For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manoj kumar Ahsaas
  • 38, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
Share

Manoj kumar Ahsaas's Friends

  • सीमा शर्मा मेरठी
  • Rajan Sharma
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • Nilesh Shevgaonkar
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • मिथिलेश वामनकर
  • वीनस केसरी
  • Saurabh Pandey
 

Manoj kumar Ahsaas's Page

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"मुहतरम जनाब मनोज अहसास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। जनाब चेतन प्रकाश जी के मशविरे क़ाबिल ए ग़ौर हैं। 'मेरे लबों पर बस तेरे हक़ में दुआ रहे'   यह मिसरा 'पर' शब्द की वज्ह से बह्र में नहीं है।…"
Monday
Chetan Prakash commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदाब, मनोज अहसास, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है! कुछ जगहों पर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा, यथा  (१) पांचवें शे'र का सानी मिसरा, " मेरे लबों पर बस तेरे हक़ में दुआ रहे " इसमें पर के स्थान पर 'पे' बेहतर होता! (२ ) छठे…"
Monday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221    2121    1221     212वो सिलसिला मिला ही नहीं जो जुड़ा रहे।हम सबके होके दोस्तो सबसे जुदा रहे।दीवारें आंधियों का असर सह रही है पर,ये देखना है घर मेरा कब तक खड़ा रहे।टुकड़े तुम्हारी याद के दिल में समेटकर,सारे जहां के रिश्तों से हम बावफ़ा रहे।बचपन से ही उदास रही है मेरी नज़र, दो चार रोज साथ तेरे खुशनुमा रहे।तेरे क़रीब कौन है इसका मलाल क्या, मेरे लबों पर बस तेरे हक़ में दुआ रहे।माना के अब वजूद बुलंदी पे है तेरा, ये खुद से पूछ लेना कि हम तेरे क्या रहे।कर दे तेरी नजर से खुदा हमको लापता, तू सारी उम्र…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी ,अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 13
Manoj kumar Ahsaas commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रात भर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मुसाफिर जी कुछ टंकण त्रुटियां हैं  उनकी ओर ध्यान दीजिए"
Jul 12
Rahul Dangi Panchal commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"सुन्दर "
Jul 9
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आज़ी जी, ये ब्रजेश जी की नहीं मनोज अहसास जी की कोशिश है :-)))"
Jul 6
Aazi Tamaam commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"सादर प्रणाम आ ब्रजेश जी बेहद खूबसूरत कोशिश है आपकी भी गुरु जी का मशविरा तो सर आँखों पर सादर"
Jul 6
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब नमस्कार आपकी बहुमूल्य इस्लाह,बेशकीमती जानकारी से मुझे सदैव लाभ हुआ है मेरी अधिकांश ग़ज़लें आपकी इस्लाह में हुई है  मैं दिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ जो आपने इस ग़ज़ल को भी अपना आशीर्वाद दिया  सुधार करने का पूरा प्रयास…"
Jul 5
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । सबसे पहले इस बह्र के बारे में बता दूँ कि ये हिन्दी की मात्रिक बह्र है और उर्दू से इसका कोई तअल्लुक़ नहीं,न ही ये उर्दू की अरूज़ की किताबों में मिलती है ये अलग बात है कि उर्दू वालों ने…"
Jul 5
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222    1222    122खबर झूठी उड़ाना चाहता हूँ,तेरी यादें छुपाना चाहता हूँ।तुम्हारे पास थोड़ा वक्त हो तो, मैं हाले दिल सुनाना चाहता हूँ।रकीबों की गली में आ गया हूँ,तेरे घर में ठिकाना चाहता हूँ।जो मेरी जान के दुश्मन बने हैं, उन्हीं के हाथ आना चाहता हूँ।बवंडर क्यों उठा है सरहदों पर, मैं सबको सच बताना चाहता हूँ।सियासत ,घर के झगड़े, दिल की बातें मैं सब से दूर जाना चाहता हूँ।अदब भी बेअदब अब हो गया है, ग़ज़ल का दिल बचाना चाहता हूँ।मौलिक और अप्रकाशितSee More
Jul 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज जी बहर चलन में है या नहीं ये तो जानकर लोग ही बताएंगे..लेकिन आपने निभाया खूबसूरती से है।हालाँकि तीसरे और चौथे शे'र को मैं उस लय में नहीं पढ़ पा रहा हूँ जिसमें बाकी पढ़े हैं।सादर"
Jul 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"सादर आभार आदरणीय अमीर साहब यह बहर मैंने कबीर साहब से सुनी थी और उन्होंने मुझे इसके बारे में बताया था बाकी का मशवरा वही देंगे आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफजाई के लिए हार्दिक शुक्रिया साहब हार्दिक आभार"
Jul 3
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, आपने जिस तरह से बह्र के अरकान लिखे हैं उससे असमंजस की स्थिति है क्योंकि इस तरह की कोई प्रचलित बह्र शायद नहीं है, यदि है तो इस बह्र का नाम बताने की ज़हमत फ़रमाएं, इसके इलावा यदि आप इसे 32 रुक्नी बह्र-ए-मीर कहेंगे या…"
Jul 3
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

