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ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )

ग़ज़ल
-------
(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल )

क़ियामत की वो चाल चलते रहे |
निगाहें मिलाकर बदलते रहे |

दिखा कर गया इक झलक क्या कोई
मुसलसल ही हम आँख मलते रहे |

यही तो है गम प्यार के नाम पर
हमें ज़िंदगी भर वो छलते रहे |

मिली हार उलफत के आगे उन्हें
जो ज़हरे तअस्सुब उगलते रहे |

तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ
वफ़ा के दिए सारे जलते रहे |

असर होगा उनपर यही सोच कर
निगाहों से आँसू निकलते रहे |

था तस्दीक़ शाना किसी गैर का
जहाँ बैठ कर वो उछलते रहे |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Monday

मुहतरम जनाब मोहित साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ
का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---

Comment by Mohit mukt on Monday

 आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan बहुत सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने हार्दिक बधाई

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Monday

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी --

Comment by सतविन्द्र कुमार on Sunday
आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,बेहतरीन अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब ब्रजेश . कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब राघव साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---
जनाब ग़ज़ल तो ग़ज़ल होती है वो न कभी बदली है और न बदलेगी
अगर इसे बदलने की कोशिश की गयी तो वो ग़ज़ल नहीं रह सकती
मेरे हिसाब से मिसरा मुकम्मल है बदलाओ की ज़रूरत नहीं है ----सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---आपके मशवरे का शुक्रिया
मिसरा तो यही है " तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ " आप ने जैसा कहा
वैसा भी हो सकता है ---सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Friday

मुहतरम जनाब रवि साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

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