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Chetan Prakash's Discussions (330)

Discussions Replied To (63) Replies Latest Activity

"आ. अशोक कुमार  रक्ताले जी, आपकी समीक्षा :, खेद  का विषय  है , वस्तुत: भ्रामक है ! का…"

Chetan Prakash replied Jun 19 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134

32 Jun 19
Reply by Dayaram Methani

"आ.दया राम मेठानी जी, कामरूप छंद पर मेरी प्रस्तुति को आपकी मान्यता प्राप्त हुई, आप का…"

Chetan Prakash replied Jun 19 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134

32 Jun 19
Reply by Dayaram Methani

"आराम होगा क्या, अब उन्हें, बैठ..बाइक सात। मान अपना खुद , घटाते हैं, जो मनुज औकात…"

Chetan Prakash replied Jun 18 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134

32 Jun 19
Reply by Dayaram Methani

"अच्छे छंद लिखे हैं, किंतु " चैत्र और बैशाख महीना" सत्तरह मात्राएं हैं !"

Chetan Prakash replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"सुनसान है  सकल  वातायन, गर्म - गर्म लू बहती ।  खून सोखती काया का वो,  सांस धोंकनी चल…"

Chetan Prakash replied Apr 23 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय, सौरभ साहब प्रणाम ! महोदय, किंचित उदार मन से संवेदना रखते हुए विचार विमर्श, ख…"

Chetan Prakash replied Mar 20 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 131

50 Mar 21
Reply by Saurabh Pandey

"रहे  बजाते  बीन   ज्यौं, विज्ञ मित्र  सम भैंस।  हाथ लगा कुछ भी नहीं, देश  हुआ  परदेस…"

Chetan Prakash replied Mar 19 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 131

50 Mar 21
Reply by Saurabh Pandey

"आ.अशोक रक्ताले साहब, आप स्वयं जानते हैं कि तं, दो मात्राओं पर पढ़ा जायेगा और, त्र (2…"

Chetan Prakash replied Feb 20 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 130

91 Feb 21
Reply by Saurabh Pandey

" आ.अखिलेश कृष्ण जी, आप  बिन्दुवार  विस्तृत  चर्चा  कीजिए,  मेरे  कहने का आशय  केवल …"

Chetan Prakash replied Feb 20 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 130

91 Feb 21
Reply by Saurabh Pandey

"आ. अमीर साहब, दूसरों ं की आंखों से नहीं देखा जाना कभी व्यवहार्य नहीं होता! उस खुदा ई…"

Chetan Prakash replied Feb 20 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 130

91 Feb 21
Reply by Saurabh Pandey

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दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर…See More
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न बुझने वाली के सन्दर्भ में ही लिया गया है। हिन्दी में इसका प्रयोग ऐसे भी…"
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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। भूलवश अरकान गलत…"
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22 hours ago

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