ग़ज़ल-221 1222 22 221 1222 22इस बहर में मेरी ये पहली ग़ज़ल है यह मतला लगभग 2 वर्ष पहले हुआ था लेकिन यह ग़ज़ल पूरी नहीं हो रही थी इसका कारण यह है कि मैं इस बहर में सहज महसूस नहीं कर रहा था यह बहर मेरी समझ में ही नहीं आ रही आज किसी तरह यह पूरी हुई है जानकार लोग बताएं कि क्या यह बहर ठीक से निभाई गई है या नहीं....मरने का बहाना मिल जाता, जीने की सज़ा से बच जाते,इक बार कभी वो आ जाते जो आ न सके आते आते ।महसूस कभी होता कैसे वो दर्द का रिश्ता टूट गया ,खामोशी में भी शामिल थे तुम, तुम याद रहे हँसते गाते…See More
Jul 3
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2×15वक़्त गुज़र जाएगा ये भी पल पल का घबराना क्या?जो आँखों में ठहर न पाये उन सपनों से रिश्ता क्या?अपनी मर्ज़ी का जीवन हो ज्यादा हो या थोड़ा हो,मरना तो सबको है इक दिन घुट घुट कर फिर जीना क्या?सोच समझ कर कदम बढ़ाना हर रस्ते पर धोखा है,घर के किस्से,देश की बातें ,दीन धर्म का झगड़ा क्या?पहली दफा जब मिले थे तुमसे वो दिन तो अब याद नहीं,लेकिन अब तक सोच रहे हैं टूट गया वो रिश्ता क्या?सबका भला करने की कोशिश कभी नहीं होती पूरी,लोग खफा होकर बैठे हैं इस पर कहना सुनना क्या?जिसको हमनें समझ लिया था दुनिया से ज्यादा…See More
Jun 29

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221    2121    1221     212

वो सिलसिला मिला ही नहीं जो जुड़ा रहे।

हम सबके होके दोस्तो सबसे जुदा रहे।

दीवारें आंधियों का असर सह रही है पर,

ये देखना है घर मेरा कब तक खड़ा रहे।

टुकड़े तुम्हारी याद के दिल में समेटकर,

सारे जहां के रिश्तों से हम बावफ़ा रहे।

बचपन से ही उदास रही है मेरी नज़र,

दो चार रोज साथ तेरे खुशनुमा रहे।

तेरे क़रीब कौन है इसका मलाल क्या,

मेरे लबों पर बस तेरे हक़ में दुआ…

Continue

Posted on July 25, 2021 at 11:35pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222    1222    122

खबर झूठी उड़ाना चाहता हूँ,

तेरी यादें छुपाना चाहता हूँ।

तुम्हारे पास थोड़ा वक्त हो तो,

मैं हाले दिल सुनाना चाहता हूँ।

रकीबों की गली में आ गया हूँ,

तेरे घर में ठिकाना चाहता हूँ।

जो मेरी जान के दुश्मन बने हैं,

उन्हीं के हाथ आना चाहता हूँ।

बवंडर क्यों उठा है सरहदों पर,

मैं सबको सच बताना चाहता हूँ।

सियासत ,घर के झगड़े, दिल की बातें

मैं सब से दूर जाना…

Continue

Posted on July 3, 2021 at 8:39pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

ग़ज़ल-221 1222 22 221 1222 22

इस बहर में मेरी ये पहली ग़ज़ल है यह मतला लगभग 2 वर्ष पहले हुआ था लेकिन यह ग़ज़ल पूरी नहीं हो रही थी इसका कारण यह है कि मैं इस बहर में सहज महसूस नहीं कर रहा था यह बहर मेरी समझ में ही नहीं आ रही आज किसी तरह यह पूरी हुई है जानकार लोग बताएं कि क्या यह बहर ठीक से निभाई गई है या नहीं....

मरने का बहाना मिल जाता, जीने की सज़ा से बच जाते,

इक बार कभी वो आ जाते जो आ न सके आते आते ।

महसूस कभी होता कैसे वो दर्द का रिश्ता टूट गया…

Continue

Posted on July 3, 2021 at 12:06am — 7 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2×15

वक़्त गुज़र जाएगा ये भी पल पल का घबराना क्या?

जो आँखों में ठहर न पाये उन सपनों से रिश्ता क्या?

अपनी मर्ज़ी का जीवन हो ज्यादा हो या थोड़ा हो,

मरना तो सबको है इक दिन घुट घुट कर फिर जीना क्या?

सोच समझ कर कदम बढ़ाना हर रस्ते पर धोखा है,

घर के किस्से,देश की बातें ,दीन धर्म का झगड़ा क्या?

पहली दफा जब मिले थे तुमसे वो दिन तो अब याद नहीं,

लेकिन अब तक सोच रहे हैं टूट गया वो रिश्ता क्या?

सबका भला करने की कोशिश कभी नहीं…

Continue

Posted on June 29, 2021 at 12:40am

Comment Wall (10 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार आ.लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत बहुत शुक्रिया!"
39 minutes ago
Manan Kumar singh posted a blog post

जाति गणना

'हम जातीय आधार पर विकास की योजनाएं बनाएंगे।''क्या अमीर -गरीब जाति के आधार पर होते हैं?' बाबा ने…See More
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, इतने मुश्किल क़वाफ़ी अगर चन्द अशआर में भी बहतर तरीक़े से…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
3 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
" अच्छी ग़ज़ल आदरणीय मुसाफिर जी ।बाकी उस्ताद जी की सलाह से बहुत कुछ सीखने मिला।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। उत्साहवर्धन के लिए आभार.."
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रोजीना जी, अभिवादन । प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रिचा जी, अभिवादन । उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई समर जी, दो और शेर जोड़े हैं। इन्हें भी देखिएगा। सादर.. हो गयी है ऊँची कीमत नून लकड़ी तेल…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. दीपांजलि जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service