For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 कल हमारे समाज का सबसे श्रेष्ठ तबका ,

जो साक्षर कहलाते, आज निरक्षर हो गए ।

कूप मंडूप को ही जीवन का लक्ष्य समझा

आविष्कार कर न सके, वे गुलाम हो गए ।

समय की नजाकत को जिसने नहीं समझा,

ज्ञान का डंका बजाते, वे आज पीछे रह गए ।

इस बदलते जमाने में अपने को अलग रखा

विज्ञान के इस युग में वे अज्ञानी हो गए ।

खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्ख समझा

वे दुनिया की इस दौड़ में सब पीछे रह गए ।

साथियों समय बदल रहा, नजाकत को समझो,

तुम लड़ोगे आपस में तो विरोधी जीत जाएगा ।

उठो जागो उसे पहचानों वरना देर हो जाएगी

तुम्हारे हिस्से की रोटी कोई और ही ले जाएगा ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 57

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Ashery on January 17, 2017 at 3:47pm

श्री मान जी आपके सुझाव पर मैं पूरी तरह चलने का प्रयास करुगा । मैं इस जरूर काम कृगा  और अच्छा करने की चेष्टा करूंगा आपके इस मार्ग दर्शन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  

Comment by बृजेश नीरज on January 16, 2017 at 9:36pm

सर रचना को कुछ और समय दें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 16, 2017 at 9:36pm

आदरणीय राम जी, समय का महत्त्व बताती प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई. इस विधा से परिचित नहीं हूँ. कृपया मार्गदर्शन निवेदित है. सादर 

Comment by Samar kabeer on January 16, 2017 at 11:03am
जनाब राम आश्रय जी आदाब,ये रचना किस विधा में है ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक)
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब, सबसे पहले आपको ईद की दिली मुबारकबाद । हर शे'र असरदार । ईद का बेहतरीन…"
20 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on surender insan's blog post ग़ज़ल
"अगर बहर  २ २ २ २  २ २ २ है तो-----------उसकी मौज़ में रहता हूँ।---------ख़ुद हो शेर अगर…"
1 hour ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक)
"वा वाह क्या बात कही खूब गजल में त्यौहार असरदार तुम्हे ईद मुबारक"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ परिवार को ईद-उल-फ़ित्र की दिली मुबारकबाद ।"
2 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

ग़ज़ल(रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक)

221 1221 1221 122रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक,खुशियों का ये दे सबको असर ईद मुबारक।घुल आज फ़िज़ा में हैं…See More
3 hours ago
Nita Kasar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post ऐडवर्स रिपोर्ट(लघु कथा )
"एक तो चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी ।घर में घुसकर २०० रूपये ले गये सो अलग ।एेसे लोगों से दूरी भली ।ठगी से…"
5 hours ago
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...तत्र..!' (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"प्रतीकात्मक रूप से लिखी गई कथा के लिये व नायिका के दृष्टिकोण को उजागर करती कथा के लिये बधाई आद०…"
5 hours ago
Nita Kasar commented on विनय कुमार's blog post बढ़ता धुआं- लघुकथा
"सत्य घटना पर आधारित कथा के लिये बधाई आद० विनय सिंह जी ।"
5 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on KALPANA BHATT's blog post मूक दर्शक (लघुकथा)
"अच्छा कटाक्ष करती शानदार रचना के लियर ढेर सारी बधाई स्वीकार करें आदरनीया"
5 hours ago
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT's blog post मूक दर्शक (लघुकथा)
"अब मूकदर्शक स्पष्ट हो गया कौन रहा ।कटु व्यंग्य के लिये बधाई ।आद० कल्पना जी ।"
5 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"आदरनीय सौरभ सर बड़ी शिद्दत से आपका और आपकी रचना का जो इंतेज़ार था आज ख़त्म हुआ वो भी ईद के इस शानदार…"
5 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on विनय कुमार's blog post बढ़ता धुआं- लघुकथा
"बहुत ही मार्मिक रचना अभी टी वी पर इसी रचना जैसी घटना पर समाचार सुन रहा था इस रचना के लिए ढेरों बधाई…"
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service