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धार्मिक साहित्य Discussions (152)

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मकर-संक्रान्ति पर विशेष

  भारत वस्तुतः गाँवों का देश है. यहाँ के गाँव प्रकृति और प्राकृतिक परिवर्त्तनों से अधिक प्रभावित होते हैं, बनिस्पत अन्य भौतिक कारणों से. च…

Started by Saurabh PandeyLatest Reply

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रास छंद "कृष्णावतार"

(रास छंद) हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ। हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके त…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

2 Jun 3
Reply by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

#लावणी_छन्द, निधिवन

लता,फूल,रज के हर कण में,नभ से झाँक रहे घन में,राधे-कृष्णा की छवि दिखती,वृन्दावन के निधिवन में। प्रेम अलौकिक व्याप्त पवन में,प्रणय गीत से ब…

Started by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

2 May 26
Reply by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

#सरसी_छन्द, उपहार

स्वार्थहीन अनुराग सदा ही,देते हो भगवान।निज सुख-सुविधा के सब साधन,दिया सदा ही मान। अपनी सूझ-बूझ से समझी,प्रतिपल मेरी चाह,इस कठोर जीवन की तु…

Started by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

2 May 26
Reply by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

रक्ता छंद "शारदा वंदन"

(रक्ता छंद) ब्रह्म लोक वासिनी।दिव्य आभ भासिनी।।वेद वीण धारिणी।हंस पे विहारिणी।। शुभ्र वस्त्र आवृता।पद्म पे विराजिता।।दीप्त माँ सरस्वती।नि…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

2 May 23
Reply by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

मकरन्द छंद "कन्हैया वंदना"

(मकरन्द छंद) किशन कन्हैया, ब्रज रखवैया,     भव-भय दुख हर, घट घट वासी।ब्रज वनचारी, गउ हितकारी,     अजर अमर अज, सत अविनासी।।अतिसय मैला, अघ ज…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

0 May 14

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"

चामर छन्द "मुरलीधर छवि" गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य गीत गौ रँभा रँभा कहे।कोकिला मयूर कीर…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

0 May 9

लावणी छन्द (ईश गरिमा)

लावणी छन्द (ईश गरिमा) तेरी ईश सृष्टि की महिमा, अद्भुत बड़ी निराली है;कहीं शीत है कहीं ग्रीष्म है, या बसन्त की लाली है।जग के जड़ चेतन जितने भ…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

1 May 3
Reply by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

पञ्चचामर छन्द, श्री हनुमान वंदना

उपासना करें सभी,महाबली कपीश की,विराट दिव्य रूप की,दयानिधान ईश की।कराल काल जाल से, प्रभो उबार लीजिये,अपार भक्ति दान की,कृपा सदैव कीजिये। प्…

Started by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

2 May 3
Reply by शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"

मरहठा छंद "कृष्ण लीलामृत"

मरहठा छंद "कृष्ण लीलामृत" धरती जब व्याकुल, हरि भी आकुल, हो कर लें अवतार।कर कृपा भक्त पर, दुख जग के हर, दूर करें भू भार।।द्वापर युग में जब,…

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

0 Apr 26

भक्तिरस के दोहे :

भक्तिरस के दोहे : देना हो तो दीजिए, प्रभु ऐसा वरदान। मुख से निकले राम जब, प्राण करें प्रस्थान।1। पाना हो जो राम तो , बन जाओ हनुमान। अंतर्…

Started by Sushil Sarna

2 Aug 13, 2020
Reply by Sushil Sarna

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Chetan Prakash and Manan Kumar singh are now friends
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Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली, रूप छुपाए लाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।मधुर मिलन की आस…See More
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ग़ज़ल-है कहाँ

2122 2122 2122 2121उनकी आँखों में उतर कर ख़ुद को देखा है कहाँहक़ अभी तक उनके दिल पर इतना अपना है…See More
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Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"ओ के, जनाब, मुसाफ़िर, आपकी ग़ज़ल आपकी नज़र, आदाब  ! "
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"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल नजर से चूक जाने के कारण उपस्थिति विलम्ब से हुई है। गजल का हर शेर…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति और स्नेह से मन हर्षित है । हार्दिक धन्यवाद ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । मतले में दो अलग अलग व्यक्तियों को सम्बोधित किया गया है एक शीशे वाले…"
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Rachna Bhatia commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अनीस अरमान जी नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल हुई।रदीफ़ पर विशेष बधाई स्वीकार करें।"
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Rachna Bhatia commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई नमस्कार। अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई।"
11 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदाब,, आदरणीय भाई,  लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर., शुभ प्रभात  ! मतले में रब्त न होने की वज़ह,…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन । लम्बे अंतराल के बाद आपकी उपस्थिति से हर्षित हूँ। आपकी व भाई समर जी…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसके हिस्से में क्यों रास्ता कम है- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर पुनः उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार। आपकी समझाइस समझ गया…"
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