For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मनोज अहसास
  • 39, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
Share on Facebook MySpace

मनोज अहसास's Friends

  • सीमा शर्मा मेरठी
  • Rajan Sharma
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • Nilesh Shevgaonkar
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • मिथिलेश वामनकर
  • वीनस केसरी
  • Saurabh Pandey

मनोज अहसास's Groups

 

मनोज अहसास's Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"अच्छी ग़ज़ल कही भाई मनोज जी...बधाई"
Monday
Gurpreet Singh jammu commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी इस अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बधाई। ग़ज़ल पढ़ते हुए जो प्वाइंट मन में आए वो साझा कर रहा हूं। अगर कुछ गलत कहूं तो कृपया क्षमा कीजिएगा। मतले के सानी में पूरी ज़ीस्त का जिक्र है तो फिर ऊला में मुझे लगता है कि दिन और रात को हर…"
Sunday
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब ग़ज़ल पर बेशकीमती इस्लाह का हार्दिक आभार सुधार के प्रयास जारी है सादर"
Sunday
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफिर साहब हार्दिक आभार सादर"
Sunday
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब सुधार का प्रयास करता हूँ सादर"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधाई। आ. भाई समर जी से सहमत हूँ।"
Sunday
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'कुदरत के इंतजाम में किसकी चली हुज़ूर,'मत आइने को देखके ज्यादा मलाल कर'---- इस शे`र के ऊला में 'हुज़ूर" शब्द आदर सूचक है  इसलिये शुतर गुरबा दोष…"
Sunday
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  ये देख  कर बहुत अफ़सोस होता है कि अभी तक आपको हिन्दी उर्दू शब्द ठीक से लिखना भी नहीं आते I  'तेरे ख्यालों के अंजुमन में हज़ार पहरे लगे हुए हैं'--इस मिसरे…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15एक ताज़ा ग़ज़लटुकड़े टुकड़े में दिन बीता और पहाड़ सी रात कटी।तेरी उल्फत में जाने जां ज़ीस्त यूँ ही बेबात कटी।तूने छीन के अँधियारों से मुझको दिया नया जीवन,तू क्या जाने फिर तेरे बिन कैसे ये सौगात कटी।इस दुनिया की सबसे पुरानी शर्त है उपयोगी होना ,उसका मर जाना बेहतर है जिस घोड़े की लात कटी।चाहत के दो कतरे पीकर जीवन भर सुलगा जीवन,खुद को लम्हा लम्हा जलाके ये तेरी खैरात कटी।कैद कर लिया है खुद को बस खामोशी के मौसम में,तन्हाई के आँगन में सर्दी,गर्मी,बरसात कटी।क्या हासिल मेरे साथी ग़ज़ल में लिखकर दिल की…See More
Sunday
मनोज अहसास commented on Anita Bhatnagar's blog post ग़ज़ल
"सुंदर प्रस्तुति आदरणीय लेकिन मंच के नियमानुसार आपने इस ग़ज़ल पर बहर नहीं लिखी है जब तक बहर नहीं लिखेंगे तब तक इसको समझने में दुश्वारी है सादर"
Jan 26
मनोज अहसास commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"बसंत पर आधारित बहुत सुंदर रचना हुई आदरणीय बहुत-बहुत बधाई"
Jan 26
मनोज अहसास commented on Anita Bhatnagar's blog post ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीया ग़ज़ल के प्रयास की हार्दिक बधाई आपनव जो बहर लिखी है उसके मुताबिक पूर्ण विराम का प्रयोग इस प्रकार उचित नहीं हैं दो बार पूर्ण विराम न लगाइए एक ही बार लगाइए और दो शेरो के बीच मे एक लाइन नहीं छोड़िए बल्कि हर शेर के बाद एक लाइन…"
Jan 26
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

221 2121 1221 212मुश्किल में अपने इश्क़ की यूँ देखभाल कर।अपने कहे का ,अपने लिखे का ख़्याल कर।महसूस हो न दिल मे कभी उसकी याद तो,अपने ज़मीर को जगा के सौ सवाल कर।इक तरफा प्यार फिर भी बहुत कामयाब है,खुद में ही उलझे रहना है सिक्के उछाल कर।हम ही नहीं थे आपकी महफ़िल की रौशनी,अच्छा किया है आपने दिल से निकाल कर।ये चार दिन की बात तो मेरे लिए थी बस,तू चाँदनी को रखना हमेशा संभाल कर।कुदरत के इंतजाम में किसकी चली हुज़ूर,मत आइने को देखके ज्यादा मलाल कर।ये सर्द रात यूँ भी बहुत बेकरार है,थोड़ा सा पानी रखले सुराही में…See More
Jan 22
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय समर साहब हार्दिक आभार"
Jan 21
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"//इस मिसरे में मैनें खला का अर्थ रिक्त स्थान से लिया है// रिक्त स्थान को "ख़ला" कहते हैं, 'खला' नहीं । //इस बारे में थोड़ा और बताने की कृपा करें// 'तर्जुमा' का अर्थ है 'अनुवाद' और अनुवाद किया जाता है, ले जाया…"
Jan 21

