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अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त

अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

लौट के आज न बहो में , तड़पती है क्यूँ|
अब रूठ के मुझसे ,सताती है क्यूँ |
पहले मेरे उदासी पर रो देती थी तू,
आज मुह फेर के मुझको रुलाती है क्यूँ |
आज भी तुझे खोने से डरता हूं मैं |
अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

मेरी शैतानी भरी बातों पर मुझको डाँटेगा कौन,
अपना सुख दुःख मेरे साथ बांटेगा कौन,
गम के झंझावातो में किसके पास जाऊंगा मैं,
ख़ुशी में भर बांहो में किसे उठाऊंगा मैं,
मैं फिर वो भोली सी गुड़िया कहाँ से लाऊंगा,
वो मासूमियत भरा चेहरा फिर कहाँ पाउँगा ,
रात को २ बजे फोन पर तंग करेगा कौन,
हर बात पे मुस्कुरा कर पागल कहेगा कौन,
सोच कर इन बातों को रो पड़ता हूं मैं |
अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

इतने अपनापन से मुझपर हक़ जतायेगा कौन,
मेरे लिए ज्येठ में छत पर आएगा कौन ,
बड़ी आँखों में आंसू भर कौन डराएगा अब,
मेरी बेकार बातों पर कौन मुस्कराएगा अब ,
रूठ कर भी कौन बोलेगा अपना ख्याल रखना,
कैसे पूरा होगा तेरे साथ देखा हर सपना ,
मानता हूं गलती हुई तो क्या मारने का इरादा है,
तू कह दे एक बार मर जाऊंगा ये वादा है,
पर अपने जुल्फों की छाँव देदे जलता हूँ मैं |
अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

फिछे से ढक लेना मेरी आँखों को अपने हाथों से,
दिल को गुदगुदाना अपनी प्यारी प्यारी बातों से ,
कैसे भूल गयी वो लम्हे जो साथ साथ बिताये थे ,
याद नहीं वो जीवन के गीत जो साथ मिल के गये थे?
चल भूल जा सारे गीले शिक़वे गले से लागले,
आ फिर साथ साथ थोड़ा मिल के मुस्कुरा लें ,
जो चुभा है दिल में कंही कांटा निकाल देते है अब,
फिर से एक दूसरे की बांहो में बांहे डाल देते है अब,
अकेले जिया नहीं जाता तेरे लिए ठहरता हूं मैं |
अरे पगली तुझसे मोहब्बत करता हूं मैं|

:-मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by गिरिराज भंडारी on Thursday

आदरनीय मोहित भाई , प्रेम भाव से ओत प्रोत कविता के लिये बधाई । शब्दों की वर्तनी का ख्याल कीजिये ... मज़ा कम होता है ।

Comment by Mohit mukt on Monday

माननीय आरिफ जी प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया | आगे से आपकी बातों का ख्याल रहेगा 

Comment by Mohammed Arif on March 19, 2017 at 6:21pm
आदरणीय मोहित मुक्त जी आदाब, मुहब्बत के रंग में सराबोर कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए । वर्तनीगत ढेरों अशुद्धियाँ हैं ।सुधार कु अपेक्षा है ।

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