For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

छंद मुक्त कविता : रावण दहन

छंद मुक्त कविता : रावण दहन

मैं रूप बदल कर बैठा हूँ ।
स्वरूप बदल कर बैठा हूँ ।
मैं आज का रावण हूँ मितरों,
जन के मन में छुप बैठा हूँ ।।

मुझको जितना भी जलाओगे ।
हर घर में उतना पाओगे ।
गर मरना भी चाहूँ मितरों,
तुम राम कहाँ से लाओगे ।।

कन्या को देवी सा मान दिया ।
नारी को माँ का सम्मान दिया ।
इन बातों का नही अर्थ मितरों,
जब गर्भ में कन्या का प्राण लिया ।। 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 88

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 16, 2019 at 7:29pm

आ. भाई गणेश जी , बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2019 at 10:10am

अच्छी शिक्षाप्रद कविता आदरणीय..हार्दिक बधाई

Comment by Samar kabeer on October 11, 2019 at 7:11pm

जनाब गणेश जी 'बाग़ी' साहिब आदाब,बहुत उम्द: और सटीक तंज़ किये हैं आपने इस कविता के माध्यम से,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 11, 2019 at 11:14am

हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश जी बागी जी। बेहतरीन प्रस्तुति।

Comment by Sushil Sarna on October 10, 2019 at 5:13pm

आदरणीय गणेश जी बागी साहिब, आदाब .... सर बहुत सुंदर और सार्थक सृजन हुआ है। इस पेशकश के लिए दिल से बधाई।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 8, 2019 at 4:57pm

आदाब। समसामयिक परिदृश्य, आकांक्षाओं, कामनाओं, आग्रह और आह्वानों को समेटती बेहतरीन छंदमुक्त चतुष्पदियों हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय श्री गणेशजी बागी साहिब। विजयादशमी पर्व पर हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएँ कही हैं। हार्दिक बधाई, मित्र सुशील जी।"
35 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पानी पर चंद दोहे :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है मेरे दामन से…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर इक सू से सदा ए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।सुना है इस वतन को बेटियां अच्छी नहीं लगतीं ।। न जाने…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदम युग से आज तक, नर बदला क्या खासबुझी वासना की नहीं, जीवन पीकर प्यास।१। जिसको होना राम था, कीचक बन…"
3 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"शुक्रिया महेंद्र जी, कभी कभी ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं"
5 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"बहुत शुक्रिय: मंजू सक्सेना जी ।"
5 hours ago
Manju Saxena commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल... कबीर सर"
9 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

प्रकृति मेरी मित्र

प्रकृति हम सबकी माता हैसोच, समझ,सुन मेरे लालकभी अनादर इसका मत करनावरना बन जाएगी काल गिरना उठना और…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
13 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service