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

मनोज अहसास's Blog

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15

एक ताज़ा ग़ज़ल

टुकड़े टुकड़े में दिन बीता और पहाड़ सी रात कटी।

तेरी उल्फत में जाने जां ज़ीस्त यूँ ही बेबात कटी।

तूने छीन के अँधियारों से मुझको दिया नया जीवन,

तू क्या जाने फिर तेरे बिन कैसे ये सौगात कटी।

इस दुनिया की सबसे पुरानी शर्त है उपयोगी होना ,

उसका मर जाना बेहतर है जिस घोड़े की लात कटी।

चाहत के दो कतरे पीकर जीवन भर सुलगा जीवन,

खुद को लम्हा लम्हा जलाके ये तेरी खैरात कटी।

कैद कर लिया है खुद को बस…

Continue

Posted on January 28, 2023 at 11:25pm — 1 Comment

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

221 2121 1221 212

मुश्किल में अपने इश्क़ की यूँ देखभाल कर।

अपने कहे का ,अपने लिखे का ख़्याल कर।

महसूस हो न दिल मे कभी उसकी याद तो,

अपने ज़मीर को जगा के सौ सवाल कर।

इक तरफा प्यार फिर भी बहुत कामयाब है,

खुद में ही उलझे रहना है सिक्के उछाल कर।

हम ही नहीं थे आपकी महफ़िल की रौशनी,

अच्छा किया है आपने दिल से निकाल कर।

ये चार दिन की बात तो मेरे लिए थी बस,

तू चाँदनी को रखना हमेशा संभाल कर।

कुदरत के…

Continue

Posted on January 22, 2023 at 12:06am — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

12122   12122   12122    12122

तेरे ख्यालों के अंजुमन में हज़ार पहरे लगे हुए हैं

सजाये कैसे ग़ज़ल का दामन गुनाहों में हम रंगे गए हैं

हमारे जैसा उदास कोई हमें कहीं भी नहीं मिला पर

हमारे दुख से बड़े बहुत दुख ज़माने भर में भरे पड़े हैं

कभी नहीं वो कहेंगे हमसे के उनके दिल में है प्यार अब भी

सकार को भी जिया था हमने नकार को भी समझ रहे हैं

ये ज़िन्दगी की उदास खुशबू जो बस गयी है मेरी रगों में

ज़रा सा खुश हूँ मैं इसमें क्योंकि तुम्हारें…

Continue

Posted on January 20, 2023 at 8:00pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2122  2122   2122   212

कौन सी मंज़िल पे ये रस्ता नया ले जाएगा।

मुझको लगता है ये मेरा हौसला ले जाएगा।

ऐ फरेबी वक़्त मुझको हर सितम तेरा कुबूल,

मेरी साँसों से अधिक तू मेरा क्या ले जाएगा।

ये अँधेरा युग तो इक दिन बीत जाएगा मगर,

कीमती मौसम हमारी उम्र का ले जाएगा।

इससे पहले वक़्त अपनी चाल चल दे डाकिये,

उससे कहना मेरे होने का पता ले जाएगा।

टूट जाएगा मेरी उम्मीद का सच जानकर,

मेरी ग़ज़लों को कुरेदा तो…

Continue

Posted on December 26, 2022 at 12:15am — 11 Comments

Comment Wall (10 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:21pm on October 23, 2015, DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
4 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
5 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
5 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"स आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। आदरणीय ग़ज़ल पर इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: ।सर् आपके कहे…"
5 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

सौन्दर्य का पर्याय

उषा अवस्थी"नग्नता" सौन्दर्य का पर्याय बनती जा रही हैफिल्म चलने का बड़ा आधारबनती जा रही है"तन मेरा…See More
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Bhatnagar's blog post ग़ज़ल
"आ. अनीता जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है पर यह और समय चाहती है। कुछ सुझाव के साथ फिलहाल इस…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहे वसंत के - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

जिस वसंत की खोज में, बीते अनगिन सालआज स्वयं ही  आ  मिला, आँगन में वाचाल।१।*दुश्मन तजकर दुश्मनी, जब…See More
12 hours ago
PHOOL SINGH posted blog posts
20 hours ago
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)

22 22 22 22 22 2 पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।उनके मन में भी सौ अजगर बैठे हैं। 'ए' की बेटी,…See More
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक. . . .दर्द   भरी   हैं   लोरियाँ, भूखे    बीते    रैन।दृगजल  से  रहते  भरे, निर्धन  के …See More
20 hours ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service