For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...

तुम्हारे इश्क ने मुझको,
क्या क्या बना दिया...
कभी आशिक,कभी पागल-
कभी शायर बना दिया।।

अब इतने नाम हैं मेरे,
कि मैं खुद भूल जाता हूँ...
कोई कुछ भी पुकारे मुझको-
मैं बस मुस्कुराता हूँ।।

मेरी माँ कहती है मुझसे,
दिवाना हो गया है तू....
मगर इक तू ही न समझे-
कि मैं तेरा दिवाना हूँ।।

अगर तुझको भी है चाहत,
तो क्यों इनकार करती है?
तेरी आँखों से लगता है-
कि तू भी प्यार करती है।।

खुदा की है रज़ा इसमें,
कि जो तुझसे मिला दिया...
तुम्हारे इश्क ने मुझको,
क्या क्या बना दिया....

कभी आशिक, कभी पागल-
कभी शायर बना दिया।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 187

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rakshita Singh on February 20, 2018 at 6:06am

आदरणीय नादिर जी, बहुत बहुत आभार।

आपके द्वारा बताई त्रुटी को मैं शीघ्र ही सुधार लेती हूँ।

Comment by नादिर ख़ान on February 19, 2018 at 4:52pm

अगर तुझको भी है चाँहत,
तो क्यों इनकार करती है?
तेरी आँखों से लगता है-
कि तू भी प्यार करती है।।   चाँहत को चाहत कर लीजिये .....

सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकारें  ...

Comment by Rakshita Singh on February 19, 2018 at 1:56pm

आदरणीय नीरज जी, बहुत बहुत आभार।

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 19, 2018 at 9:46am

बहुत ही उम्दा संवेदनाएं उम्दा रचना आदरणीया रक्षिता जी

Comment by Rakshita Singh on February 18, 2018 at 11:29pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी बहुत बहुत धन्यबाद।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 11:26pm

रुमानियत को समेटे हुए सुन्दर रचना...

Comment by Rakshita Singh on February 18, 2018 at 10:43pm

आदरणीय आरिफ जी, बहुत बहुत आभार।

लेखन सार्थक हुआ।

Comment by Mohammed Arif on February 18, 2018 at 9:39pm

आदरणीया रक्षिता सिंह जी आदाब,

                             इश्क़ के रंग में शिद्दत से डूबी बहुत ही प्यारी रचना । सच है इश्क़ ही इस संसार में शाश्वत है वह चाहे जो करवा सकता । शाहजहाँ से ताज महल बनवा सकता है तो भगवत माँझी से पहाड़ भी खुदवाकर रास्ता बनवा सकता है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
5 minutes ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'होंगी ही उससे…"
6 minutes ago
Hariom Shrivastava posted blog posts
20 minutes ago
vishva prakash mehra is now a member of Open Books Online
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
18 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,इस प्रयास के लिए बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रहबरी तीरगी की रहे…"
yesterday
SALIM RAZA REWA posted photos
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service