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होके मजबूर तेरी गलियों से जाना होगा ।
अब खुदा जाने कहाँ अपना ठिकाना होगा ।

मै मना पाया न रब को न तेरे दिल को,
अब तो तनहाई में खुद को ही मनाना होगा ।

जान मेरी मै बिना तेरे जियूँगा लेकिन,
मेरे जीने में न जीने का बहाना होगा ।

तनहा होकर भी रहूँगा न कभी तनहा,
तेरी यादों का मेरे साथ ज़माना होगा ।

हर रजा अपनी मै हारूँगा रजा पर तेरी,
प्यार जब कर ही लिया है तो निभाना होगा ।

प्यार का नाम फकत प्यार को पाना तो नहीं,
ये कोई कर्ज़ है जो मुझको चुकाना होगा ।

नीरज मिश्रा
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on Wednesday

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on Wednesday

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on Wednesday

आदर्णीय नीरज जी खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई

Comment by vijay nikore on February 14, 2018 at 9:58am

 आ० नीरज जी, हार्दिक बधाई इस अच्छी गज़ल के लिए।

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 14, 2018 at 12:40am

बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 14, 2018 at 12:39am

बहुत बहुत हार्दिक शुक्रिया आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 14, 2018 at 12:39am

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 13, 2018 at 6:36pm

बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय नीरज जी | हार्दिक बधाई

Comment by Mohammed Arif on February 13, 2018 at 2:30pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी आदाब,

                              बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।कुछ वर्तनीगत अशुद्धियों को देखिएगा ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 13, 2018 at 10:51am

आद0 नीरज जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। शेर दर शैर बधाई देता हूँ।

कृपया ध्यान दे...

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