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Md. Anis arman
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Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Aug 30
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब रवि शुक्ला जी ग़ज़ल तक आने और पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Aug 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई । "
Aug 26
Ravi Shukla commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"उम्दा गजल कही आपने आदरणीय  अनीस जी रदीफ का बेहतर इस्तेमाल हुआ । मुबारक बाद कुबूल करें "
Aug 26
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी ग़ज़ल पर आपकी इस प्रतिक्रिया ने ऊर्जा से भर दिया है मुझे, सच कहूँ तो ऐसे प्रयोग करते वक़्त एक डर भी बना रहता है इसे किस तरह लिया जाएगा पर आपने मेरा डर दूर कर दिया, इस ऊर्जा से कुछ और बेहतर लिख सकूँगा अब, आपका बहुत बहुत…"
Aug 26

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"वाह, क्य बात है दो मिनट में !   आदरणीय अनीस अरमान साहब, इस ग़ज़ल के कुछ शेरों के अंदाज पर मैं दंग हूँ. क्या खूब मिसर्  हुए हैं. यथा,  थी उसे जल्दी तो मैं भी कुछ न बोलाहाल उसको क्या सुनाता दो मिनट में ... …"
Aug 23
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post नज़्म
"जनाब लक्ष्मण धामी साहब नज़्म तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
Aug 15
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कबीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, देर से जवाब देने के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ "
Aug 15
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी ग़ज़ल तक आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया देर से प्रतिक्रिया के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ "
Aug 15
Samar kabeer commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"जनाब अनीस अरमान जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post नज़्म
"आ. भाई अनीस जी, सादर अभिवादन। अच्छी नज्म हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 7
Chetan Prakash commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आदाब, भाई अनीस अरमान, छोटी बह्र, लेकिन सहज भाव अच्छी ग़ज़ल हुई है, मुबारक हो! "
Aug 5
Md. Anis arman posted a blog post

ग़ज़ल

2122, 2122, 2122 1)कर लिया हमने ख़सारा दो मिनट में हो गया दिल ये पराया दो मिनट में2)उम्र उसकी राह तकते कट गई है आ रहा हूँ कह गया था दो मिनट में3)थी उसे जल्दी तो मैं भी कुछ न बोला हाल उसको क्या सुनाता दो मिनट में4)जिस्म कैसे साथ दे अब उम्र भर तक पक रहा है आज खाना दो मिनट में5)होती है नाज़ुक बहुत रिश्तों की डोरी टूट जाता है भरोसा दो मिनट में6)लोग कहते हैं 'अनीस' इतना है माहिर वो बना लेता है अपना दो मिनट मेंअनीस अरमान मौलिक अप्रकाशित See More
Aug 5
Md. Anis arman commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"जनाब चेतन प्रकाश जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने बहुत बहुत मुबारक "
Aug 5
Md. Anis arman commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है सर हर शेर लाजवाब है लफ़्ज़ों की कमाल की कलाकारी की है आपने बहुत कुछ सीखा जा सकता है इससे बहुत बहुत मुबारक "
Aug 5
Md. Anis arman commented on Md. Anis arman's blog post नज़्म
"जनाब अमीरुद्दीन अमीर साहब नज़्म तक आने और पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया, ममनून हूँ "
Aug 2

Profile Information

Gender
Male
City State
sakti chhattisgarh
Native Place
sakti
Profession
business
About me
i m simple man

Md. Anis arman's Blog

ग़ज़ल

2122, 2122, 2122



1)कर लिया हमने ख़सारा दो मिनट में

हो गया दिल ये पराया दो मिनट में

2)उम्र उसकी राह तकते कट गई है

आ रहा हूँ कह गया था दो मिनट में

3)थी उसे जल्दी तो मैं भी कुछ न बोला

हाल उसको क्या सुनाता दो मिनट में

4)जिस्म कैसे साथ दे अब उम्र भर तक

पक रहा है आज खाना दो मिनट में

5)होती है नाज़ुक बहुत रिश्तों की डोरी

टूट जाता है भरोसा दो मिनट…

Continue

Posted on August 5, 2021 at 10:12am — 10 Comments

नज़्म



उदास तारा

1212, 1122, 1212, 22



न बदली  छाई थी कोई न कुहरा छाया था

लपेटे चाँदनी अपनी  क़मर भी निकला था 

सजा था रात सितारों से आसमाँ सारा

उन्हीं के बीच था गुमसुम उदास इक तारा 

उदास देख उसे दिल मेरा मचलने लगा

कि बात करने का उससे ख़याल पलने लगा 

बुलाया मैंने इशारे से फिर क़रीब उसे

कहा बता तू ज़रा  हाल ऐ हबीब मुझे …

Continue

Posted on July 31, 2021 at 10:11am — 6 Comments

ग़ज़ल

12122, 12122



1)वो मिलने आता मगर बिज़ी था

मैं मिलने जाता मगर बिज़ी था

2)था इश्क़ तुझसे मुझे भी यारा

तुझे बताता मगर बिज़ी था

3)वो कह रहा था मदद को तेरी

ज़रूर आता मगर बिज़ी था

4)मैं दूसरों की तरह जहाँ में

बहुत कमाता मगर बिज़ी था

5)वो चाहती थी मना लूँ उसको

है सच मनाता मगर बिज़ी था

6)फ़लक से तेरे लिए यक़ीनन

मैं चाँद लाता मगर बिज़ी…

Continue

Posted on July 23, 2021 at 8:07pm — 12 Comments

ग़ज़ल

1212, 1122, 1212, 22

1)वो ऐसे लोग जो दुनिया से तेरी ग़ाफ़िल हैं

मेरी नज़र में वही आज सबसे आक़िल हैं

2)ये उसके सामने इक़रार करना चाहता हूँ

रक़ीब सारे मेरी जान मुझसे क़ाबिल हैं

3) हमारे मुल्क में है मसअला यही इक बस

पढ़े लिखे भी बहुत से यहाँ के जाहिल हैं

4)हकीम बेबसी मँहगी दवा सियासतदाँ

यही हैं वो जो मेरी ज़िन्दगी के क़ातिल हैं

5)मैं जिनके वास्ते दुनिया से लड़ने निकला हूँ …

Continue

Posted on July 18, 2021 at 8:00pm — 8 Comments

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At 12:34pm on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अनीस शैख़ जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया!
दण्डपाणि नाहक
At 8:34pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मो. अनीस शैख़ जी आदाब, हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !
At 7:48am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अनिस शेख जी
At 10:33am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख साहब आदाब हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 12:29pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख साहब आदाब
बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 11:44pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
At 8:06am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय
 
 
 

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