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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर''s Page

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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Usha Awasthi's blog post बलि नित्य चढ़ाई जाती है
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, सम-सामयिक अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। कोरोना पर अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 18
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post रश्मियाँ दिखतीं नहीं - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पेश की है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
Apr 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ अच्छा नग़्मा पेश करने की कोशिश है, मुबारकबाद पेश करता हूँ। आपने (बह्र-ए-मीर) ग़ज़ल के अरकान लिखे हैं, मगर आपके नग़्मा के ये मिसरे बह्र से ख़ारिज हैं- 22 22-  22 22-  22 22 -  22…"
Apr 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"//क्योंकि सड़े हुए या खराब खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण अक्सर खट्टा स्वाद होता है इसी अर्थ का विस्तार आदमी, आँकड़े, दस्तूर इत्यादि के लिए किया गया है// ये ख़याल आपको मुबारक हो।  मैं आपके इस फ़लसफ़े से सहमत नहीं हूँ। सादर। "
Apr 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"//कवि का काम ही पुराने अर्थों को विस्तार देना है वरना सारी कविता हजार साल पुराने लेखन का दोहराव मात्र होकर रह जाएगी// जी, बहतर है। हम भी अपनी शब्दावली को विस्तार दिये देते हैं ज़रा बताएं कि यहाँ आपने खट्टेपन के अर्थ को विस्तार देकर क्या नया अर्थ…"
Apr 14
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मन पर अच्छे दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें।  हालांकि मैं इस विधा का जानकार नहीं हूँ, पर मुझे दूसरे दोहे में लय बाधित लग रही है, हो सकता है मैं ग़लत हूँ। सादर। "
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार। सादर।"
Apr 13
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"वाह आदरणीय जी आज के संदर्भ में बेहतरीन प्रस्तुति । हार्दिक बधाई सर ।"
Apr 13
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"बात एकदम पते की है जनाब अमीर जी बेहद बस टोटके हैं......... ताली थाली नहीं बजाना है बेहद पसंद आया सादर"
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//हँसते धनी हैं देख के खुशियाँ कटी फटी// आपके भावों के अनुसार ये मिसरा फ़िट है। "
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु आभार।  सादर। आपके अनुरोध पर पेश है -  बस टोटके हैं ख़ाली बातें हैं बस ख़याली दीये जलाना,  ताली थाली नहीं बजाना है कोरोना को हराना है... कोरोना को हराना…"
Apr 13
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"कोरोना पर मधुर कोरोना आरती(नग़मा) हुई है सादर प्रणाम आदरणीय अमीर सर हिंदुस्तान के परिपेक्ष्य में इसमें इक शैर की कमी खल रही है " कभी थाली बजाना है    कभी ताली बजाना है" सादर"
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"बृजेश जी, अब दोनों शे'र दुरुस्त हो गये हैं। बधाई हो। "
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेंद्र कुमार सिंह जी आदाब, अपने चिर परिचित अंदाज़ में और बेबाक़ी के साथ उम्दा ग़ज़ल का प्रयास है बधाई स्वीकार करें, मगर रदीफ़ "खट्टे हैं'' के कारण कई मिसरों का वाक्य विन्यास सही नहीं है। तीसरा और छठा शे'र अच्छे हैं। आम…"
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

कोरोना को हराना है।

हमने तो अब  ये ठाना हैकोरोना   को   हराना  हैअब  साथ  न  छूटेगा  ये वादा   हमें   निभाना   हैकोरोना   को   हराना  है... कोरोना को हराना है। जाना  हो   जब   ज़रूरी सबसे  दो  गज़  की  दूरी  कर   हाथ    सेनिटाइज़्ड और मास्क भी लगाना है कोरोना   को    हराना  है... कोरोना को हराना है। बाहर  से  जब भी आओअच्छी     तरह    नहाओज्वर, छींक हो या  खाँसीडाॅक्टर को ही दिखाना है कोरोना   को    हराना  है... कोरोना को हराना है।  लोगों  से  मिलना-जुलना अब हो  न  बस  टहलना कारण    बिना    न   घूमें टोली   नहीं   …See More
Apr 12

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

कोरोना को हराना है।

हमने तो अब  ये ठाना है

कोरोना   को   हराना  है

अब  साथ  न  छूटेगा  ये 

वादा   हमें   निभाना   है

कोरोना   को   हराना  है... कोरोना को हराना है। 

जाना  हो   जब   ज़रूरी 

सबसे  दो  गज़  की  दूरी  

कर   हाथ    सेनिटाइज़्ड 

और मास्क भी लगाना है 

कोरोना   को    हराना  है... कोरोना को हराना है। 

बाहर  से  जब भी आओ

अच्छी     तरह    नहाओ

ज्वर, छींक हो या  खाँसी

डाॅक्टर को ही दिखाना है 

कोरोना   को   …

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Posted on April 12, 2021 at 7:02pm — 6 Comments

ग़ज़ल (किसी की याद में...)

1212 - 1122 - 1212 - (112 / 22) 

किसी की याद में ख़ुद को भुला के देखते हैं

निशान ज़ख्मों  के हम  मुस्कुरा के देखते हैं 

 

निकल तो आए हैं तूफ़ाँ की ज़द से दूर बहुत 

भँवर हैं कितने ही  जो सर उठा के देखते हैं 

चले भी आओ कि अब  इंतज़ार  होता नहीं 

कि अब ये रस्ते हमें  मुँह चिढ़ा के  देखते हैं  

ये ज़िन्दगी भी फ़ना कर दी हमने जिनके लिए 

वही  तो  हैं  जो   हमें  आज़मा के  देखते  हैं 

 

तेरी जफ़ा …

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Posted on April 3, 2021 at 6:11pm — 18 Comments

कोशिश करो ! आगे बढ़ो...

कोशिश करो   हिम्मत करो 

आगे    बढ़ो    बढ़ते    रहो   आगे बढ़ो... आगे बढ़ो... 

गिरने  के  डर  से मत रुको 

गिर जाओ तो फिर से उठो   आगे बढ़ो... आगे बढ़ो... 

मंज़िल तुम्हें  मिल  जाएगी

क़िस्मत भी ये खुल जाएगी  

मंज़िल के मिलने तक चलो

चलते    रहो    चलते   रहो   आगे बढ़ो... आगे बढ़ो... 

रुकने से कुछ हासिल नहीं

रुक जाए जो कामिल नहीं   

उठते  क़दम  पीछे  न  लो 

पूरा   करो   जो …

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Posted on April 1, 2021 at 8:26am — 2 Comments

ग़ज़ल (महबूब ज़िन्दगी)

2212 - 1212 -  2212 - 12 

.

मुश्किल सहीह ये फिर भी है महबूब ज़िन्दगी

रब  का हसीन  तुहफ़ा  है क्या  ख़ूब ज़िन्दगी

.

आजिज़  हैं  ज़िन्दगी  से जो वो भी  मुरीद हैं

तालिब  सभी  हैं  इसके  है  मतलूब ज़िन्दगी

.

हर  लम्हा  शादमाँ  है  तेरे  दम  से  दिल मेरा

जब  से  हुई  है  तुझसे  ये   मन्सूब   ज़िन्दगी

.

जिसने  नज़र  उठा  के  भी  देखा  नहीं  मुझे 

उस  पर  हुई   है   देखिए   मरग़ूब   ज़िन्दगी

.

लोगों के दिल…

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Posted on March 31, 2021 at 9:22am — 4 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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