For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dharmendra Kumar Yadav
  • Male
  • Maharashtra
  • India
Share
 

Dharmendra Kumar Yadav's Page

Latest Activity

Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।  रचना को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।"
Sep 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आ. भाई धर्मेंन्द्र जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sep 5
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम। आपकी ‘पवन’ शब्द के बारे में टिप्पणी बिल्कुल सही है। अपने मन में मातॄ-भूमि के प्रति उपजे भाव की काव्यात्मक प्रस्तुति में आ रही बाधा को दूर करने हेतु ‘पवन’ के साथ ‘सुहानी’ विशेषण का…"
Aug 31
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब,अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । 'प्राणवायु यह पवन सुहानी' इस पंक्ति में 'पवन' शब्द पुल्लिंग है, देखियेगा ।"
Aug 31
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

सूरज किरणें देता जग को नदिया देती निर्मल पानी। पालन करती युगों-युगों से धरती ओढ़ चुनरिया धानी।शीतल छाया देता तरुवर प्राणवायु यह पवन सुहानी। फूल चमन को देते खुशबू परम सार संतों की बानी।उऋण हुए गुरु विद्या देकर निर्धन को धन देकर दानी। कैसे सबका मोल चुकाऊँ? दीन अकिंचन मैं अज्ञानी।हे चंडी! दे वर दे मुझको रार अगर दुश्मन ने ठानी। मातृ-भूमि के चरणों पर मैं अर्पण कर दूँ शीश भवानी।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Aug 29
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आ. भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर', सप्रेम नमस्कार। रचना को आपने सराहा इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।"
Aug 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, अभिवादन। इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई ।"
Aug 8
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आदरणीय समर कबीर जी, शुक्रिया। आपके सुझाव पर श्रद्धापूर्वक अमल करने का प्रयास करूँगा।"
Aug 8
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाएँ ।"
Aug 3
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आप जैसे वरिष्ठ शायर द्वारा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
Aug 2
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार यादव जी आदाब, सुंदर गीत लयबद्ध किया है आपने, बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Aug 1
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली, रूप छुपाए लाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।मधुर मिलन की आस सँजोए, वह जब कदम बढ़ाती है। जल थल नभ की नीरवता से, आहट तम की आती है। चार पहर की कठिन डगरिया, पर इठलाती नाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।धवल चाँदनी बिखरी नभ में, खिली यामिनी धरती पर। बसंत बहार कहीं मल्हार, मधुर रागिनी जगती पर। आतुर हो बढ़ती वह जैसे, राधा मुरली बाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।नभ मंडल में बिखरे तारे, चाँद क्षितिज के पार चला। तम निकला झुरमुट से बाहर,…See More
Aug 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आ. भाई धर्मेन्द्र जी, अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 29, 2020
नाथ सोनांचली commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आद0 धर्मेंद्र कुमार यादव जी सादर अभिवादन। बढ़िया बाल कविता लिखी है आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Apr 29, 2020
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आईबड़ी उदासी घर में छाई! सब के सब हैं चुपचाप मगर मैया की छाती भर आई।।जन्म दिया मैया कहलाई पर इक बात समझ ना आई नानी है या कोई मिसरी? माँ से भी मीठी कहलाई।।पहले बिटिया बनकर आई फिर बिटिया को जग में लाई माँ बनती जब, माँ की बिटिया तब जाकर नानी कहलाई।।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Apr 28, 2020
Manoj Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post भूल गया मैं लिखना कविता
"VERY NICE POEM  KEEP IT UP !!!!!!! मन को छू गयी यह कविता  !!!!"
Apr 14, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Thane, Maharashtra
Native Place
Village- Soirai, Post-Baresta Kalan, District- Allahabad
Profession
Auditing
About me
Simple Person

Dharmendra Kumar Yadav's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!

