पतंगों को यूँ ढील मत देना.
Comment
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 24, 2012 at 10:14pm खुद को जज्बातों का वकील मत देना. तुम्हारे घर भी इज्जत का सामान है! bahut khoob soorat nasihat saaf saaf, adarrniya mahoday badhai.
Comment by CHOTU SINGH on April 24, 2012 at 7:13pm वाह - वाह
आदरणीय अविनाश जी
हर शब्द में अपनी ही बात है
आपको बधाई
Comment by AVINASH S BAGDE on April 24, 2012 at 3:58pm Abhinav ji,Mridu ji,Vandana ji,Satish sir,Sundeep ji,Rajesh kumari mam.,aadarniy Vinas ji,aur Rakesh ji.....sabhi sudhijano ka hriday se aabhar....
Comment by Abhinav Arun on April 24, 2012 at 12:49pm हर शेर में एक नया ख़याल उभरा है और मजबूती के साथ हार्दिक बधाई अविनाश जी ||
Comment by vandana gupta on April 24, 2012 at 12:09pm बहुत खूब अविनाश जी

दुनिया है ये ताड़ बना सकती है
Comment by CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 23, 2012 at 10:39pm
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 23, 2012 at 8:37pm बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत की आपने|

vaah avinaash ji bahut umda bhaav,achhi nasihat deti hui ghazal .badhaai
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