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आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति:-(छंदमुक्त कविता)

प्रेम का स्वरूप क्या है?
आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति ?
असंभव सा है, इस प्रश्न का-
निष्कर्षतः एक समुचित उत्तर। 

प्रकृति और पुरुष ब्रह्म,
युग प्रेम के आदि प्रवर्तक,
आकाश सा उन्मुक्त-
स्वछंद पवन सा-
धरा से भी गंभीर उनका प्यार,
अभिव्यक्ति की अभिव्यंजना से दूर-
एकात्म में ही लीन दोनों तत्व ,
हो पृथक जिनका नहीं है अर्थ कोई,
चिर-मौन में हैं साधते वे सत्व ,
इसलिए मन को कभी आभास होता,
स्वरबद्ध करने की जरूरत है नहीं-
अपने हृदय के भाव के उद्गार को,
क्यों भला अत्यावश्यक शब्द होंगे-
किसी भी सच्चे समर्पित प्यार को ?

है मगर प्रतिदर्श दूजा और भी,
समेकित अर्चना और प्यार का प्रतिरूप,
भक्ति की पराकाष्ठा पर पहुंचा हुआ-
भक्त का व्याकुल परम् -प्रेमी स्वरूप,
है ज्ञात उसको, भक्तवत्सल श्रीहरि-
अंतर्मन के भाव को पहचानते हैं,
समर्पित कौन है, श्रीचरण के धाम को-
बिन कहे अनयास ही सब जानते हैं। 
परन्तु हो बेसुध स्वयं को भूलकर,
आर्त स्वर में बार बार गुहार करता,
जताता प्यार कभी,कभी मनुहार करता,
उसके प्रेम में भी कोई छल नहीं,
दिखावा भी नहीं है आर्तनाद उसका,
ना कोई ढोंग है उसका समर्पण,
ना किंचित झूठ है आह्लाद उसका,
वह तो तरिका है बस,
अपने ईश, अपने प्रेम को रिझाने का।
अतः कभी-कभी लगता है,
प्यार शब्दों का आश्रित नहीं लेकिन,
प्यार के रसभरे अक्षरों में,
हृदय को आह्लादित करने की क्षमता-
अवश्य होती है।

तो आत्मकेंद्रण या अभिव्यक्ति,
दोनो ही स्वरूप हैं प्रेम का,
या यूँ कहें-
प्रेम को स्वरूप की आवश्यकता ही नहीं,
मौन हो या उच्चारित उल्लास,
प्रेम में बस प्रेम होना चाहिए।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by V.M.''vrishty'' on October 10, 2018 at 12:59pm

मित्र मोहित जी! आत्मकेन्द्रण या अभिव्यक्ति,,,इस माध्यम से प्रेम की गहराइयों को बहुत ही सुंदर पंक्तियों में पिरोया है आपने। बहुत बहुत बधाई!

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 9, 2018 at 11:13am

आदरणीय विजय सर,
तहे दिल से आभार

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 9, 2018 at 11:12am

आदरणीय आरिफ जी आदाब,
आपके स्नेह का अत्यंत शुक्रिया

Comment by vijay nikore on August 8, 2018 at 1:02pm

रचना अच्छी लगी। हार्दिक बधाई, मोहित जी।

Comment by Mohammed Arif on August 8, 2018 at 12:48pm

प्रिय मोहित जी आदाब,

                  बेहतरीन अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई स्वीकार करेंं ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 8, 2018 at 11:57am

आदरणीय समर सर, हौसला बढ़ाने का हृदय से शुक्रिया

Comment by Samar kabeer on August 6, 2018 at 2:18pm

जनाब मोहित मिश्रा जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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