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गीत...तितलियाँ अब मौन हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'

शोर भौरों का सुनोगे
तितलियाँ अब मौन हैं

रक्त रंजित हो उठा मन
रोज के अख़बार से
हर कली सहमी हुई है
आह अत्याचार से
इस चमन में भेड़ियों से
आदमी ये कौन हैं
शोर भौरों का सुनोगे
तितलियाँ अब मौन हैं

प्रीत का संगीत गुमसुम
भाव के व्यापार में
सत्य का उपहास करता
छल कपट संसार में
प्रेम है अनुबंध जैसा
प्रेम परिणय गौण है
शोर भौरों का सुनोगे
तितलियाँ अब मौन हैं

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on September 19, 2018 at 2:12pm

आदरणीय ब्रजेश कुमार जी आपकी भावपरक गीत पढ़कर बड़ी प्रसन्नता हुई इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 19, 2018 at 11:15am

आभार संग नमन आदरणीय लक्ष्मण धामी जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 19, 2018 at 11:14am

आदरणीय सुशील सरना जी हार्दिक धन्यवाद...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 19, 2018 at 11:13am

रचना पटल पे आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीय गंगाधर शर्मा जी...

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 18, 2018 at 11:53pm

आ. भाई बृजेश जी,  सुंदर और भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on September 18, 2018 at 7:00pm

आदरणीय बृजेश जी सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on September 18, 2018 at 4:42pm

आदरणीय बृजेश जी...बहुत ही भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई....

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