For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
Share

मोहन बेगोवाल's Friends

  • Amit Kumar "Amit"
  • गिरिराज भंडारी
  • Dr. Swaran J. Omcawr
  • राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
  • मिथिलेश वामनकर

मोहन बेगोवाल's Groups

 

मोहन बेगोवाल's Page

Latest Activity

मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

नहीं आती हिसाबों में सताती हैं तेरी यादें।भला ये साथ कैसा जो बताती हैं तेरी यादें।'.संभालोगे कहां खुद को गिराने आ गये जब वो,उठाना हाथ रोको जो सुनाती हैं तेरी यादें।.ऐ इंसाँ अब न इतना भी ज़माने का हो कर रहना,ज़रा दिल झाँक देखा याद आती हैं तेरी यादें।.बनाई जिंदगी मेरी कहानी जो सुना देते,अगर भटके सफ़र में क्यूँ जताती हैं तेरी यादें।.ये दिल चाहे कहूं कोई ग़ज़ल अब प्यार में तेरे,मगर अंदर ही फिर क्यूँ ये दबाती हैं तेरी यादें।.समंदर पास आने पे कहाँ फिर साथ दरिया का,जो पानी बन रहा मेरा रूलाती हैं तेरी…See More
Apr 1
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
" आदरनीय गंगा धर जी , नए तरह के विषय को ग़ज़ल में उठाया गया है . "
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
" आदरनीय दिनेश जी , आप जी दी ग़ज़ल अच्छी लगी , बाकी उस्ताद जी ने खामिया बारे बता दिया , जिस में मुझे भी सीखने को मिला "
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
" आदरनीय dandpani nahak ,  शुक्रिया जी "
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर', बहुत धन्यवाद जी "
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"आदरनीय संजय जी , अगर आप बताएँगे तो बहुत मेहरबानी होगी "
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"   आदरनीय  समर कबीर जी , बहुत शुक्रिया "
Mar 27
मोहन बेगोवाल commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post तेरे गम के निशानों को यहाँ पर कौन समझे
"ऐसी भावपूर्ण ग़ज़ल के लिए बहुत बधाई हो।"
Mar 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"       बता दुनिया मेरी चश्म- ए -करम ऐसा भी होता है lउमर भर इश्क़ में जलना सितम ऐसा भी होता है l कहां सोचा लिखा पढ़, देख फोटो आँख भर आए ,भला दिल पे,असर रंग -ए -क़लम ऐसा भी होता है l बिठाया सोच फूलों को हम ख़्यालों के बगीचे में,वो…"
Mar 26
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है, शिल्प और व्याकरण पर ध्यान देने की ज़रूरत है, प्रयासरत रहें ।"
Nov 29, 2020
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

2122 -1122-1122-22याद तेरी को ऐसे दिल में लगा रक्खा है ।ढूंढ  पाये  तेरा तो  जेब    पता रक्खा है ।1 रात  सो जाये हमें नींद कहाँ आती अब ,साथ रातों यही  रिश्ता जो  बना रक्खा है ।2 क्यूँ बता दी कोई अपनी  ये कहानी उसको ,बन  रहे   फूल  जो क्यूँ  शूल बता  रक्खा है।3 कल मिरा आज बिगाना वो  किसी कल  होगाकिस लिए यार  यूँ ही खुद को जला रक्खा है ।4 था कभी खोजा जिसे ऊँचे पहाड़ों जा कर ,नेक बंदे ने ख़ुदा दिल में छुपा रक्खा है ।5"मौलिक व अप्रकाशित"  See More
Nov 24, 2020
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post सोच का सफ़र (लघुकथा )
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब, आपकी लघुकथा अभी समय चाहती है, बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई ।"
Nov 8, 2020
मोहन बेगोवाल posted a blog post

सोच का सफ़र (लघुकथा )

जब मैं कल रात ड्यूटी से घर आई , तो महाभारत घर में पहले से ही हमेशा की तरह चल रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि जब घर वालों ने अपनी मर्जी से मेरी शादी की, मेरी राय तक नहीं पूछी गई l क्यूंकि मेरे जैसी जो पहले ही तीस पार कर चुकी होl उन से भला कौन राय लेता l मैं तो बोझ थी, जिसको निपटाना चाहा l जानलेवा बीमारी ने शादी के कुछ महीनों बाद ही उनको मुझसे जब दूर कर दिया। तब मुझे लगा, अब मुझे उस घर में एक अजनबी की तरह नहीं रहना चाहिए, मैं जल्दी से उनका बोझ कम करना चाहा। उनके जाने के बाद, मैं उस घर में अकेले…See More
Nov 6, 2020
Chetan Prakash commented on मोहन बेगोवाल's blog post सोच का सफ़र (लघुकथा )
"'सोच का सफर' शीर्षक के आलोक मे अच्छी लघु कथा कही जाएगी। परन्तु लघु कथा, क्षमा करें, सत्य के बोध जिस क्षण में घटित होता है उसको समर्पित होती है, न कि अनावश्यक वृतान्त को, आदरणीय मोहन बेनोवाल साहब । सादर"
Nov 5, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on मोहन बेगोवाल's blog post बुआ का घर (लघुकथा )
"आदरणीय मोहन जी लघु कथा के हिसाब से विवरण कुछ ज्यादा लग रहा मुझे...रचना शुरुआत में संस्मरण का आभाष देती है...सादर"
Nov 1, 2020
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post बुआ का घर (लघुकथा )
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब, लघुकथा का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 30, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

ग़ज़ल

नहीं आती हिसाबों में सताती हैं तेरी यादें।

भला ये साथ कैसा जो बताती हैं तेरी यादें।'

.

