For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे आसमान का चाँद ...

आसमान का चाँद :

शीत रैन की
धवल चांदनी में
बैचैन उदास मन
बैठ जाता है उठकर
करने कुछ बात
आसमान के चाँद से

मैं अकेली
छत की मुंडेर पर
उसकी यादों में
स्वयं को आत्मसात कर
मांगती हूँ अपना प्यार
आसमान के चाँद से

केसरिया चांदनी में
उसका प्यार
लेकर आया था
मेरे पास
मौन चाहतें
उदास प्यास
अदृश्य समर्पण
कहती रही
मौन व्यथा
देर तक

आसमान के चाँद से

कौमुदी रैन में
तकिये पर बिखरी
उसकी गंध को
सहेजते सहेजते
मैं कब सो गयी
कुछ पता न चला
निश्चिंत हो गयी
श्वासों में जीवित
कस्तूरी गंध से सुवासित
सपनों में
स्वयं को समाहित कर
दूर होकर भी
मिल गया
मुझे उपहार
मेरे चाँद का
पलकों की दहलीज़ पर

आसमान के चाँद से

हो गया
मेरा चाँद
मेरे आसमान का चाँद

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 106

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 23, 2019 at 7:33pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on January 21, 2019 at 3:53pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब .... सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। आपके द्वारा त्रुटि बिलकुल सही है। पोस्ट करने से पहले मैं एडिट करने भूल गया। अभी संशोधित कर पुनः पोस्ट करता हूँ। इस हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on January 19, 2019 at 11:24pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'आसमान का चाँद से'--"आसमान के चाँद से"

ये त्रुटि दो जगह है,देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"द्वितीय प्रस्तुति तोमर छंद हर नगर है बदहाल।अब जरा देख न भाल।।है व्यवस्था लाचार।दिख रही चुप…"
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज…"
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"बहुमूल्य इस्लाह के लिए हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत…"
1 hour ago
Gajendra Dwivedi "Girish" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ही मनमोहक"
1 hour ago
Gajendra Dwivedi "Girish" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"लाजवाब रचना"
1 hour ago
Gajendra Dwivedi "Girish" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर"
1 hour ago
Gajendra Dwivedi "Girish" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 शक्ति छन्द पर एक…"
1 hour ago
Gajendra Dwivedi "Girish" joined Admin's group
Thumbnail

चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद 122 122 122 12अगर प्यार निच्छल किसी को मिले ।असंभव व संभव मिले आ गले ।।यहाँ पशु मनुज को…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"क़ाफ़िया का बहुत साधारण नियम है कि हर क़ाफ़िया के पहले हर्फ़-ए-रवी होना लाज़िमी है,हर्फ़-ए-रवी कहते हैं…"
3 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"आभार आदरणीय।"
3 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post व्यस्तता- लघुकथा
"सीधे और साधारण ढंग से आपने बहुत ही गहरी बात कही है आदरणीय..."
4 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service