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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नवयुग की नारी (गीत)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी, बहुत ही सुंदर , सार्थक , सामयिक एवं विस्तृत प्रस्तुति. मोम भले ही कहलाती है।।हर साँचे में ढल जाती है।।दीप शिखा जैसा ले जीवन,जो हर घर तमस मिटाती है।।स्वयं सिद्ध हुई गुणों से, हर पद की अधिकारी है।।यह नवयुग की नारी…"
Mar 8
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं ( मार्च 22 ) — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी , मुसाफिर जी, नमस्कार, आपकी सामयिक उपस्थिति से मन प्रफुल्लित हो जाता है। आपकी उत्साहवर्धक टिप्पड़ीं के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद. .इधर कुछ समय कम मिल पाता है , इसलिए लिखना कम हो पाता है। आप सतत लेखन से जुड़े रहते हैं , देख कर…"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं ( मार्च 22 ) — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहतु सुंदर रचना हुई है । हर भाव यथार््थ है। हार्दिक बधाई।"
Mar 5
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

क्षणिकाएं ( मार्च 22 ) — डॉo विजय शंकर

हम समझते थे , झूठ के करोड़ों प्रकार होते हैं। यहां तो सच भी हर एक का अपना अपना हैं। .......... 1. तुम बेशक मेरे रास्ते में रोड़े बिछा सकते हो , मेरा नसीब नहीं बदल सकते, अगर बदल सकते तो अपनी तक़दीर बदलते , दूसरों के रास्ते में यूं रोड़े नहीं बिछाते रहते।......... 2.मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Mar 5
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post भूख नैसर्गिक है — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , रचना पर आपकी उपस्थिति एवं सकारात्मक टिप्पणी के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Nov 30, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post भूख नैसर्गिक है — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत उत्तम रचना हुई है। हार्दिक बधाई। "
Nov 27, 2021
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

भूख नैसर्गिक है — डॉo विजय शंकर

भूख नैसर्गिक है , पर रोटी , रोटी नैसर्गिक नहीं है। भूख का निदान स्वयं को करना होता है , रोटी कमानी पड़ती है , रोटी खरीदनी पड़ती है , रोटी पर टैक्स चुकाना पड़ता है , रोटी निदान है , आय का जरिया है। भूख ऐसी कुछ नहीं , उसका निदान , आदमी से क्या कुछ नहीं करा देता है , उसे एक शब्द में कमाई कह देते हैं। अपने लिए , अपने पेट के लिए। सब कुछ नैसर्गिक है ......... ? व्यापार के लिए , राजस्व के लिए।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Nov 27, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on vijay nikore's blog post श्रध्दांजलि
"आदरणीय विजय निकोर जी , आपकी लेखनी के साथ साथ आपके विचार बहुत गंभीर होते हैं और भावनाएं मानवता से ओत-प्रोत। दिल को छु जाती हैं और प्रेरित भी करती है। ..... और क्या कहूँ , दर्द तो जीवन साथी है , हमें सहनशील बनाता है। बधाई , सादर"
Oct 20, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी , सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।सारा सार तो इसमें है , बहुत खूब , हार्दिक बधाई ! सादर।"
Oct 20, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"अच्छा है , बधाई , सादर."
Oct 20, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर हैचूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है.बहुत ही सुन्दर , प्रेरक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
Oct 6, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on babitagupta's blog post शास्त्री जी
"आदरणीय बबीता गुप्ता जी , बहुत ही उत्तम एवं सराहनीय लेख , बधाई। श्री लाल बहादुर शास्त्री जी निसंदेह एक योग्य , कुशल एवं अपने दायित्यों के समर्पित , एक पूर्ण रूप से ईमानदार राजनेता एवं प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने वाले अपने इन्हीं गुणों के कारण जाने…"
Oct 6, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , आपकी उपस्थिति एवं सराहना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Oct 6, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई । "
Oct 4, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सौरभ पांडे जी , आपकी स्वीकृति और अलंकृत प्रतिक्रया ने रचना का मान बढ़ाया है , रचना सार्थक हुयी। आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Oct 4, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय निकोर जी , आपकी स्वीकृति माने रखती है , रचना पर आपकी मुहर लग गई , रचना सफल हो गई, आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Oct 4, 2021

Profile Information

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Male
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UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment Wall (19 comments)

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At 7:54pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी प्रणाम! बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी प्रथम लघुकथा अच्छी लगी आपने अपना अमूल्य समय निकाला और जो हौसला बढ़ाया उसका ह्रदय से आभार आपका स्नेहभाव सदा यूँ ही बना रहे!
At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

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क्षणिकाएं ( मार्च 22 ) — डॉo विजय शंकर

हम समझते थे , 

झूठ के करोड़ों प्रकार होते हैं।
यहां तो सच भी हर एक का
अपना अपना हैं। .......... 1. 

तुम बेशक मेरे रास्ते में
रोड़े बिछा सकते हो ,
मेरा नसीब नहीं बदल सकते,
अगर बदल सकते तो
अपनी तक़दीर बदलते ,
दूसरों के रास्ते में यूं
रोड़े नहीं बिछाते रहते।......... 2.

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 5, 2022 at 9:59am — 2 Comments

भूख नैसर्गिक है — डॉo विजय शंकर

भूख नैसर्गिक है ,

पर रोटी , रोटी

नैसर्गिक नहीं है।

भूख का निदान

स्वयं को करना होता है ,

रोटी कमानी पड़ती है ,

रोटी खरीदनी पड़ती है ,

रोटी पर टैक्स चुकाना पड़ता है ,

रोटी निदान है , आय का जरिया है।

भूख ऐसी कुछ नहीं , उसका निदान ,

आदमी से क्या कुछ नहीं करा देता है ,

उसे एक शब्द में कमाई कह देते हैं।

अपने लिए , अपने पेट के लिए।

सब कुछ नैसर्गिक है ......... ?

व्यापार के लिए , राजस्व के लिए।

मौलिक…

Continue

Posted on November 27, 2021 at 11:29am — 2 Comments

क्षणिकाएं (२०२१ -१ )- डॉo विजय शंकर

जो समझते हैं

वे जमे पड़े हैं ,

ये ख्याल है उनका ,

सच में तो वे

केवल पड़े हैं। .........1 .

छत पड़ी भी नहीं

और बुनियाद खिसक रही है ,

वो महल बनाने चले थे

कितनों की झोपड़ी भी उजड़ गई ,

लोग फिसल रहे हैं या उनके

पैरों के नीचे जमीन खिसक रही है। ......... 2 .

यूँ ही सफर में ही गुजर जाए , जिंदगी

अच्छा है ,

जिनकी तलाश हो

वो मंजिलों पे मिला नहीं करते ll ......... 3 .

मौलिक एवं…

Continue

Posted on September 27, 2021 at 8:30pm — 14 Comments

विसंगति —डॉo विजय शंकर

बीते कुछ दिनों में लगा
कि हम कुछ बड़े हो गये ,
अहंकार से फूलने लगे
और फूलते...चले गए।
फूले इतना कि हर समस्या
के सामने बौने हो गये।
यकीन नहीं होता कि
आदमी खुद कुछ नहीं होता ,
ये जानने के बाद भी ,
कुछ का ख्याल हैं कि
लूटो-खाओ, पाप-पुण्य
कहीं कुछ नहीं होता ,
भगवान भी कहीं नहीं होता।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 30, 2021 at 10:48am — 2 Comments

 
 
 

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