़ख़्म की गहराइयों को आज भी रख के अपने टूटे दिल में सब्र का पैमाना हम 3 चाँदनी रातों में टूटे ख़्वाबों की ले कर…"
23 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर' भाई बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई।मतला विशेष रूप से पसंद आया।"
23 hours ago
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् शानदार ग़ज़ल हुई। सर् हर शे'र पर दाद क़ुबूल करें।"
Monday
सालिक गणवीर commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादन एक उम्दः ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें"
Friday

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Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल-दिल दिया हमने

2122 1212 22

1

एक बेहिस को दिल दिया हमने

कह के अपना उसे ख़ुदा हमने

2

रहके तुमसे खफ़ा खफ़ा हमने

ख़ुद को बर्बाद कर लिया हमने…

Continue

Posted on July 15, 2021 at 7:12pm — 7 Comments

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

2122 1122 1122 22 /112

1

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

दिल मेरा तोड़ा गया कह के ख़िलौना कल शब

2

ज़ख़्मी दिल पर तेरा जब नाम उकेरा कल शब

हाय रब्बा मेरे तब होंठों से निकला कल शब

3

झूठ की सुब्ह तलक माँग है बाज़ारों में

और मैं एक भी सच बेच न पाया कल शब

4

मेरे हाथों की लकीरें भी बदल जाएँगी

ख़्वाब आँखों ने दिखाया मुझे ऐसा कल शब

5

उस तरफ़ चाँद सितारों की चमक थी "निर्मल"

इस तरफ़ था…

Continue

Posted on April 4, 2021 at 7:00am

ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं

212 1222

1

ज़ार ज़ार रोते हैं

जब वो होश ख़ोते हैं

2

ख़्वान ए इश्क वाले ही

तो फ़कीर होते हैं

3

लोग क्यों अदावत में

हाथ खूँ से धोते हैं

4

डोरी में वो सांसों की

आरज़ू पिरोते हैं

5

चाहतों की गठरी सब

उम्र भर सँजोते हैं

6

क्यों अज़ीज़ अपने ही

अश्कों में डुबोते हैं

7

ख़्वाब देखने वाले

रात भर न सोते हैं

मौलिक व अप्रकाशित

रचना…

Continue

Posted on March 30, 2021 at 8:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल- उफ़ किया न करे

मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212 1122 1212 22

1

जो सह के ज़ुल्म हज़ारों भी उफ़ किया न करे

दुआ करो कि उसे ग़म कोई मिला न करे

2

मुझे बहार की रंगीनियाँ मिलें न मिलें

मगर ख़िज़ा ही रहे उम्र भर ख़ुदा न करे

3

मुझे वो बज़्म में चाहे मिले नहीं खुल कर

मगर मज़ाक में भी ग़ैर तो कहा न करे

4

मैं ज़र्द पत्ते सा घबरा के काँप जाता हूँ

कहे हवा से कोई तेज़ वो चला न करे

5

नशा किसी प महब्बत…

Continue

Posted on March 21, 2021 at 8:30am — 7 Comments

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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार। तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें ।सर् के द्वारा बताए गए…"
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"उस्ताद -ए - मुहतरम Samar kabeer साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए शुक्रगुज़ार…"
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया Richa Yadav जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया  Rozina Dighe जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के…"
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया Rachna Bhatia जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। पुनः उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार । सुधार में कोई त्रुटि…"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ गए बस दे के अपनी जान का नज़राना हम वो कि गोया कोई शम्मा और ज्यूँ परवाना हम उनको लगता था हुए हैं…"
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Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार आ.लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत बहुत शुक्रिया!"
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'हम जातीय आधार पर विकास की योजनाएं बनाएंगे।''क्या अमीर -गरीब जाति के आधार पर होते हैं?' बाबा ने…See More
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