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जहाँ ये कर दिखाना होगाl

जहाँ ये कर दिखाना होगाl

हमारे  दिल   बताना होगा l

करोगे  बात जैसी  तुम भी  ,

सवालों को उठाना होगा l

सुनी  जो  भीड़ तूने   गाती  ,

मिरे दिल का फ़साना होगा l

ख़बर जाती  कहानी जब है,   ,

नया किरदार निभाना होगा l

बताते  जो     ज़माने वाले,

हकीकत कब  छिपाना होगा l

बदल जाना कहाँ रोका हम ने ,

अंधेरों को   भगाना  होगा l

कोई  जो सोच कर बैठा है,

संभाला   तू  नगीना होगा l

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 7, 2019 at 6:36am

आ. भाई मोहन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Samar kabeer on October 4, 2019 at 11:08am

जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

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