For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वीनस केसरी's Comments

Comment Wall (52 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:10pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 1:34pm on April 28, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय वीनस जी आपके द्वारा मेरी मित्रता के आग्रह को स्वीकार कर मुझ पर जो अनुकम्पा की उसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी हूँ-कृपया अपना स्नेह बनाये रखें। धन्यवाद

सुशील सरना

At 8:01am on March 3, 2014, मनोज कुमार सिंह 'मयंक' said…

आदरणीय वीनस जी..जन्मदिन की विलम्बित अशेष शुभकामनाएं..

At 5:33am on March 3, 2014, Abhinav Arun said…
आदरणीय श्री वीनस जी जन्मदिन की विलम्ब से शुभकामनायें स्वीकारें ..आप श्रेष्ठ साहित्यकार तो है ही साथ ही साथ साहित्य के प्रसार -नवलेखन के प्रोत्साहन में आपका अंजुमन प्रकाशन के ज़रिये कार्य तारीख़ी है बहुत बहुत बधाई और शुभेच्छाएं !!
At 9:01pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 11:47pm on December 25, 2013, Suyash Sahu said…

प्रिय भाई केसरी जी,

आप का तो नाम ही English में है, ऐसा क्यों ???

Not a complaint just a Curiosity.

At 9:13pm on December 25, 2013, Suyash Sahu said…

Priya Venus Ji,

Aap ke jawaab ke liye bhut - bahut Shukriya.

Saadar...

At 10:45pm on December 24, 2013, Suyash Sahu said…

Dear Venus,

I had posted some absolutely "Self Composed" Ghazals on the last Sunday (21 Dec.2013) but those were immediately deleted by the Admin. Team and Sri Arun"Anant" and Sri Saurabh Pandey instructed me not to post them.

Later I said "Sorry" for posting them.

Apart from it, I started a Blog with the Title " Khamoshiyon Ke Khutoot" and posted Two(2)self composed Ghazals under the said Blog Title but they were possibly also not approved by the Admin Team.

Kindly let me know the fundamental reasons of this entire unfortunate episode.

Yours truly,

(SUYASH SAHU}

At 3:37pm on September 5, 2013, rajveer singh chouhan said…

श्रीमान केसरी जी सादर प्रणाम मे नया जुडा हु एवम आपसे गज़ल के विषय मे बात करना चाहता हु और मेरा इस तरीके से बात करना सही है या नही, पता नही और यह शायद मेरा उतावलापन है जो बिना कुछ सीखे आपको मेरी गज़ल की अशुधियो के बारे मे जानने की आपसे बडी उत्सुकता हे आगे जेसा आप दिशा निर्देशित करे, फिलहाल एक गज़ल पोस्ट कर रहा हु और ये रचना मौलिक तो है पर अप्रकाशित इसलिये नही की मेने इसे फेसबूक के वाल पर पोस्ट कर दिया था क्षमा चाहुंगा गर मेरे वार्तालाप मे कोइ त्रुटि हो या मेने कुछ गलत किया हो शुक्रिया ।

गज़ल

शब्दो से खेलने का नया हूनर सीख रहा हूँ /
मै फिर से आज एक गज़ल लिख रहा हूँ //

तु अपनी आबादियों की नुमाईँश कर बेशक /
मै अपनी बर्बादियों की फसल लिख रहा हूँ //

खुद की तबाही से जी भरा नही मेरा अब तक /
इस जमाने मे एक नयी नसल लिख रहा हूँ //

अब कोई उम्मीद बाकी रही नही फिर भी /
क्यों तेरी जिन्दगी मे इक नया दखल लिख रहा हूँ//

खुद की ख्वाहिश रेत के घरोंदें से ज्यादा नही /
पर तेरे लिये इक जमाने से ताजमहल लिख रहा हूँ // 

वो जिन्दगी बीता रहा हे  आज मे /
और मै उसका दिया हुआ कल लिख रहा हूँ //

राजवीर 

At 2:27am on August 25, 2013, vijay nikore said…

 

आपने मित्रता का हाथ बढ़ाया, यह मेरा सौभाग्य है। धन्यवाद, आदरणीय।

सादर,

विजय निकोर

At 3:29pm on July 17, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल ..पहला और तीसरा शेर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र रहे हैं ..

बीनस जी आपको कास्ट दे रहा हूँ दरअसल इस मशहूर गजल में मात्राएँ गिनते समय फर्क आ रहा है 

"ना मैं तुम से कोई उम्मीद रखू दिलनवाज़ी की न तुम मेरी तरफ देखो, ग़लत अंदाज़ नज़रों से न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों से
ना जाहीर हो तुम्हारी कश्मकश का राज
 नजरों से

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती हैं पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुसवाईयाँ हैं मेरे माझी की
तुम्हारे साथ अभी गुज़री हुई रातों के साये हैं ...आप मेरी मदद इस तरह करिये ताकी बहर निर्धारण की प्रक्रिया मैं भली भाति समझ सकूं ...

At 12:40am on July 4, 2013, Sushil Thakur said…

janab kesri sab. typing error ke chalte :khayal: ki jagal 'mizaj' aa gaya hai. sorry.

At 7:46am on June 12, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय वीनस केसरी जी आपका आभार । डी पी माथुर

At 11:25am on March 1, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

चिरायु हो सखे, कि, कुशलता और स्वस्ति व्यापे..
विद्या, विवेक, विधा, कौशल सुलभ हों सर्व सिद्धियों संग..  
कांति, शांति, ऐश्वर्य सघन हों, साहित्य-सोच भावावरण में.. .  
अक्षय रहो.. प्रखर रहो.. मुखर रहो.. अक्षर रहो.. .  

At 11:55pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:41pm on November 12, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

वीनस भाई नमस्कार! माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई.

At 1:36pm on November 5, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय वीनस जी, 

सादर  अभिवादन 

गजल विधा की विस्त्रत जानकारी, उपयोगी लगी. इस विधा के बारे में अनजान हूँ. सीखने  की प्रेरणा मिली. 

आपका सहयोग भी लूँगा. आभार. 

At 1:19pm on November 5, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय वीनस जी, आदर 

माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने हेतु हार्दिक बधाई.

At 2:20pm on November 2, 2012, Abhinav Arun said…
वाह हार्दिक बधाई आदरणीय श्री वीनस जी !! हमें आप पर गर्व है | आपकी सक्रियता ओ बी ओ को दिन दूनी - चौगुनी उन्नति पथ पर ले जाए  आप साहित्यिक जगत का शिखर चूमें !!! हार्दिक शुभकामनाएं !!
At 12:37pm on November 2, 2012, संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' said…

बधाईयां! महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर! साभार, :-) :-D

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल

2×16इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.एक समय…See More
59 minutes ago
vijay nikore posted blog posts
1 hour ago
SALIM RAZA REWA commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"भाई बधाई स्वविकरण मतला मज़ा नहीं दे ,"
2 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब,नमस्कार सर मैंने इस शब्द को हिरण के बच्चे के अर्थ में प्रयोग किया है बाकी आप…"
11 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"मोहतरम समर साहब, आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया, अगर सिर्फ़ उसकी हो तो 22 है मगर ज़रूरत के…"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-कुछ बन्द गीत के हैं कुछ शे'र हैं ग़ज़ल के-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी..."
13 hours ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post विजयदशमी पर कुछ दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post विजयदशमी पर कुछ दोहे :
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रजजी सृजन में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रिक्तता :.....
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रजजी सृजन में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post रिक्तता :.....
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।"
15 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service