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तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा

 2122 1212 22 

तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता
दिल ये तुझपे फ़िदा नहीं होता   
-
इश्क़ तुमसे किया नहीं होता 
ज़िन्दगी में मज़ा नहीं होता
-
ज़िन्दगी तो  संवर गयी  होती 
ग़र वो मुझसे जुदा नहीं होता
-
उसकी चाहत ने कर दिया पागल 
प्यार  इतना  किया  नहीं  होता 
-
सबको दुनिया बुरा बनाती है
कोई इंसाँ बुरा नही होता
-
चोट खाएँ भी मुस्कुराएँ भी
अब रज़ा हौसला नहीं होता.
_____________________
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Kalipad Prasad Mandal 17 hours ago

आ सलिन रज़ा जी  | ग़ज़ल बहुत उम्दा बनी  है , मुबारक बाद कुबूल करें |

Comment by Ajay Tiwari yesterday

आदरणीय सलीम साहब, आपकी बात ठीक है लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए की मिस्ररा भी ठीक हो और शेरियत भी बनी रहे. सादर   

Comment by SALIM RAZA REWA on Monday
आ. तिवारी जी,
आपकी मशविरे के लिए शुक्रिया लेकिन,
मिसरा सीधा करने के चक्कर में शेरियत,
मर जाए तो शेर कहने का फायदा क्या.. बहरहाल कुछ और सोचेंगे..
Comment by Ajay Tiwari on Monday

आदरणीय सलीम साहब,

तीसरे शेर को निकाल देने से ग़ज़ल बेहतर हो गयी है. दूसरे शेर में 'तो' कम होने से मेरी मुराद ये थी कि दोनों मिसरों को जोड़ने वाला संयोजक इनमे नहीं है. दोनों मिसरों को अगर सरल वाक्य के रूप में लिखें तो यह बात स्पष्ट हो जायेगी : 

'तुमसे इश्क़ नहीं किया होता तो ज़िन्दगी में मज़ा नहीं होता'. 

इसी मजमून को एक दूसरे सरल वाक्य में लिखते हैं :

'जिंदगी में मजा नहीं होता अगर आपका प्यार नहीं होता' 

अब इसे शेर में बदलेंगे तो कुछ यूं होगा :

प्यार अगर आपका नहीं होता >दर्द गर आपका नहीं होता  

जिंदगी में मजा नहीं होता

यह एक फ़ौरी सुझाव है ऊला के लिए इससे बेहतर मिसरे आप खुद सोच सकते हैं. 

सादर

Comment by SALIM RAZA REWA on Monday
बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on Monday

अच्छा है ।

Comment by SALIM RAZA REWA on Monday
आली जनाब समर साहब आपकी शुक्रिया नवाज़िश करम..
एक अभी शेर हुआ है अगर किसी लायक़ हो...
मेरे घर में ख़ुशी नहीं आती
तू अगर हम-नवा नहीं होता
Comment by Samar kabeer on Monday

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,'मोमिन' की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।कि

Comment by SALIM RAZA REWA on Monday
भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी,
आपकी की बधाई के लिए शुक्रिया
Comment by SALIM RAZA REWA on Monday
भाई नीलेश जी आपकी मुहब्बत और
टंकण गलती अवगत कराने के लिए बहुत शुक्रिया,

कृपया ध्यान दे...

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