संभालोगे कहां खुद को गिराने आ गये जब वो,

उठाना हाथ रोको जो सुनाती हैं तेरी यादें।

.

ऐ इंसाँ अब न इतना भी ज़माने का हो कर रहना,

ज़रा दिल झाँक देखा याद आती हैं तेरी यादें।

.

बनाई जिंदगी मेरी कहानी जो सुना देते,

अगर भटके सफ़र में क्यूँ जताती हैं तेरी यादें।

.

ये दिल चाहे कहूं कोई ग़ज़ल अब प्यार में तेरे,

मगर अंदर ही फिर क्यूँ ये दबाती…

Continue

Posted on April 1, 2021 at 2:00pm

ग़ज़ल

2122 -1122-1122-22

याद तेरी को ऐसे दिल में लगा रक्खा है ।

ढूंढ  पाये  तेरा तो  जेब    पता रक्खा है ।1

 

रात  सो जाये हमें नींद कहाँ आती अब ,

साथ रातों यही  रिश्ता जो  बना रक्खा है ।2

 

क्यूँ बता दी कोई अपनी  ये कहानी उसको ,

बन  रहे   फूल  जो क्यूँ  शूल बता  रक्खा है।3

 

कल मिरा आज बिगाना वो  किसी कल  होगा

किस लिए यार  यूँ ही खुद को जला रक्खा है ।4

 

था कभी खोजा जिसे ऊँचे पहाड़ों जा कर ,

नेक बंदे…

Continue

Posted on November 24, 2020 at 4:30pm — 1 Comment

सोच का सफ़र (लघुकथा )

जब मैं कल रात ड्यूटी से घर आई , तो महाभारत घर में पहले से ही हमेशा की तरह चल रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि जब घर वालों ने अपनी मर्जी से मेरी शादी की, मेरी राय तक नहीं पूछी गई l क्यूंकि मेरे जैसी जो पहले ही तीस पार कर चुकी होl उन से भला कौन राय लेता l मैं तो बोझ थी, जिसको निपटाना चाहा l जानलेवा बीमारी ने शादी के कुछ महीनों बाद ही उनको मुझसे जब दूर कर दिया। तब मुझे लगा, अब मुझे उस घर में एक अजनबी की तरह नहीं रहना चाहिए, मैं जल्दी से उनका बोझ कम करना चाहा। उनके जाने के बाद, मैं उस घर में अकेले…

Continue

Posted on November 4, 2020 at 9:30pm — 3 Comments

बुआ का घर (लघुकथा )

वाहन मुख्य सड़क से उस गांव की सड़क पर आ गया, जिसे सर्वेक्षण के लिए चुना गया था।सारे राज में सरकार द्वारा लोगों को प्रदान की जाने वाली सरकारी सेवाओं के बारे में सर्वेक्षण किया जा रहा था।

सर्वेक्षण फॉर्म में प्रश्न थे, क्या आपके गाँव में इस फॉर्म पर लिखी गई सेवाएँ उपलब्ध हैं? क्या ये सभी सेवाएं लोगों को मिलती हैं या नहीं, यदि नहीं मिलती , तो आपको क्या लगता है कि इन के क्या कारण हो सकते हैं ?

मैं आधिकारिक दौरे पर पहली बार इस गांव में आया था l

गांव की बाहरी सड़क से होते हुए,हमारा…

Continue

Posted on October 27, 2020 at 5:00pm — 2 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
8 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार। तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें ।सर् के द्वारा बताए गए…"
9 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"उस्ताद -ए - मुहतरम Samar kabeer साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए शुक्रगुज़ार…"
10 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया Richa Yadav जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
12 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
13 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया  Rozina Dighe जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के…"
18 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया Rachna Bhatia जी सादर  अभिवादन  ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए…"
19 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। पुनः उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार । सुधार में कोई त्रुटि…"
33 minutes ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ गए बस दे के अपनी जान का नज़राना हम वो कि गोया कोई शम्मा और ज्यूँ परवाना हम उनको लगता था हुए हैं…"
37 minutes ago
Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार आ.लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी बहुत बहुत शुक्रिया!"
1 hour ago
Manan Kumar singh posted a blog post

जाति गणना

'हम जातीय आधार पर विकास की योजनाएं बनाएंगे।''क्या अमीर -गरीब जाति के आधार पर होते हैं?' बाबा ने…See More
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, इतने मुश्किल क़वाफ़ी अगर चन्द अशआर में भी बहतर तरीक़े से…"
2 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service