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ग़ज़ल: तकते रहो बस आसमान की तरफ

2212/2212/2212

फ़रमान सरकारी यह किसान की तरफ
तकते रहो बस आसमान की तरफ

बुल्लेट ट्रेन बहुत नफ़ा देगा तुम्हें
पटरी जब गुज़र जाय खलिहान की तरफ

हम आपकी दुगुनी करेंगे आय को
नदियाँ मुड़ेंगी जब सब मकान की तरफ

दो ही रस्ते अब बच रहे आखीर में
उन के रहें साथ या हिंदुस्तान की तरफ

माना सियासत में सबकुछ है जायज़
कुछ तो फ़र्ज़ होता है इनसान की तरफ

दण्डपाणि नाहक
मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by Mohammed Arif on January 18, 2018 at 11:52am

आदरणीय दंडपाणी जी आदाब,

                       बहुत  ही कटाक्षपूर्ण ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

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