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माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा:- मोहित मुक्त

आज निकला हूँ उड़ने की ख़्वाहिश लिये ,
पर दुनिया के आसमान में कहाँ तक जाऊंगा ,
माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

दूर आँचल से तेरे तलाशता हूँ जो ,
कुछ साथी ,कुछ सपने,कुछ अपने ,
हो सकता है मिल जाये मंज़िल मेरी ,
पर स्नेहमयी बातों का सुख कहाँ पाउँगा ,
माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

मुझे पता है समेट लोगी अंतर में अपने ,
भूल शैतानियाँ मेरी, भूल नादानियाँ मेरी ,
जीवन के हर पल हर गलती पर क्षमादान ,
भला तेरे हृदय को छोड़ कहाँ पाउँगा ,
माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

कुछ धुंधलका सा याद है मुझको ,
मेरा रोना रातभर , तेरा जगना रातभर ,
तू सलामत रहे मैं रहूं ना रहूं ,
ऐसा विश्वास रिश्तों में कहाँ पाउँगा ,
माँ मै तेरे दामन में फिर लौट आऊंगा।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Mohit mishra (mukt) on August 30, 2017 at 10:53am

आदरणीय जी आपके स्नेहाशीष के लिए आभार। आपका सुझाव उत्तम है 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 23, 2017 at 9:09pm

आदरनीय , भाव पूर्ण रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।  मेरे खयाल से -- समेट लोगी अंतस में अपने ,  कहना चाहिये थी ,  समेट लोगी अंतर में अपने ,   -- की जगह । देख लीजियेगा ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 21, 2017 at 11:14pm
आदरणीय समर सर रचना आपको पसंद आयी तो मन गदगद हो गया। आपकी बात पर अवश्य अमल करूँगा। सादर
Comment by Samar kabeer on August 21, 2017 at 10:41pm
जनाब मोहित जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।
पहली पंक्ति में 'ख़्वाइश'ग़लत शब्द है,सही शब्द है "ख़्वाहिश",दुरुस्त कर लें ।
Comment by Mohit mishra (mukt) on August 21, 2017 at 10:18am
आपके स्नेहपुर्ण उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया
Comment by vijay nikore on August 21, 2017 at 9:59am

बहुत ही सुन्दर भाव। रचना अच्छी लगी। बधाई।

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 20, 2017 at 9:49pm

आदरणीय  laxman dhami  जी हौसला अफ़्जाई के लिए हृदय तल से शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 20, 2017 at 8:57pm
माँ को समर्पित भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई ।
Comment by Mohit mishra (mukt) on August 20, 2017 at 3:55pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी रचना पर उत्साह वर्धन के लिए हृदय से धन्यवाद 

Comment by Mohit mishra (mukt) on August 20, 2017 at 3:53pm

आदरणीया सुनंदा झा जी , कविता पर उपस्थिति और उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत आभार 

कृपया ध्यान दे...

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