For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल

© बसंत कुमार शर्मा

मापनी - १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

सदा देता, न लेता कुछ, बुरी नजरों से ताड़ो मत

शजर है घर परिंदों का, उसे तुम यूँ उजाड़ो मत

 

बड़ी उम्मीद होगी, मगर कुछ भी न पाओगे

सयानी है बहुत जनता, यूँ मंचों पर दहाड़ो मत

 

वहाँ पत्थर ही पत्थर थे, न मिट्टी थी न पानी था

उगा है अपने दम पर वो, पनपने दो उखाड़ो मत

 

कभी तन्हा अगर हों तो सुकूं देती बहुत हमको

ज़ेहन में पर्त यादों की जमी रहने दो’ झाड़ो मत

 

कमाकर खर्च कर लेना या’ फिर दान में दे दो  

बड़े ही काम की दौलत जमीं में इसको’ गाड़ो मत

 

करो हासिल इसे मेहनत लगन ईमानदारी से  

इधर से या उधर से तुम ये सिंहासन जुगाड़ो मत

 

लिखी है आँसुओं से ये कहानी है मुहब्बत की

नहीं कागज ये’ कोरा है पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on October 13, 2018 at 9:43pm

आदरणीय   TEJ VEER SINGH जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on October 13, 2018 at 9:43pm

आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 9:21am
कहीं सामाजिक अव्यवस्था पर कटाक्ष करते,,तो कही शिक्षाप्रद शेर,, वाकई बहुत ही खूबसूरत रचना।
Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 9:16am
आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, प्रणाम! बहुत ही बेहतरीन रचना। बह्र का मुझे ज्ञान नही परंतु भाव एवं प्रवाह बेजोड़ है। कुछ सामाजिक अव्यवस्था
Comment by TEJ VEER SINGH on October 12, 2018 at 6:47pm

हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी। बेहतरीन गज़ल।

करो हासिल इसे मेहनत लगन ईमानदारी से  

इधर से या उधर से तुम ये सिंहासन जुगाड़ो मत

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 12, 2018 at 6:39pm

 हर शे'अर में अद्भुत हक़ीक़त बयानी, गहराई, सबक़, नसीहत व प्रेरणा लबरेज़ है। बेहतरीन सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मन मार्जियां "
"जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल बह्र और क़वाफ़ी के हिसाब से समय चाहती…"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। अब न चर्चा करो तुम मेरी मुहब्बत की हुजूऱ ।अब तलक मुझको…"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"हार्दिक बधाई आदरणीय निलेश जी।बेहतरीन गज़ल। तुम क्या गए तमाम नगर अजनबी हुआ मुद्दत हुई है घर से…"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुआवज़ा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
11 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (ज़ख्म सारे दर्द बन कर)
"वाह बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब जोहैब जी..तीसरे शेर में रदीफ़ेन दोष है क्या?"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (सुन कर ये तिरी ज़ुल्फ़ के मुबहम से फ़साने)
"वाह बहुत ही खूब ग़ज़ल हुई है ज़नाब..मुबारक़"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंद्र जी बढ़िया ग़ज़ल कही है..सादर"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "दीवाना "
"अच्छी ग़ज़ल कही ज़नाब प्रदीप जी..बधाई"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"वाह बढ़िया कविता आदरणीय..."
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अमृतसर रेल दुर्घटना विभीषिका पर 5 लघुकथाएं
"ये पांचों बेहतरीन लघुकथायें फीचर किये जाने पर तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब  डॉ.…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुआवज़ा - लघुकथा -
"आजा... आजा... मुआवज़ा आजा। भ्रष्टाचार के आदी , योजनाओं व घोषणाओं के अवैध  हितग्राहियों पर बेहद…"
13 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service