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!!! शालिनी छन्द !!!
शालिनी छन्द के प्रत्येक चरण मे 11 वर्ण होते है तथा इसमें एक मगण, दो तगण तथा दो गुरू होते हैं।
-1-
राधे-राधे गीत जो गा रहे हैं।
कृष्णा जैसे मीत वो पा रहे है।।
आत्मा से औचित्य भी भा रहे हैं।
काया के अट्टालिका ढा रहे हैं।।
-2-
भावों से पाया जमीं सार सारा।
बीथीं-बीथीं भाग्य का पार पारा।।
दुःखों से आनन्द का धार* धारा।.......*मार्गं
पश्चातापों से सभी जार* जारा।।......*पाप
-3-
वृक्षों-बृक्षों से फले कामनाएं।
तारों-तारों में छिपे आशनाएं।।
बच्चों-बच्चों में जगे भावनाएं।
आशातीतों से करे प्रार्थनाएं।।
-4-
अंग्रेजों को मात देते रहे हैं।
गद्दारों का बोझ ढोते रहे है।।
सम्मानों की राह रोते रहे हैं।
भ्रष्टाचारी देश खाते रहे हैं।।
-5-
खेती-बाड़ी छोड़ता गांव सारा।
रोजी-रोटी त्रासदी को पुकारा।।
पत्नी-बच्चों का नहीं साथ यारा।
जीता है क्या लाश बन्दा कुंआरा।।


के0पी0सत्यम/ मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on June 19, 2013 at 9:51pm

आदरणीय भाई केवल जी,सुन्दर छंद है //लेकिन भाई अरुण शर्मा जी से सहमत भी //सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 19, 2013 at 8:57pm

आदरणीय भाई केवल प्रसाद जी एक नए छंद से परिचय करवाने हेतु आपका हार्दिक आभार, मुझे इस छंद का ज्ञान नहीं इस हेतु कुछ ज्यादा नहीं कह सकूँगा मुझे शिल्प की कमी खटक रही है रचना थोड़ी कसावट की मांग करती दिख रही है, प्रयास हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 18, 2013 at 6:43pm

आ0 श्याम नारायण जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन से मैं धन्य हुआ। आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 18, 2013 at 6:40pm

आ0 कुन्ती मैम जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन से मेरा मान बढ़ गया। आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 18, 2013 at 6:19pm

आ0 अमन भाई जी, यहां सभी सीख रहे हैं। भाई जी, जिसने साहित्य विधा पर ध्यान दिया वह आगे बढ़ गया। मैने भी यह छन्द पहली बार ही प्रयास किया है। आपकी प्रसंशा हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by Shyam Narain Verma on June 18, 2013 at 12:22pm
इस प्रस्तुति हेतु बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ.......................
Comment by coontee mukerji on June 18, 2013 at 12:18pm

खेती-बाड़ी छोड़ता गांव सारा।
रोजी-रोटी त्रासदी को पुकारा।।
पत्नी-बच्चों का नहीं साथ यारा।
जीता है क्या लाश बन्दा कुंआरा।..........बहुत सुंदर छ्न्द लिखा है आपने केवल जी /

सादर

कुंती

Comment by aman kumar on June 18, 2013 at 11:21am

साहित्य की कला मई आप निपुण है , साथ ही हर्द्य भी अति कोमल है दुर्लभ मिश्रण ..........

मजा आ गया !

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