नीम में लगती दीमक
रिश्तों में मिठास नहीं
डूब गयी आशा किरण
एक दूजे पे विश्वास नहीं
रिश्तों का प्रबल क्षरण
जुड़ने के आसार नहीं
घर घर छिड़ा अब रण
मीठा स्वप्न संसार नहीं
चन्दन लिपटत न भुजंग
शीतलता का वास नहीं
माता करती भ्रूण भंग
नारी के संस्कार नहीं
भूल गए करना सत्संग
जीवन से अब प्यार नहीं
Comment
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 5:03pm धन्यवाद, योगी जी, सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 5:03pm आदरणीय सौरभ गुरुदेव सर जी, सादर अभिवादन.
कोशिश में ही झूम गए. बहुत बड़ा आशीर्वाद है मेरे लिए.
आभार.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 5:01pm धन्यवाद, आदरणीय बागडे जी, सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 5:00pm धन्यवाद आदरणीय पटेल जी, सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 4:59pm धन्यवाद आदरणीय अलबेला जी, सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 4:59pm धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी, सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on September 21, 2012 at 4:58pm धन्यवाद स्नेही गौरव जी, सादर
Comment by Yogi Saraswat on June 22, 2012 at 3:57pm शीतलता का वास नहीं
माता करती भ्रूण भंग
नारी के संस्कार नहीं
भूल गए करना सत्संग
जीवन से अब प्यार नहीं
बहुत सुन्दर रचना आदरणीय प्रदीप कुशवाहा जी

आपकी भली कोशिश पर हम झूम गये .. .
बधाई.. .
Comment by AVINASH S BAGDE on June 21, 2012 at 3:40pm नीम में लगती दीमक
रिश्तों में मिठास नहीं
डूब गयी आशा किरण
एक दूजे पे विश्वास नहीं wah.....
aadarniy DEEMAK ji ko samarpit doosari(post pahali) rachana(Deep ki)
nice Pradeep ji.
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
Laxman Prasad Ladiwala replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
ram shiromani pathak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
ram shiromani pathak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
ram shiromani pathak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
ram shiromani pathak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
Laxman Prasad Ladiwala replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
Laxman Prasad Ladiwala replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
ram shiromani pathak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
Raj Kumar Jindal commented on POOJA AGARWAL's blog post वहशी लोग
अरुन शर्मा 'अनन्त' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
कल्पना रामानी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक
Laxman Prasad Ladiwala replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तक© 2013 Created by Admin.
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |


You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online