For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Hari Prakash Dubey
  • Male
  • Haridwar,Uttarakhand
  • India
Share on Facebook MySpace

Hari Prakash Dubey's Friends

  • Tanuja Upreti
  • Mohan Sethi 'इंतज़ार'
  • Samar kabeer
  • VIRENDER VEER MEHTA
  • Pari M Shlok
  • maharshi tripathi
  • pooja yadav
  • vikram singh saini
  • Mohinder Kumar
  • sarita panthi
  • Manoj kumar shrivastava
  • shree suneel
  • Gurcharan Mehta
  • Dr.sandhya tiwari
  • Rahul Dangi Panchal
 

Hari Prakash Dubey's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Haridwar Uttarakhand
Native Place
Haridwar
Profession
Service
About me
DPJ MBA

Hari Prakash Dubey's Photos

  • Add Photos
  • View All

Hari Prakash Dubey's Blog

एक बोझ भरी गठरी: लघुकथा

एक तो पिछला कर्ज ही अभी तक माफ नहीं हुआ था उस पर इस बार फिर फसल के चौपट होने और साहूकार के ब्याज की दोहरी मार उसके लिए असहनीय थी, घर में सभी को कुपोषण और बीमारी ने घेर रखा था। इस बार ना तो मदद को सरकार थी, ना ही लोग।

आखिरकार उसने शहर जाकर मजदूरी या कुछ और कर कमाने का फैसला लिया और जब वह लगभग नग्न बदन, एक बोझ भरी गठरी जिसमें कुछ सुखी रोटी और प्याज थी, लेकर , शहर के चौराहे नुमा पुल पर पहुंचा तो उसने पाया की उसके लिए सभी रास्ते बंद हैं और अवसाद ग्रस्त होकर उसने उसी पुल से नीचे…

Continue

Posted on January 19, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

अंतिम संस्कार :लघुकथा:हरि प्रकाश दुबे

“अरे सुनो !”

“अभी अम्मा जाग रहीं है... चुप !”

“बक पगली, कुछ काम की बात है, इधर तो आओ !”

“हां , बोलो !”

अरे ये मूँगफली का ठेला अब बेकार हो गया है, कोई कमाई नहीं रही !”

“काहें, अब का हुआ?!”

अरे, ससुरे सब आतें हैं , थोडा सा कुछ खरीदतें हैं बाकी सब फोड़-फोड़ चबा जातें है, जानती…

Continue

Posted on December 26, 2018 at 8:30pm — 3 Comments

मंदिर की घंटी :हरि प्रकाश दुबे

सुदूर पहाड़ी पर एक प्रसिध्द ‘माँ दुर्गा’ का एक मन्दिर था, जिसका संचालन एक ट्रस्ट के हाथ में था। उसमे पुजारी, आरती करने वाला, प्रसाद वितरण करने वाला, मंदिर की सफाई करने वाला, मंदिर की आरती के समय घंटी बजाने वाला आदि सभी लोग ट्रस्ट द्वारा दी जाने वाली दक्षिणा एवम भोजन पर रखे गए थे।

आरती खत्म हो जाने के बाद जहाँ अन्य लोग चढ़ावे को इक्कठा कर कोष में जमा कराने में तत्पर रहते थे वही घंटी बजाने वाला ‘घनश्याम’ आरती के समय भाव के साथ इतना भावविभोर हो जाता था कि होश में ही नही…

Continue

Posted on November 1, 2018 at 10:09pm — 3 Comments

रिश्तों का सच

आज उसे अपने वादे के मुताबिक अपनी पत्नी के साथ पास के एक माॅल में ही फिल्म देखने जाना था। कुछ ज्यादा उत्साहित तो नहीं था, लेकिन फिर भी अपनी पत्नी के लिए कुछ 'खास' करने की खुशी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। आॅफिस की नोंक झोंक और रास्ते में ट्रैफिक की रोक टोक जैसी बाधाओं को पार कर, जब वो घर पहुंचा तो अत्याधिक शांति पाकर थोड़ा ठिठक सा गया। हाॅल में घुसते ही, एक जाना पहचाना चेहरा जो शायद…

Continue

Posted on September 10, 2018 at 3:00pm — 6 Comments

Comment Wall (12 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:17pm on November 16, 2017, Manoj kumar shrivastava said…

क्षमा चाहता हूॅं आदरणीय मैं इस मंच पर सतत नहीं था।

At 7:01pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 10:39am on January 23, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है आपका आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी. आपकी मित्रता एक सम्मान है मेरे लिए।
सादर।
At 4:56pm on January 9, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय हरिप्रकाश जी ..आपका मित्र होना मेरे लिए सुखद है ..आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ  रचना का सम्मान मिला इस सफलता के लिए आपको ढेर सारी बधाई सादर 

At 7:52pm on January 7, 2015, harivallabh sharma said…

आदरणीय Hari Prakash Dubey साहब स्वागत आपका, एवं माह की श्रेष्ठ आपकी रचना हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें..सादर.

At 5:11pm on January 3, 2015, vikram singh saini said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरि प्रकाश जी

At 9:55pm on December 29, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी .... नमस्कार .... क्षमा चाहता हूँ लाइव चैट पर आपका मेसेज देख नहीं पाया तब मैं राहुल दांगी जी की ग़ज़ल पढ़ कर उस पर टीप लिख रहा था ... सादर 

At 11:51pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " कविता : तुम्हारा घोंसला" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:34pm on November 20, 2014, Rita Gupta said…

धन्यवाद ,आभार आपका। 

At 5:57pm on November 10, 2014, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभार।

सादर,

विजय निकोर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
5 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
6 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय ब्रजेश कुमार ब्रज जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
6 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"स आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। आदरणीय ग़ज़ल पर इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: ।सर् आपके कहे…"
6 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

सौन्दर्य का पर्याय

उषा अवस्थी"नग्नता" सौन्दर्य का पर्याय बनती जा रही हैफिल्म चलने का बड़ा आधारबनती जा रही है"तन मेरा…See More
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Bhatnagar's blog post ग़ज़ल
"आ. अनीता जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है पर यह और समय चाहती है। कुछ सुझाव के साथ फिलहाल इस…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहे वसंत के - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

जिस वसंत की खोज में, बीते अनगिन सालआज स्वयं ही  आ  मिला, आँगन में वाचाल।१।*दुश्मन तजकर दुश्मनी, जब…See More
14 hours ago
PHOOL SINGH posted blog posts
21 hours ago
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)

22 22 22 22 22 2 पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।उनके मन में भी सौ अजगर बैठे हैं। 'ए' की बेटी,…See More
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक. . . .दर्द   भरी   हैं   लोरियाँ, भूखे    बीते    रैन।दृगजल  से  रहते  भरे, निर्धन  के …See More
21 hours ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service