Dharmendra Kumar Yadav's Blog

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

सूरज किरणें देता जग को

नदिया देती निर्मल पानी।

पालन करती युगों-युगों से

धरती ओढ़ चुनरिया धानी।

शीतल छाया देता तरुवर

प्राणवायु यह पवन सुहानी।

फूल चमन को देते खुशबू

परम सार संतों की बानी।

उऋण हुए गुरु विद्या देकर

निर्धन को धन देकर दानी।

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

दीन अकिंचन मैं अज्ञानी।

हे चंडी! दे वर दे मुझको

रार अगर दुश्मन ने ठानी।

मातृ-भूमि के चरणों पर मैं

अर्पण कर दूँ शीश…

Continue

Posted on August 29, 2021 at 2:38pm — 4 Comments

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली,

रूप छुपाए लाजन से।

एक सजनिया चली अकेली,

मिलने अपने साजन से।

मधुर मिलन की आस सँजोए,

वह जब कदम बढ़ाती है।

जल थल नभ की नीरवता से,

आहट तम की आती है।

चार पहर की कठिन डगरिया,

पर इठलाती नाजन से।

एक सजनिया चली अकेली,

मिलने अपने साजन से।

धवल चाँदनी बिखरी नभ में,

खिली यामिनी धरती पर।

बसंत बहार कहीं मल्हार,

मधुर रागिनी जगती पर।

आतुर हो बढ़ती वह जैसे,

राधा मुरली बाजन से।…

Continue

Posted on August 1, 2021 at 2:24pm — 6 Comments

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आई

बड़ी उदासी घर में छाई!
सब के सब हैं चुपचाप मगर
मैया की छाती भर आई।।

जन्म दिया मैया कहलाई
पर इक बात समझ ना आई
नानी है या कोई मिसरी?
माँ से भी मीठी कहलाई।।

पहले बिटिया बनकर आई
फिर बिटिया को जग में लाई
माँ बनती जब, माँ की बिटिया
तब जाकर नानी कहलाई।।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on April 26, 2020 at 3:30pm — 3 Comments

भूल गया मैं लिखना कविता

जब से तुमको, देखा सविता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

भाता मुझको, पैदल चलना।

तुम चाहो, अंबर में उड़ना।

सैर-सपाटा, बँगला-गाड़ी।

फैशन नया, रेशमी साड़ी।

सखियाँ तेरी, इशिता शमिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

तुमको प्यारे, गहने जेवर।

नखरे न्यारे, तीखे तेवर।

होकर विह्वल, संयम खोती।

हँसती पल में, पल में रोती।

आँसू बहते, जैसे सरिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

नारी धर्म, निभाया तूने।

माँ बनकर,…

Continue

Posted on April 14, 2020 at 4:30pm — 1 Comment

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन । चित्रानुरूप बेहतरीन छन्द हुए हैं। चित्र को नये रूप में देखने की…"
24 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन आदरणीय सौरभ पाण्डे जी जल्दीबाजी का परिणाम है ये प्रस्तुति। आपकी मंगलवार तक की छूट की…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सर तुकांतता के संबंध में मैं कुछ बातें सीखना चाहता हूँ। इस पटल पर मौजूद लेख से भी बहुत कुछ सीखने को…"
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"किंतु, आदरणीय, किशती कोई मान्य ळब्द भी है, यह मुझे एक बार आश्वस्त होना होगा. किश्ती का प्रयोग…"
7 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जी, ये फ़ारसी भाषा का है और 'क' पर 'ज़बर' है न कि ज़ेर' और 'श' पर…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय,  किश्ती ही मान्य है, न कि किशती "
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आपकी प्रस्तुति का स्वागत है.  किंतु, रचना में यगण विन्यास की आवश्यकता है,…"
8 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नमस्कार, अशोक कुमार रक्ताले साहब, आपकी सारगर्भित आलोचना हेतु आपका आभारी हूँ किन्तु…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"लेकिन जनाब सहीह शब्द "कशती" है न कि 'किश्ती' फिर ये संयुक्तक्षर कैसे हुआ?…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर साहब, आपकी टिप्पणी आपकी सटीक समझ की परिचायक है.  सादर"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर साहब, संयुक्तक्षरों को लेकर आ० वन्दना जी ने तार्किक तथ्य रखे हैं. छांदसिक रचनाओं में…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"संयुक्ताक्षर का यही मूलभूत नियम है.  हार्दिक धन्यनाद, आदरणीया वन्दना जी"
8 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service